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कार्य बाधा एवं परेशानियों को दूर करने हेतु कामाख्या शक्तिपीठ में कराएं बगलामुखी विशिष्ट पूजा
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त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरल...

6 सितंबर 2020

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Digital Edition

अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा, श्रीनगर में लगे 22 अक्तूबर को ब्लैक डे बताने वाले होर्डिंग 

जम्मू-कश्मीर में बदलाव की बयार का असर नजर आ रहा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में पिछले 70 सालों के दौरान पहली बार सड़कों के किनारे 22 अक्तूबर को काला दिवस (ब्लैक डे) लिखे होर्डिंग नजर आए। यह अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा है।  इसे 73 वर्ष पहले 22 अकतूबर 1947 को हुए हुए कबाइलियों के हमले की घटना के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। 

 बताया जाता है कि यह होर्डिग मंगलवार रात लगाए गए थे और बुधवार की सुबह जिस किसी ने भी देखा वो हैरान रह गया। इन पोस्टरों को देख कर शुरू हुई गहमा गहमी के चलते कई जगहों से इन पोस्टरों को आनन फानन में हटा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इन होर्डिगों को श्रीनगर नगर निगम से अनुमति के बाद बटवारा, डलगेट, बटमालू, जहांगीर चौक आदि इलाकों में लगाया गया था।

इन होर्डिंग्स पर लिखा था कि 22 अक्तूबर को पाकिस्तान ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत पर हमला किया था। यह पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर के महाराजा के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन था। इन होर्डिंगों पर यह भी लिखा था कि क्या आप लोग जानते हैं कि 22 अक्तूबर 1947 क्या है ? यह दिन जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ब्लैक डे है। होर्डिगों में इसे लगाने वाली संस्था के रूप में सेंटर फॉर इंक्लूसिव एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट्स का नाम अंकित था। गौरतलब है कि इस होर्डिंग में कश्मीर के अवाम को कबाइली हमले (22 अक्तूबर) के दिन को ब्लैक-डे के तौर पर स्वीकार करने को कहा गया था। 

अलगाववादी 27 को मनाते हैं ब्लैक डे
 पुलिस सूत्रों के अनुसार, होर्डिंग किसने लगवाए इसकी कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अलगवादी 27 अक्तूबर को काला दिवस के रूप में मनाते हैं। जिस दिन भारतीय सेना कश्मीर में उतरी थी।
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काला दिवस लिखे होर्डिंग.. काला दिवस लिखे होर्डिंग..

जम्मू-कश्मीरः जिला विकास परिषद में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित

जिला विकास परिषद की सीधे निर्वाचित होने वाली 14 सीटों में एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। पंचायतों के बाद जिला परिषद में महिलाओं की नुमाइंदगी सुनिश्चित होने से महिला सशक्तीकरण को एक और पायदान मिलेगा। जम्मू-कश्मीर पंचायती राज एक्ट में संशोधन को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही प्रदेश में भारतीय संविधान का 73वां संशोधन अधिनियम भी पूरी तरह से लागू हो गया है। 

पंचायत, ब्लॉक के बाद जिला परिषद का त्रिस्तरीय ढांचा ग्रामीण विकास में जवाबदेही के साथ रफ्तार लाएगा। महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण के अलावा जिला परिषद में अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग को कुल आबादी में प्रतिशत के हिसाब से आरक्षण मिलेगा। जिला विकास परिषद नामांकन के लिए किसी भी पंचायत में मतदाता के तौर पर नाम दर्ज होना आवश्यक होगा।

पंचायतों की निगरानी के अधिकार, पांच स्टैंडिंग कमेटियां होंगी गठित
जिला विकास परिषदों के पास पंचायत स्तर तक निगरानी के अधिकार होंगे। विकास योजनाएं तैयार करने से लेकर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया में जिला परिषद की अहम भूमिका होगी। परिषद गठन होने पर पांच स्टैंडिंग कमेटियां बनाई जाएंगी। इसमें वित्त, विकास, लोक निर्माण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा और कल्याण कार्यों की कमेटी शामिल होगी।
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आतंक के खिलाफ इस साल जम्मू-कश्मीर में 40 जवानों ने दी शहादत : डीजीपी

आतंकवाद के खिलाफ व अन्य हिंसक घटनाओं में जम्मू-कश्मीर में पिछले एक वर्ष में 40 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। इनमें से 13 जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान हैं। यह बात पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने जेवन में पुलिस स्मरण दिवस के अवसर पर कही। उन्होंने शहीदों की शहादत को सलाम करते हुए कहा कि आज का दिन हमारे लिए गर्व का दिन है। 

