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मौनी अमावस्या पर गया में कराएं तर्पण, हर तरह के ऋण से मिलेगी मुक्ति : 24 जनवरी 2020
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जम्मू और कश्मीर

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

कश्मीर में शीतलहर जारी, बर्फीली हवाओं ने बढ़ाई परेशानी, श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग अभी भी बंद

पुलिस की वर्दी पहनने के लिए दौड़ीं जम्मू-कश्मीर की लड़कियां, 1350 पदों के लिए 30 हजार आवेदन

जम्मू-कश्मीर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था अनुच्छेद 370: राज्य मंत्री किरेन रिजिजू

केंद्रीय युवा मामले, खेल व अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था और दीवार की तरह खड़ा था। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का भविष्य उज्ज्वल है। जम्मू कश्मीर के युवा अब आकाश छूने का सपना देख सकते हैं। 

जन पहुंच कार्यक्रम के चौथे दिन चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए भगवती नगर में इनडोर स्टेडियम का उद्घाटन करने पहुंचे रिजिजू ने कहा कि हम यहां के युवाओं के सपनों की उड़ान को पंख प्रदान करने के लिए आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस क्षेत्र को उन्नति और विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

अनुच्छेद 370 के प्रावधान निरस्त किए जाने के बाद विकास कार्यों की गति में तीन से चार गुना तक वृद्धि हुई है। यदि इसी तरह विकास होता रहा तो मुझे विश्वास है कि निकट भविष्य में जम्मू कश्मीर देश का सबसे विकसित क्षेत्र होगा। यहां की युवा पीढ़ी भाग्यशाली है और अब वह आकाश छूने के सपने देख सकती है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश के विकास का प्रधानमंत्री का मॉडल न केवल देश केे लिए बल्कि विदेश के लिए भी एक उदाहरण होगा।

रिजिजू ने कहा कि वह केंद्र शासित प्रदेश में दो दिवसीय दौरे पर यह देखने आए हैं कि उनका मंत्रालय विकास कार्यों में क्या योगदान दे सकता है। उन्होंने क्षेत्र में और अधिक इनडोर स्टेडियम के निर्माण का आश्वासन दिया। कहा कि हम स्थानीय खिलाड़ियों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे और उन्हें चैंपियन बनाने में सहायता करेंगे।

उनके गृह राज्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर राज्य को सर्वाधिक फंड दिया गया। जम्मू-कश्मीर को इतना फं ड मिला जितना देश के किसी अन्य राज्य को कभी नहीं दिया गया। राज्य में जून 2018 में राज्यपाल शासन लगने के बाद विकास की गतिविधियों को गति मिली। 
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महबूबा की बेटी ने एसएसजी पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, कहा- मेरी आजादी को कुचला नहीं जा सकता

पीडीपी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने एसएसजी (स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप) पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इल्तिजा ने कहा है गृह मंत्रालय को मेरे जैसी लड़कियों पर नजर रखने की बजाय अपने संसाधनों को अन्य महत्वपूर्ण मामलों में इस्तेमाल करना चाहिए। इससे टैक्स देने वाले लोगों के पैसों का सदुपयोग होगा।

इल्तिजा का आरोप है कि एसएसजी, आईबी और सीआईडी जैसी एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। इल्तिजा ने अपने ट्वीट में कहा है कि मेरे साथ हाथापाई और मुझे गैरकानूनी तरीके से नजरबंद किए जाने के बाद गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करने वाली एसएसजी मेरा उत्पीड़न कर रही है।

सुरक्षा के नाम पर मेरी आजादी को कुचला नहीं जा सकता। हाल ही में पकड़े गए जेके पुलिस के डीएसपी का उदाहरण देते हुए इल्तिजा ने कहा कि मैं इन लोगों के बिना ही सुरक्षित हूं। 
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महबूबा मुफ्ती, इल्तिजा मुफ्ती महबूबा मुफ्ती, इल्तिजा मुफ्ती

कश्मीरी पंडित महिला की अर्थी को मुस्लिमों का कंधा, बांदीपोरा में पेश की कश्मीरियत की मिसाल

कश्मीरियत की मिसाल को जिंदा रखते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कश्मीरी पंडित महिला का अंतिम संस्कार करवाया। लोगों ने अर्थी को कंधा देते हुए संदेश दिया कि चाहे परिस्थितियां कुछ भी हो सभी सामाजिक ताने-बाने को टूटने नहीं देंगे।

