बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

कश्मीर मुद्दे पर पाक के साथ क्यों है तुर्की, जानिए कैसे हैं भारत के साथ संबंध

प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 14 Feb 2020 03:14 PM IST
विज्ञापन
Recep Tayyip Erdogan Narendra Modi
Recep Tayyip Erdogan Narendra Modi - फोटो : PTI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
साल 2017। तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्डोगन भारत की यात्रा पर थे। दोनों देशों ने पुराने विवादों को भूलकर आपसी संबंधों की नई इबारत लिखने की तैयारियां की थी। लेकिन, किसे पता था कि तुर्की अपने पाक प्रेम को छोड़ भारत की तरफदारी कभी नहीं करेगा। शायद, यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण इस देश की यात्रा आज तक नहीं की।
विज्ञापन


हाल में ही तुर्की के राष्ट्रपति ने अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की मदद करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर में कथित तौर पर हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन मसला उठाया। एर्डोगन ने हद पार करते हुए कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से कर डाली।


बड़ी बात यह है कि भारत जैसे विशालतम लोकतंत्र को मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे एर्डोगन तुर्की में एक कट्टर इस्लामिक तानाशाह के रूप में जाने जाते हैं। नरमपंथी इस्लामी दल एकेपी से ताल्लुक रखने वाले मौजूदा तुर्की राष्ट्रपति एर्डोगन कमाल अता तुर्क की कमालवाद विचारधारा को खत्म कर देश की धर्मनिरेपक्षता समाप्त करने में जुटे हुए हैं। 

तुर्की में एर्डोगन की तुलना सद्दाम हुसैन, बशर अल असद और मुअम्मर गद्दाफी जैसे तानाशाहों से की जाती है। एक तरफ तो एर्डोगन यूरोपीय यूनियन में शामिल होना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ तुर्की में ओटोमन साम्राज्य को स्थापित कर खुद को बड़े इस्लामिक लीडर के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। 

तुर्क विचारधारा को छोड़ा पीछे

तुर्की के संस्थापक और पूर्व सैन्य अधिकारी मुस्तफा कमाल अता तुर्क को वहां के कट्टर धार्मिक मुस्लिम इस्लाम का दुश्मन मानते थे। प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्क साम्राज्य के पतन के बाद मुस्तफा ने तुर्की की आजादी की जंग लड़ी और 1923 में तुर्क गणराज्य का गठन किया और वह तुर्की के पहले राष्ट्रपति बने। वे ऐसे शासक थे, जिनके शासनकाल में तुर्की ने खूब उन्नति की और कट्टर इस्लामिक ओटोमन साम्राज्य को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में बदल दिया। 

'युवा तुर्क' विशेषण का जन्म

मुस्तफा कमाल अता तुर्क का मानना था कि मौजूदा वक्त में अरबी सिद्धांतों को मानना तर्कसंगत नहीं है। जिसके चलते उन्हें युवा तुर्क भी कहा जाता था। आज भी भारत में प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष, आधुनिक और तार्किक प्रकृति वाले कई युवा नेताओं को युवा तुर्क कहा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us