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एलओसी पर पाकिस्तान ने दागे गोले, जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने मार दिए दो पाक सैनिक

नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर कुछ दिन की खामोशी के बाद वीरवार को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना ने जिले के शाहपुर, कीरनी और कसबा में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए गोले दागे। शाहपुर सेक्टर में जवाबी कार्रवाई के बाद आतंकियों को भागकर पाकिस्तानी चौकियों में छिपना पड़ा। इस बीच सेना की जोरदार जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की 10 बलूच के दो सैनिक मारे गए, जबकि कई घायल हो गए। सीमा पार रख चिकड़ी इलाके में पाकिस्तान के कई बंकर तबाह हो गए। 

सुबह करीब 9.30 बजे शाहपुर सेक्टर के काईयां क्षेत्र में आतंकियों के एक दल को घुसपैठ कराने के इरादे से सैन्य चौकियों के साथ ही रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी शुरू कर दी। सेना के जवानों ने बड़े और छोटे हथियारों से गोलाबारी का जवाब दिया। इस पर आतंकियों को भाग कर पाकिस्तानी चौकियों में छुप कर जान बचानी पड़ी। कुछ देर बाद पाकिस्तानी सेना ने कीरनी और कसबा में भी गोलाबारी शुरू कर दी। सीमा पार के रख चिकड़ी इलाके में जहां से फायरिंग हो रही थी उसे निशाना बनाकर जवानों ने भी जोरदार कार्रवाई की। तबाह बंकरों से धुएं का गुब्बार उठता देखा गया। 

ऐसा पहली बार नहीं जब लोगों की जान बचाने के लिए जवानों ने लगाई जान की बाजी, गवाह हैं तस्वीरें

गोलाबारी से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। जो लोग खेतों में काम कर रहे थे उन्हें सुरक्षित स्थानों की तरफ भागना पड़ा। दोनों तरफ से देर शाम तक रुक-रुक कर गोलाबारी जारी रही। लोगों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से गांव और घरों को निशाना बनाकर गोलाबारी की जा रही है, जिससे वह परेशान हैं। 
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भारतीय सेना भारतीय सेना

एनआईए के हाथ लगी बड़ी सफलता, पुलवामा हमले का एक और आरोपी गिरफ्तार

पुलवामा हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने घटना के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मोहम्मद उमर फारूक के एक और मददगार मोहम्मद इकबाल राथर को गिरफ्तार किया है। उसे एनआईए की विशेष अदालत में गुरुवार को पेश किया गया, जहां उसे पूछताछ के लिए सात दिन की रिमांड पर एनआईए को सौंप दिया गया। 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ पर हुए हमले में 44 जवान शहीद हुए थे। इस मामले में यह छठी गिरफ्तारी है। 

बताया जाता है कि पुलवामा हमले के जैश आतंकी मोहम्मद उमर फारूक अप्रैल 2018 को जम्मू संभाग में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान से घुसा था। इसके बाद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से दक्षिण कश्मीर पहुंचा था। आईबी से कश्मीर तक पहुंचने में मोहम्मद इकबाल राथर ने उसकी मदद की थी। दक्षिण कश्मीर पहुंचने के बाद उमर ने स्थानीय सूत्रों की मदद से उस आईईडी को तैयार किया था, जिससे इस हमले को अंजाम दिया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इकबाल मैसजिंग एप के जरिए पाकिस्तान में बैठे जैश के आकाओं के लगातार संपर्क में था।

इकबाल राथर जैश से जुड़े एक अन्य मामले में वर्ष 2018 से ही एनआईए की न्यायिक हिरासत में है। जैश के परिवहन मॉड्यूल का सदस्य 25 साल का इकबाल बडगाम के चरार-ए-शरीफ का रहने वाला है। 

