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जयपुर

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

शहीद होने से पहले राजीव ने पत्नी से कहा था, जल्दी आऊंगा... मगर अब तिरंगे में लिपटा पहुंचेगा घर

राजस्थान: सरकार ने बढ़ाया शराब बिक्री का लक्ष्य, सरकारी एजेंसियां भी खोलेंगी दुकान

राजस्थान सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आबकारी व मद्य संयम नीति जारी करते हुए कहा है कि वह उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्तापरक उत्पाद उपलब्ध करवाने के साथ-साथ शराब के बढ़ते प्रचलन को हत्सोहित करने पर ध्यान देगा। राज्य सरकार ने यह नीति शनिवार को जारी की जिसमें कहा गया है कि यह नीति 31 मार्च 2021 तक एक साल के लिए होगी जिसे एक और साल के लिए बढाया जा सकता है।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि वह आबकारी राजस्व में आ रही कमी को इस नीति के जरिए रोक पाएगी। राज्य सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में आबकारी मद से लगभग 10500 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है। इसके तहत वह शराब की दुकानों के लिए लाइसेंस नये सिरे से जारी करेगी। इसमें देसी शराब, राजस्थान में बनी शराब, भारत में बनी विदेशी शराब व भांग बेचने के लाइसेंस शामिल हैं।

नीति में आबकारी विभाग को मजबूत बनाने की बात भी की गयी है जिसके तहत विभाग व पुलिस द्वारा 2020 -21 व इससे पहले शराब के अवैध परिवहन के मामलों में जब्त किए गए वाहनों की नीलामी ई आक्शन द्वारा की जाएगी। इससे 25 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा विभाग को संसाधन खरीदने के लिए दिया जाएगा। इसी तरह भरतपुर व बहरोड़ में आबकारी प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव भी इस नीति में है।
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राजस्थान : जयपुर में कश्मीरी किशोर की साथी ने पीट-पीट कर की हत्या, एक गिरफ्तार

कैटरिंग कंपनी में काम करने वाले 17 वर्षीय किशोर को उसके साथियों ने छोटी सी बात पर इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। घटना बुधवार रात की है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामले की जांच की जा रही है। 

जयपुर के पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने बताया, मारा गया किशोर बासित जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा का रहने वाला था। बुधवार रात को वह आरोपी आदित्य (24) के साथ एक शादी समारोह से लौट रहा था। दोनों एक पिक अप वैन में सवार थे। इस दौरान वैन की खिड़की बंद करने को लेकर बासित और आदित्य में हाथापाई होने लगी। 

इस दौरान वहां मौजूद बाकी लोगों ने बीच बचाव कराया। घर पहुंचने पर बासित को उल्टी होने लगी और उसके दोस्त ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवारवालों को सौंप दिया गया है।  

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Coronavirus: लॉकडाउन पर कोई भी फैसला राज्यों को भरोसे में लेकर लिया जाए- अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि 14 अप्रैल को खत्म होने वाले राष्ट्रीय लॉकडाउन के बारे में कोई भी फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार को राज्यों को विश्वास में लेना चाहिए। गहलोत ने कहा कि अगर केंद्र को लॉकडाउन खत्म हटाने या बढ़ाने का फैसला राज्यों पर छोड़ देना चाहिए।

क्योंकि हर राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति और आंकड़े अलग अलग हैं, इसलिए यह निर्णय राज्य सरकारों पर छोड़ देना चाहिए कि वह अपने-अपने राज्यों की परिस्थितियों और जरूरतों के मुताबिक किस सीमा तक पाबंदियां लगाएं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह उनकी अपनी राय है और केंद्र सरकार जो भी फैसला करेगी राजस्थान सरकार उसका पालन करेगी।

जयपुर में अपने आवास से अमर उजाला से फोन पर बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को लेकर केंद्र जो भी फैसला ले वह राज्यों को विश्वास में लेकर करना चाहिए। क्योंकि आखिरकार जमीनी स्तर पर केंद्र के फैसले को लागू करना और कोरोना से निबटना राज्य सरकारों की ही जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जाहिर की राजस्थान में कोरोना संक्रमण पर काबू पा लिया जाएगा। गहलोत ने कहा कि भीलवाड़ा में जिस तरह स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मुस्तैदी से काम किया है वह सिर्फ राजस्थान के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए कोरोना के खिलाफ लड़ाई का एक मॉडल है।