डीजीपी ने कहा कि शहीदों में अनंतनाग के पुलिस इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ भी शामिल हैं। जो आतंकियों से मुकाबले में शहीद हुए। उन्होंने कहा कि शहीद इंस्पेक्टर की बच्ची रोते हुए उनसे बोली कि वो उनके पिता की तरह बहादुर बनना चाहती और उनकी ही तरह आतंक के खिलाफ लड़ना चाहती हैं। उन्होने कहा इस जज्बे को सलाम किया। 
 
उन्होंने कहा कि 21 अक्तूबर 1959 में लद्दाख में चीन के हमलावरों के साथ लोहा लेते हुए सीआरपीएफ के 10 जवानों ने अपनी जान न्यौछावर की थी। तब से इस दिन को शहीदों के लिए सम्मान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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पुलवामा मुठभेड़: आतंकी से बोली मां, यहां आ जा नाजिम, मेरी खातिर गन छोड़ दे, वीडियो वायरल

anantnag encounter

जम्मू-कश्मीरः नार्को टेरर मामले में हिजबुल आतंकी नायकू समेत 10 के खिलाफ चार्जशीट

नार्को आतंक  के मामले में मंगलवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मुठभेड़ में मारे जा चुके हिजबुल कमांडर रियाज नाइकू समेत दस लोगों के खिलाफ मोहाली कोर्ट में 12 हजार पृष्ठों का अभियोग पत्र दाखिल किया है। आरोप पत्र में इन सभी पर देश के विभिन्न हिस्सों में मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को संचालित करने के आरोप हैं।

 आरोपियों में पुलवामा का रहने वाला हिलाल अहमद, गुरदासपुर और अमृतसर के रहने वाले बिक्रम सिंह, मनंदिर सिंह, रंजीत सिंह, गगनदीप सिंह, इकबाल सिंह, रंजीत सिंह, जसवंत सिंह और वर्तमान में पाकिस्तान में रह रहा अनंतनाग निवासी जफर हुसैन भी शामिल है। 25 अप्रैल को पंजाब पुलिस ने 29 लाख रुपये की नकदी के साथ शेरगोजरी को पकड़ा था। 

8 मई को एनआईए ने जांच को अपने हाथ में लिया। शेरगोजरी अमृतसर में नकदी लेने आया था। वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम करता है और रियाज नाइकू का करीबी रहा है। इनके पकड़े जाने के बाद पाकिस्तान के नार्को आतंकवाद के बड़े नटवर्क का पता चला। इसमें हवाला का पैसा भी शामिल है। 

जुलाई 2019 को अटारी बार्डर पर 532 किलो हेरोइन बरामद हुई थी। इसके बाद एनआईए ने पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की 15 लोकेशन पर छापे मारे। कार्रवाई के दौरान आठ वाहन और 98.5 लाख रुपये भी बरामद किए गए। आरोपियों के आतंकियों के साथ सोशल साइट पर हुई चैट को भी सार्वजनिक किया गया था।
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ट्विटर की बड़ी गलती: जम्मू-कश्मीर को दिखा दिया चीन का हिस्सा, सोशल मीडिया पर भड़के भारतीय

भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर के मामले में ट्विटर ने बड़ी भूल कर डाली। दरअसल, ट्विटर एक लाइव प्रसारण के दौरान जम्मू-कश्मीर को चीन का हिस्सा दर्शा रहा था। यह गलती सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर ट्विटर के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद ट्विटर ने कहा है कि उसकी टीम इस मसले की जांच के लिए तेजी से काम कर रही है और जियोटैग (लोकेशन) का मसला फौरन ठीक कर लिया गया।

दरअसल, यह मामला उस वक्त गरमाया, जब एक राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ नितिन गोखले ने इस बारे में यह तथ्य सोशल मीडिया पर लोगों के सामने रखा। रविवार को लेह में मौजूद गोखले ने वहां के चर्चित वॉर मेमोरियल हॉल ऑफ फेम से दोपहर करीब 12 बजे ट्विटर लाइव किया तो वह चौंक गए। गोखले ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा, मैंने अभी हॉल ऑफ फेम से लाइव किया है। हॉल ऑफ फेम को लोकेशन बनाया तो ट्विटर बता रहा है कि जम्मू-कश्मीर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा है। क्या तुम लोग पगला गए हो? उन्होंने इसकी तस्वीर भी सोशल मीडिया पर साझा की।   