29 फरवरी को पनाह देने वाला पकड़ा गया था
 इससे पहले इसी वर्ष 29 फरवरी को एनआईए ने पुलवामा के हाजीबल काकापोरा से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाकिर बशीर मागरे को गिरफ्तार किया था। शाकिर ने आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को एक साल तक अपने घर में पनाह दी और हमले में इस्तेमाल कार में आरडीएक्स लगाया था। शाकिर जैश का ओवरग्राउंड वर्कर था, जो पुलवामा के लेथपोरा में फर्नीचर की दुकान चलाता था। 2018 में जैश के पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर फारूक ने शाकिर की मुलाकात डार से कराई। इसके बाद शाकिर जैश के लिए फुलटाइम काम करने लगा था।
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भारतीय सेना

जम्मू-कश्मीरः सोपोर आतंकी हमले में शहीद जवान को सुरक्षाबलों ने दी श्रद्धांजलि

सोपोर आतंकी हमले में शहीद होने वाले सीआरपीएफ जवान को पुलिस महानिरीक्षक कश्मीर ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों के अधिकारियों ने भी शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की।

इस दौरान जुल्फिकार हसन, एडीजी सीआरपीएफ ने कहा कि जुल्फिकार हसन, एडीजी सीआरपीएफ ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। कुछ लोगों ने एक अफवाह फैलाने की कोशिश की है कि सीआरपीएफ ने उन्हें (एक नागरिक को) वाहन से बाहर निकाला और गोली मार दी। यह पूरी तरह से असत्य है। 

एडीजी सीआरपीएफ ने कहा कि आतंकियों द्वारा मस्जिदों का उपयोग करना बेहद निंदनीय है। मस्जिद समितियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि आतंकियों द्वारा इनका इस्तेमाल न होने पाए।

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जम्मू-कश्मीरः सरकारी और वन भूमि पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं, एक्शन मोड में प्रशासन

जम्मू-कश्मीर में सरकारी और वन भूमि से अवैध कब्जे छुड़ाने के लिए उप राज्यपाल प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। राजस्व विभाग को सारा रिकॉर्ड डिजिटाइज करने के लिए 31 जुलाई तक की आखिरी मियाद दी गई है। उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने चिंता जताते हुए अधिकारियों से कहा है कि प्रदेश में 21 लाख एकड़ सरकारी व वन भूमि पर कब्जे हैं। अभी तक नौ लाख कनाल से अवैध कब्जे केवल कागजों में ही हटाए गए हैं। हर हाल में 31 जुलाई तक रिकॉर्ड डिजिटाइज कर अवैध कब्जे हटाने की व्यवस्था करें।

प्रदेश में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम की समीक्षा के दौरान उप राज्यपाल ने काम की धीमी रफ्तार पर कड़ा संज्ञान लिया। सूत्रों ने बताया कि जम्मू संभाग में नौ लाख कनाल सरकारी और वन भूमि को कागजों में ही खाली कराया गया है। जमीन पर अभी भी कब्जे जस के तस हैं। जम्मू-कश्मीर में 21 लाख एकड़ सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं, जिसे भूमाफिया और राजस्व अधिकारियों की सांठगांठ से अंजाम दिया गया है।

एलजी प्रशासन ने इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए जिला स्तर पर कई अधिकारियों को सेटलमेंट कमिश्नर के अधिकार दिए हैं। डोडा, बारामुला, उधमपुर और राजोरी समेत अन्य जिलों में 26 जून को सर्वे एंड लैंड रिकॉर्ड्स विभाग के निदेशक भी तैनात किए गए हैं। इसी बीच अब 31 जुलाई तक हर हाल में रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह काम पूरा होते ही अवैध एंट्री खारिज करने के साथ ही अवैध कब्जे छुड़ाने का काम तेज किया जाएगा।  

2015 में शुरू हुआ था डिजिटाइजेशन  
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने का काम रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट एजेंसी ने 2015 में शुरू किया था। प्रदेश में कुल 666.49 लाख राजस्व रिकॉर्ड हैं, जिनमें से दिसंबर 2017 तक जम्मू में 105.84 लाख और कश्मीर में 58.77 लाख रिकॉर्ड ही स्कैन हो पाए थे। राजस्व विभाग को इससे पूर्व फरवरी 2018, मार्च 2019 और जून 2019 तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था।
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