गहलोत ने उम्मीद जाहिर की केंद्र सरकार कोरोना से लड़ने के लिए उनके बकाए का भुगतान जल्दी करेगी और अतिरिक्त धन व संसाधन मुहैया कराएगी।

गहलोत ने कहा कि राजस्थान में स्थितियां लगभग काबू में आ गईं थी, लेकिन दिल्ली के निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए कुछ लोगों के लौटने से यहां हालात फिर बिगड़े। लेकिन प्रशासन ने चुस्ती से संक्रमित लोगों को क्वारंटीन करके हालात पर नियंत्रण पा लिया है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह पुलिस प्रशासन और डाक्टर व चिकित्साकर्मी राज्य में काम कर रहे हैं उससे उन्हें पूरी उम्मीद है कि राज्य को कोरोना से मुक्ति मिल जाएगी।

गहलोत ने सवाल किया कि जब भारत में कोरोन संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आ गया था और फरवरी में यह संख्या बढ़ने लगी थी, तब मार्च में तब्लीगी जमात के दिल्ली कार्यक्रम को अनुमति क्यों दी गई और बाहर से आने वालों के वीसा क्यों नहीं रद्द किए गए या उन्हें हवाई अड्डे पर ही क्यों नही क्वारंटीन किया गया।

उन्होंने कहा कि आयोजकों और प्रशासन की इस लापरवाही ने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी। गहलोत ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राजस्थान सरकार पूरी तरह केंद्र सरकार से तालमेल बनाकर काम कर रही है।

लेकिन राज्य को ज्यादा से ज्यादा जांच किट, दवाओं और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पीपीई किटों की आवश्यकता है। केंद्र यह सब जल्दी से जल्दी मुहैया कराए। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को जो पांच सुझाव दिए हैं, सरकार को उन पर तत्काल अमल करना चाहिए।
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अशोक गहलोत (फाइल फोटो) अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

Coronavirus: रामगंज में भीलवाड़ा मॉडल से काबू कर लेंगे हालात - अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना के हॉटस्पॉट बने जयपुर के रामगंज मुहल्ले के हालात पर भी भीलवाड़ा मॉडल से जल्दी ही काबू पा लेने के लिए आश्वस्त हैं। भीलवाड़ा मॉडल का नाम लेते हुए गहलोत के चेहरे पर विजयी भाव उभर आते हैं क्योंकि इसे तमाम अन्य सीएम तथा केन्द्र भी सराह रहे हैं।

कहते हैं, 3 मार्च को इटली के पर्यटकों का कोविड-19 का पहला मामला जानकारी में आया था, उसके बाद ही मैं सतर्क हो गया था। राहुल गांधी को श्रेय देते हुए गहलोत कहते हैं कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कोविड-19 को लेकर 12 फरवरी से चेता रहे थे। केन्द्र सरकार ने 22 मार्च से लॉकडाऊन की ओर बढ़ना शुरू किया था लेकिन हम 18 मार्च से राजस्थान में कोविड-19 से लडऩे के लिए इसे अपना रहे हैं।

40 स्थानों पर है कर्फ्यू, जयपुर के रामगंज को भी ठीक कर लेंगे

वीडियो वार्ता और फिर अमर उजाला से अलग से बातचीत में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राजस्थान अभी कोविड-19 के खतरे से मुक्त नहीं हुआ है। 40 स्थानों पर अभी भी कर्फ्यू लगाया गया है। तीन स्तर पर टीमें बनाकर मानिटरिंग की जा रही है। लॉकडाऊन को लेकर पूर्व केन्द्रीय वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स बनी है। एक टास्कफोर्स और बनी है।