इसके बाद तो भारतीयों ने ट्विटर की जमकर खिंचाई की और उससे माफी मांगने और फौरन ठीक करने की बातें करने लगे। हजारों यूजर ने ट्विटर इंडिया को इस मामले को लेकर टैग किया, जिसके बाद कंपनी ने कार्रवाई की। हाल ही में चीनी मोबाइल कंपनी शियोमी ने भी इसी तरह की गलती की थी। शियोगी के वेदर एप में अरुणाचल प्रदेश दिख ही नहीं रहा था। कई यूजरों ने कहा कि शियोगी के स्मार्टफोन में अरुणाचल प्रदेश के इलाकों की जानकारी नहीं आ रही है। स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अरुणाचल की राजधानी ईटानगर खोजने पर कोई नतीजा नहीं आता है।

ट्विटर ने कहा, हम समझते हैं मसले की संवेदनशीलता
ट्विटर इंडिया की नीति संचार की पल्लवी वालिया ने एक बयान जारी कर कहा, हमें इस तकनीकी खामी की जानकारी रविवार को मिली। हम इसकी संवेदनशीलता को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं। जियोटैग (लोकेशन) की खामी को हमारी टीम ने तुरंत दूर कर दिया है। इसकी जांच भी की जा रही है।
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अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली के लिए आखिरी दम तक लड़ूंगा : फारूक अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि 370 और 35ए की बहाली के लिए मरते दम तक लड़ाई लड़ूंगा। भविष्य में भी किसी भी पूछताछ में पूरा सहयोग दूंगा। डॉ. फारूक ने कहा कि केवल एक बात का दुख है कि मैं पूछताछ के दौरान खाना नहीं खा सका।   

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा करीब सात घंटे तक पूछताछ के बाद कार्यालय के बाहर आए डॉ. फारूक अब्दुल्ला के तीखे तेवर पत्रकारों के सवालों के जवाब में साफ झलके। पत्रकारों से बातचीत में डॉ. फारूक ने कहा कि वह आगे भी किसी भी तरह की पूछताछ का सामना करने के लिए तैयार हैं। मैं बिल्कुल भी इसको लेकर चिंतित नहीं हूं और न ही कोई घबराहट है। एक बात का अफसोस है कि मैं पूछताछ के दौरान भूखा रहा, खाना नहीं खा सका। 

उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास एक लंबी सियासी लड़ाई है, जिसे आगे भी लड़ना है। चाहे फारूक अब्दुल्ला जिंदा रहें या न रहें। अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली के लिए आखिरी दम तक लड़ते रहेंगे। हमारा संकल्प न बदला था और ना बदलेगा, चाहे मुझे फांसी ही क्यों न चढ़ा दिया जाए। यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की समस्या है, यह केवल डॉ. फारूक अब्दुल्ला की लड़ाई नहीं है। 

फैसला करना अदालत का काम
ईडी ने क्या पूछताछ की, इस सवाल के जवाब में डॉ. फारूक ने कहा कि वह इस पर कुछ नहीं कहेंगे और मैं किसी चीज पर अपना फैसला नहीं सुना सकता। अदालत खुद फैसला करेगी कि इस मामले में आगे क्या करना है।
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जम्मू-कश्मीर: प्रभात फेरी में मां के जयकारों से भक्तिमय हुई धर्मनगरी, यूपीऔर महाराष्ट्र के भक्तों ने लिया हिस्सा

नवरात्र महोत्सव में धर्मनगरी मां वैष्णो के जयकारों से गूंज रही है। सुबह से शाम तक जहां भक्त जयकारे लगाते हुए मां की पवित्र पिंडियों के दर्शन कर निहाल हो रहे हैं वहीं धर्मनगरी में निकाली जा रही प्रभात फेरी से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। 

मंगलवार को नवरात्र पर लगातार तीसरे दिन प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर मां का गुणगान किया।

प्रभात फेरी बस स्टैंड कटरा से शुरू हुई और बाण गंगा मार्ग से होकर दर्शन ड्योढ़ी से गुजरी जहां जगह-जगह स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों ने स्वागत किया। वहीं, स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालु भी झूमते नजर आए। 

सीआरपीएफ के जवाननों ने दर्शनी ड्योढ़ी में प्रभात फेरी में हिस्सा लेने वाले श्रद्धालुओं को जल-पान करवाया। प्रभात फेरी में मां के जयकारों से धर्मनगरी का माहौल भक्तिमय बना रहा। 
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