अनलॉक 5.0: केंद्र की राज्यों को कठोर हिदायत, दिशा-निर्देशों से छेड़छाड़ पर दंड और जुर्माना

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 01 Oct 2020 05:21 AM IST
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देश में एक अक्तूबर से अनलॉक 5.0 लागू हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को इसके लिए गाइडलाइंस जारी कर दी है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को कठोर हिदायत दी है कि वे किसी भी तरह से इन गाइडलाइंस में बदलाव न करें। सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए राज्य, सेक्शन 144 सीआरपीसी 1973 का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बावजूद राज्य में गाइडलाइंस का पालन संभव नहीं हो पाता है तो संबंधित प्रदेश सरकार नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कार्रवाई कर सकती है।
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उल्लंघनकर्ता के खिलाफ सेक्शन 188 आईपीसी के अंतर्गत सख्त एक्शन लेने का प्रावधान रखा गया है। बता दें कि पिछले कई अनलॉक के दौरान विभिन्न राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस को पूर्ण तरीके से लागू नहीं किया गया था।
कुछ राज्यों ने अपनी मनमर्जी से इन गाइडलाइंस में बदलाव भी कर दिया था। इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा था कि वे गाइडलाइंस का पालन करें और इनमें अपनी मनमर्जी से किसी तरह का बदलाव न करें। सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, विभिन्न संगठन, कामगार और सामान्य नागरिक केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करें, इसके लिए कई सख्त प्रावधान किए गए हैं।
  • यदि कोई व्यक्ति या संस्था, गाइडलाइन का उल्लंघन करती है तो उसे अपराध माना जाएगा। इसके लिए उन्हें जेल की सजा और आर्थिक दंड, दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 तक कई प्रावधान किए गए हैं। उनमें दो साल की सजा और जुर्माना, दोनों का प्रावधान है। कोई भी व्यक्ति, सरकारी या गैर सरकारी संस्था, इनका उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ बिना किसी देरी के कार्रवाई की जाए। इस अधिनियम की धारा 51 में कहा गया है कि कोई व्यक्ति बिना किसी कारण के सरकारी कार्यों या ड्यूटी में बाधा पहुंचाता है तो उसे एक साल की सजा हो सकती है। इसमें जुर्माना भी रहेगा।
  • अधिनियम की धारा 52 में मिथ्या दावे के लिए दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई कर्मी जानबूझकर केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार, राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण अथवा जिला प्राधिकरण से आपदा के परिणामस्वरूप कोई राहत, सहायता, मरम्मत का कार्य, दोबारा निर्माण या अन्य फायदा प्राप्त करने के लिए ऐसा दावा करता है, जिसके बारे में वो खुद जानता है कि वह दावा झूठा है तो दोषसिद्धि पर उसे दो वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। इसमें जुर्माना करने का भी प्रावधान है।
  • धारा 53 के अनुसार, ऐसे केस में अगर धन या सामग्री का दुरुपयोग होता है तो जिम्मेदार व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा मिलेगी। जुर्माना भी रहेगा।
  • धारा 54 के तहत यदि कोई मिथ्या चेतावनी जारी होती है तो इस स्थिति में भी एक वर्ष तक की सजा दी जाएगी।
  • धारा 55 के मुताबिक, कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया है तो विभागाध्यक्ष को इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा। तब तक विभागाध्यक्ष को दोषी माना जाएगा, जब तक वह ये साबित नहीं कर देता कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था। उसे यह भी साबित करना होगा कि उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए तय समय पर तत्परता बरती थी।  
 
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