राज्य सरकार हालात पर नजर रखकर लोगों की जान बचाने में सक्रिय है। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी अपने स्तर से कोऑर्डिनेश के काम में लगे हैं। राज्य सरकार की रणनीति है कि हॉटस्पॉट बने रामगंज मोहल्ले में भी भीलवाड़ा की तरह रैंडम टेस्टिंग करके लोगों की पहचान कर इलाज किया जाएगा।

10 लाख रैपिड टेस्टिंग किट का आर्डर

गहलोत कहते हैं, राजस्थान की आबादी 7.5 करोड़ है और राज्य सरकार कम से कम पांच करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग करना चाहती है। इसके लिए एक लाख बेड की व्यवस्था की जा रही है और 10 लाख रैपिड टेस्ट किट का आर्डर किया है। रैंडम टेस्टिंग के  जरिए इस लक्ष्य को पाने का संकल्प है।

इसके लिए चिकित्सकों, नर्सों अन्य स्टाफ के लिए मास्क, पीपीई किट आदि का भी इंतजाम किया गया है। अशोक गहलोत ने बताया कि वह केन्द्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए कोविड-19 से लड़ने के लिए कृतसंकल्प हैं।

भारत से निर्यात समझ में नहीं आया

मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार की निर्यात की नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन के भारत से आयात पर जुड़े सवाल को लेकर कहा कि अपने लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत को कोविड-19 से लडऩे के लिए संसाधनों की काफी जरूरत है।

ऐसे समय में केन्द्र सरकार द्वारा विदेशों को चिकित्सा से जुड़े उपकरणों या दवाओं के निर्यात की छूट देना समझ से परे है। 

क्या है भीलवाड़ा मॉडल?

अशोक गहलोत से इस मॉडल का नाम लेते ही उनके चेहरे पर विजयी भाव उभर आते हैं। बताते हैं, कई राज्य अब इसे अपना रहे हैं। केन्द्र सरकार को भी भीलवाड़ा मॉडल अच्छा लगा है। भीलवाड़ा के बांगड़ में एक अस्पताल के एक चिकित्सक कोविड-19 से संक्रमित हुए। उनसे यह संक्रमण 19 लोगों में फैला।

इसके बाद भीड़वाड़ा प्रशासन, राज्य सरकार, चिकित्सा विभाग ने कड़ा फैसला लिया। भीलवाड़ा से लगती गांवों, जिलों की सभी सीमाएं सील कर दी गईं। पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिषद सब इस काम में लग गए।

3000 हजार टीमों का गटन किया गया। पूरे भीलवाड़ा को क्वारंटीन करके चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की गई। फिर 10  दिन में 18 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का काम हुआ। सर्दी, जुकाम, बुखार के कोविड-19 जैसी आशंका वाले संक्रमितों को आइसोलेट करके क्वारंटीन किया गया। गंभीर रूप से संक्रमितों का इलाज किया गया।

करीब छह लाख परिवारों के 30 लाख लोगों की स्क्रीनिंग के बाद भीलवाड़ा में कोविड-19 के संक्रमण पर काबू पा लिया गया। लोगों को क्वारंटीन करने के लिए सभी होटल, रेस्ट हाउस समेत अन्य रिसोर्स का इस्तेमाल किया गया। हास्टल आदि में बेड, आइसोलेशन की व्यवस्था की गई।

25-25 बेड के चार अस्पतालों में कोविड-19 के संक्रमित लोगों को रखा गया। साथ ही 7.2 लाख लोगों की निगरानी की गई। अब केवल 7 पॉजिटिव संक्रमण वाले मरीज रह गए हैं और मुख्यमंत्री गहलोत को भरोसा है कि जल्द ही ठीक करके घर भेज दिए जाएंगे।
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गुलाबी नगरी ही क्यों बन रही संकट के दौरान विधायकों को ठहराने की पसंदीदा जगह, पढ़ें यह खबर

गुलाबी नगरी 'जयपुर' पर्यटकों के अलावा उन राजनेताओं के लिए भी पसंदीदा जगह बन गया है, जो उस वक्त यहां लाकर ठहराए जाते हैं, जब किसी राज्य में 'सत्ता की कुर्सी' हिलने लगी हो। ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश का है। कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन कर ली है और मध्यप्रदेश के अनेक कांग्रेसी विधायकों को जयपुर के एक होटल में लाकर बैठा दिया गया है। इससे पहले जब भाजपा की वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं, तो गोवा और झारखंड के कुछ विधायकों को गुलाबी नगरी में लाया गया था।
 
मध्यप्रदेश के ताजा प्रकरण में वहां के विधायकों को तीन जगहों पर भेजा गया है। भाजपा के सभी विधायक हरियाणा के गुरुग्राम में ठहरे हैं। कांग्रेस पार्टी के अधिकांश विधायक जयपुर में पहुंच गए हैं। भाजपा ज्वाइन करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक कई कांग्रेसी विधायक बेंगलुरु के होटल में बताए जा रहे हैं।

नवंबर 2019 में जब महाराष्ट्र में सत्ता का जोड़ तोड़ चल रहा था तो कांग्रेस पार्टी ने सभी 44 विधायकों को जयपुर में भेज दिया था। महाराष्ट्र के सभी कांग्रेसी विधायक कई दिनों तक कथित तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मेहमान बन कर रहे थे। ऐसी परिस्थितियों में विधायकों के आने-जाने और ठहरने का सारा इंतजाम मुख्यमंत्री को ही करना पड़ता है।

विधायकों के लिए आलीशान होटल या रिसोर्ट, क्या ठीक रहेगा, ये सब मुख्यमंत्री तय करते हैं। इतना ही नहीं, सबसे बड़ी जिम्मेदारी जो अंदरखाने मुख्यमंत्री को ही निभानी होती है, वह है विधायकों की सुरक्षा।

विधायकों पर लगी रहती है 'तीसरी आंख'

हरियाणा में तैनात एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि ऐसे मामले आते रहते हैं। बड़ी सीधी सी बात है कि वह पार्टी अपने विधायकों को उसी राज्य में भेजेगी, जहां पर उसे सौ फीसदी यह भरोसा रहता है कि वहां उनके विधायक पूरी तरह महफूज रहेंगे। इस मुहिम में संबंधित राज्य के खुफिया महकमे और पुलिस की सबसे ज्यादा भागदौड़ रहती है।

जब यह खबर आती है कि फलां राज्य से इतने विधायक आ रहे हैं तो मुख्यमंत्री यह तय करते हैं कि उन्हें कहां ठहराया जाएगा। विधायकों के होटल में आने से पहले खुफिया महकमा और उच्च स्तर के अफसर, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय सीधे तौर पर शामिल रहता है, वे यह बताते हैं कि कौन सा विधायक किस कमरे में ठहरेगा।

क्या एक कमरे में दो विधायकों को ठहराया जाए, विधायक के कमरे में फोन सुविधा देनी है या नहीं, मोबाइल फोन को जैमर के जरिए निष्क्रिय बनाना है या उन्हें विधायकों से लेकर जमा कर देना है, किसी के पास कोई खुफिया कैमरा तो नहीं है, होटल के चप्पे-चप्पे पर कितनी फोर्स तैनात रहेगी, ये सब कार्रवाई बहुत गोपनीय तरीके से पूरी होती है।

होटल के स्टाफ में कौन-कौन रहेगा, यह भी पुलिस विभाग तय करता है। होटल के गेट पर स्टाफ की चेकिंग की जाती है। किसी भी व्यक्ति को विधायकों से मिलने नहीं दिया जाता। संबंधित जिले का सीएमओ या अन्य कोई डॉक्टर, जिसे सीएम कार्यालय से हरी झंडी मिली हो, उससे ही विधायकों के स्वास्थ्य की जांच कराई जाती है।

अगर किसी विधायक का कोई बयान सोशल मीडिया में वायरल कराना है, तो उसके लिए भी ऊपर से मंजूरी लेनी पड़ती है।
 
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आठ मार्च को महिलाओं के हवाले रहेगी जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस

prayagraj news
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस की कमान महिला रेल कर्मियों के हवाले रहेगी। ट्रेन में आठ मार्च को पूरा महिला स्टाफ ही रहेगा। इसमें लोको पॉयलट, गार्ड, चेकिंग स्टाफ यहां तक कि सुरक्षा की बागडोर भी महिलाओं के ही जिम्मे रहेगी। ट्रेन प्रयागराज जंक्शन पहुंचेंगी तो यहां से भी महिला स्टाफ चढ़ेगा, जो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन तक जाएगी।

महिला दिवस के इस बार एनसीआर के  प्रयागराज मंडल में एक मार्च से ही मनाया जा रहा है, जो दस मार्च तक मनेगा। आठ मार्च को ही मुख्य आयोजन किया जाना है। इस दौरान जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के टूंडला पहुंचने के बाद उसकी कमान महिलाओं के हाथ में सौंप दी जाएगी। ट्रेन प्रयागराज आएगी तो यहां ट्रेन लेकर आने वालीं महिला स्टाफ का स्वागत होगा जबकि, जो महिलाएं यहां से दीन दयाल उपाध्याय ट्रेन लेकर जाएंगी, उन्हें भी सम्मानित किया जाएगा।

इस दौरान जंक्शन पर नुक्कड़ नाटक भी होगा। एनसीआर प्रयागराज मंडल के पीआरओ सुनील गुप्ता के मुताबिक मंडल में 1384 महिला रेलकर्मी तैनात हैं। इसमें 84 टिकट परीक्षक , 38 आरपीएफ , 31 लोको पॉयलट, 22 स्टेेशन मास्टर, 25 ट्रेन क्लर्क एवं अन्य प्रमुख पदों पर भी महिलाएं तैनात हैं।
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कोरोनावायरस: इटली के लोगों के संपर्क में आए दिल्ली, आगरा और जयपुर के कई लोग

भारत आए इटली के 21 लोग में से 16 को कोरोनावायरस होने की पुष्टि हो गई है। इनके साथ बतौर ड्राइवर बन कर रहे एक भारतीय की जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। अब स्वास्थ्य मंत्रालय को यह चिंता सता रही है कि ये लोग आईटीबीपी के छावला स्थित क्वारंटाइन केंद्र में आने से पहले कहां और कितने लोगों के संपर्क में रहे।

वहीं कोरोना वायरस से संक्रमित इतालवी पर्यटकों ने राजस्थान में 215 लोगों से मुलाकात की थी। यह संपर्क उनके यहां कई जगहों पर घूमने के दौरान बना था। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने विधानसभा में बताया कि इनमें से 93 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें 51 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। बाकी की रिपोर्ट आनी बाकी है।

उन्होंने कहा कि राज्य के पास ऐसी कोई सूचना नहीं थी कि उनकी स्क्रीनिंग हुई है या नहीं। पर्यटकों के घूमने की योजना को लेकर भी जानकारी नहीं थी। ये लोग दिल्ली, आगरा से जयपुर पहुंचे थे।

मंत्री ने बताया कि इतावली पर्यटक जयपुर में सबसे अधिक 76 लोगों के संपर्क में आए। इसके अलावा झुंझनू में 53, बीकानेर में 44, जोधपुर व जैसलमेर में 14-14 तथा उदयपुर में छह लोगों से मिले थे। पर्यटक 21 से 29 फरवरी तक राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए थे। राज्य सरकार ने इन सभी जिलों के कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को उन जगहों पर स्वास्थ्य रक्षा उपायों को अपनाने को कहा है जहां पर्यटक घूमे थे।

वहीं, जिन बसों में ये चले थे उनके ड्राइवर और क्लीनर को 14 दिनों के लिए घर में अलग-थलग रहने को कहा गया है। सरकार ने इन छह शहरों के उन होटलों ्ले कमरे सील कर दिए हैं जहां ये पर्यटक रुके थे। साथ ही इन होटलों में किसी अन्य व्यक्ति को कमरे न देने का निर्देश दिया गया है। इन पर्यटकों के संपर्क में आए होटल स्टाफ व अन्य लोगों को 28 दिन तक निगरानी में रखने का निर्देश दिया गया है।




 

राजस्थान सरकार आई एक्टिव मोड में  

राज्य की गहलोत सरकार ने झुंझनू, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर और जयपुर जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को उन जगहों पर स्वास्थ्य रक्षा उपायों को अपनाने को कहा है  जहां ये पर्यटक घूमने गए थे।

बस के ड्राइवर और क्लीनर को 14 दिनो के लिए घर में अलग थलग रहने के लिए कहा गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि उन कमरों में पर्यटकों के बाद कौन ठहरा था उनकी पूरी जानकारी ली जाए और उन लोगों के सेहत के बारे में जानकारी एकत्र हो।
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भीलवाड़ा से लाई गई लेटे हनुमान की प्रतिमा की उतारी गई आरती

राजस्थान के भीलवाड़ा से लाई गई 64 टन की लेटे हनुमान की प्रतिमा का शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार से सविधि पूजन किया गया। लेटे हनुमान के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज ने जलाभिषेक किया। लेटे हनुमान की पूजा के बाद आरती उतारी। इस दौरान गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे।

लेटे हनुमान की विशालकाय प्रतिमा राजस्थान के भीलवाड़ा से 20 दिन बाद 2100 किमी दूसरी तय कर बृहस्पतिवार को यहां पहुंची। प्रतिमा लेकर यहां पहुंचने पर संतों-भक्तों ने भव्य स्वागत किया। लेटे हनुमान की विशालकाय मूर्ति के दर्शन के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। को देखने के लिए रास्तों में छोटे-छोटे समूह द्वारा पूजा अर्चना की गई श्रद्धालुओं की भीड़ विशालकाय मूर्ति को देखने के लिए प्रतीक्षा में खड़े रहे।

संगम क्षेत्र में बड़े हनुमान मंदिर परिसर केसामने भीलवाड़ा से लाई गई लेटे हनुमान की इस प्रतिमा की पूजा महंत नरेंद्र गिरि ने की। अब भीलवाड़ा पहुंचने के बाद वहां लेटे हनुमान केभव्य मंदिर की स्थापना होगी और उस मंदिर के गर्भगृह में इस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस मौके पर भीलवाड़ा के महंत बाबू गिरी महाराज ने बताया कि इस प्रतिमा को भीलवाड़ा में बनने वाले मंदिर में प्रतिष्ठापित किया जाएगा। इस मौके पर सैकड़ों संत व भक्त उपस्थित थे। 
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आगरा से जयपुर-अजमेर सफर करते हैं तो पढ़ लें नया रास्ता, ट्रंप दौरे के चलते यहां से मिलेंगी बसें

ईदगाह बस अड्डे से रोडवेज बसों का संचालन दोपहर 12 बजे से ही आईएसबीटी से शुरू कर दिया गया। हालांकि इसके बाद भी इक्का दुक्का बसें ईदगाह बस स्टैंड पहुंचती रहीं। दोपहर दो बजे बस स्टैंड को पूरी तरह खाली करा दिया गया। जयपुर, धौलपुर और दिल्ली जाने वाले यात्री बसों के लिए भटकते रहे। 

अमेरिका के राष्ट्रपति के आगमन के कारण ईदगाह बस अड्डे से बसों का संचालन 24 फरवरी को भी बंद रहेगा। यहां से जाने वाली बसें आईएसबीटी से चलेंगी। बिजलीघर से दिल्ली जाने वाली लगभग 10 बसें भी आईएसबीटी से होकर जाएंगी।

परिवहन निगम के अधिकारियों ने दोपहर 12 बजे से ही चालक, परिचालकों को बसों को ईदगाह नहीं लाने को कहा था, लेकिन दूसरे राज्यों के चालक, परिचालक बसों को लेकर ईदगाह बस स्टैंड आए, उन्हें भी दोपहर दो बजे बाहर निकाल दिया गया। बसों को पकड़ने के लिए कुछ यात्री भी ईदगाह बस स्टैंड पहुंचे मगर उन्हें बसें नहीं मिलीं। यहां तैनात कर्मचारी ने उन्हें आईएसबीटी से बस पकड़ने को कहा। 
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