बांदीपोरा जिले के अजर इलाके में रहने वाली वाली बुजुर्ग जय किशोरी भट (80) का मंगलवार को देहांत हो गया था। इसकी सूचना मिलने के बाद उनके परिवार की मदद के लिए आसपास के मुस्लिम पड़ोसी उनके घर पहुंचे।  इसके बाद उनका अंतिम संस्कार करने में परिवार की मदद की।

अजर इलाके में कई कश्मीरी पंडितों के परिवार रहते हैं जिन्होंने 90 के दशक में घाटी से पलायन नहीं किया। तब से यह इलाका भाईचारे के लिए पूरे जिले में मशहूर है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे की खुशी और गम में हिस्सेदार बनते हैं।
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जम्मू-कश्मीरः गुलपुर सेक्टर में पाकिस्तान ने किया युद्धविराम का उल्लंघन

जम्मू-कश्मीर के गुलपुर सेक्टर में पाकिस्तान ने एक बार फिर युद्धविराम का उल्लंघन किया है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक पाकिस्तान ने पुंछ के इस सेक्टर में युद्धविराम का उल्लंघन किया है। 


गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने नियंत्रण रेखा पर 18 सिग्नल टॉवर स्थापित कर दिए गहैं जिससे सीमापार की गतिविधि पर नजर रखी जा सके। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक युद्धविराम उल्लंघन की आड़ में आतंकवादी 26 जनवरी से पहले जम्मू-कश्मीर में एलओसी से सटे अन्य क्षेत्रो में आईईडी विस्फोट और बैट हमले की योजना बना रहे हैं। 

कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने पीओके के कोटली में कमांडिंग अधिकारियों के साथ एक बैठक कर आईईडी विस्फोट के बारे में चर्चा भी की थी। यही नहीं पाकिस्तानी आर्मी के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) के दस कर्मियों को आईईडी विस्फोट करने और उसके बाद बैट हमले के लिए नियुक्त किया गया है।

इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने दिसंबर 2019 में इसी तरह की बैठक कोटली में बुलाई थी, जहां बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के लिए रणनीति तैयार की गई थी। बैट टीमों को आईएसआई और आतंकी संगठनों से भी मदद मिल रही है। 

खुफिया एजेंसियों ने दिसंबर 2019 और इस साल की शुरुआत में भारतीय सुरक्षा बलों पर बैट हमलों की चेतावनी दी थी। ऐसा ही एक हमला पहले भी हो चुका है और नियंत्रण रेखा पर सेना के जवानों को अब ऐसे और हमलों के बारे में आगाह किया गया है। बैट स्क्वाड में आतंकवादी और पाकिस्तानी सेना के जवान शामिल हैं।  

बता दें, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि आतंकियों के साथ दस एसएसजी कमांडों के एक समूह को पुंछ के कृष्णाघाटी (केजी) सेक्टर में देखा गया था जोकि भारतीय सीमा चौकियों पर हमले की योजना बना रहे थे।  ... और पढ़ें

जल्द ही तड़पेगा पाकिस्तान, केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले- पानी रोकने का काम पूरा करें

प्राकृतिक गुफा
रावी और उज्ज दरिया के पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दोनों दरिया पर बिजली व सिंचाई की परियोजनाओं के काम को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

बुधवार को परियोजनाओं का स्थलीय जायजा लेने पहुंचे शेखावत ने कहा कि रावी और उज्ज दरिया सिंधु जल संधि में नहीं आते है। इसके पानी पर पूरी तरह से भारत का नियंत्रण है। एक भी बूंद पानी भी पड़ोसी देश को नहीं लेने दिया जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि परियोजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

शाहपुर कंडी परियोजना के दौरे के बाद केंद्रीय मंत्री उज्ज परियोजना की जानकारी लेने उज्ज बैराज जसरोटा पहुंचे। परियोजना के बारे में अधिकारियों ने बताया कि डीपीआर नए सिरे से तैयार की गई है। इसमें अब 196 मेगावाट बिजली तैयार होगी। जलाशय 34.5 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा। अधिकारियों ने परियोजना के नक्शे भी दिखाए। परियोजना के लिए पर्यावरण और वन्यजीव विभाग की क्लीयरेंस हासिल करनी है।

शाहपुर कंडी परियोजना का काम अक्तूबर, 2018 में शुरू हुआ था। इसमें पंजाब की ओर साठ फीसदी काम चल रहा है। जम्मू-कश्मीर के हिस्से वाले काम को अक्तूबर, 2020 में शुरू किया जाएगा। अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि परियोजना की तय समयसीमा दिसंबर, 2021 है। मंत्री ने क्लीयरेंस हासिल करने का काम जल्द करने और जम्मू-कश्मीर की ओर भी काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
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निलंबित डीएसपी मामलाः 15 दिन की रिमांड पर भेजे गए दविंदर सिंह समेत चार आरोपी

निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह मामाले में आरोपियों को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह सहित कुल चार आरोपी न्यायालय के समक्ष ले जाया गया। न्यायालय ने निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह, अन्य तीन आरोपियों को 15 दिन की रिमांड पर भेजा है। इससे पहले आतंकियों के मददगार जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह की निशानदेही पर बुधवार को एनआईए की दो टीमों ने श्रीनगर के इंदिरा नगर, नौगाम व अन्य जगहों पर छापा मारा था।
 


इसमें एक स्थानीय डॉक्टर का घर भी शामिल है। इस कार्रवाई के दौरान कुछ अहम दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद हुई हैं। उधर, इस मामले में एक अन्य व्यक्ति इरफना मुश्ताक को गिरफ्तार किया गया है। यह डीएसपी के साथ गिरफ्तार किए गए एक आतंकी का परिजन बताया जा रहा है।
 
जानकारी के अनुसार, एनआईए की टीम ने जिस डॉक्टर के घर पर दबिश दी है उसके बारे में बताया जाता है कि दविंदर ने आतंकी नवीद बाबू को कुछ दिनों के लिए वहां पनाह मुहैया कराई थी। छापेमारी के बाद एनआईए के आला अधिकारियों की एक टीम दिल्ली के लिए रवाना हो गई। जबकि पांच सदस्यीय टीम दूसरी टीम इस मामले में नए खुलासों के बाद जांच के लिए यहीं रुक गई है।

सूत्र बताते हैं कि दविंदर और अन्य आरोपियों को एनआईए की टीम द्वारा दिल्ली ले जाया जाना था लेकिन अभी उसे रिमांड पर लेना बाकी है। बता दें कि डीएसपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेसियों को उसके इंदिरा नगर स्थित घर से 10 लाख रुपये कैश, एक एके 47 राइफल और दो पिस्टल बरामद की गई थी।
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जम्मू-कश्मीरः सद्भावना के तहत गणतंत्र दिवस पर रिहा किए जाएं नजरबंद नेता: मीर

दो पूर्व मंत्रियों गुलाम हसन मीर और मोहम्मद दिलावर मीर ने गणतंत्र दिवस पर सद्भावना के तहत नजरबंद सियासी नेताओं को रिहा करने की मांग की है। जम्मू प्रेस क्लब में मीर ने कहा कश्मीर में पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित राजनीतिक नेताओं को रिहा करने और व्यापारियों और मीडिया कर्मियों के लिए इंटरनेट सेवाओं (ब्रांड बैड सेवाओं) को बहाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा देश में गणतंत्र दिवस पर कुछ कैदियों तक की सद्भावना के तहत रिहाई की परंपरा रही है।

जम्मू कश्मीर में एहतियात के तौर पर सियासी नेताओं जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं पांच अगस्त 2019 से नजरबंद हैं। ऐसे में इनकी रिहाई होनी चाहिए। जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट के अध्यक्ष गुलाम हसन मीर ने कहा प्रदेश से बाहर जेलों में भेजे गए सियासी नेताओं को प्रदेश में वापिस लाया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू से पूर्व मंत्रियों और विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने हालही में अल्ताफ बुखारी की अगुवाई में मुलाकात की थी जिसमें कश्मीर में हालात को पूरी तरह से सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया गया था। इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया था।
 
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केंद्र सरकार से बातचीत लायक माहौल तैयार करने की जुगत में कश्मीरी नेता

जम्मू-कश्मीर में सात दशक तक राजनीति में हावी रहे कश्मीरी सियासतदान मोदी सरकार से बातचीत लायक माहौल तैयार करने की जुगत में है। इसमें पीडीपी से जुड़े लोग भी शामिल हैं। पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए के हटने के बाद से कश्मीर केंद्रित राजनीतिक पार्टियों व नेताओं को करारा झटका लगा है।

अब वह इससे उबरने के लिए केंद्र से बातचीत चाहते हैं। दरअसल इसके पीछे अंदर की कहानी यह है कि कश्मीरी नेता चाहते हैं कि केंद्र सरकार से किसी तरह बातचीत का चैनल खुले ताकि कश्मीर में सियासी गतिविधियां दोबारा शुरू हो पाए।

जम्मू कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद रह चुके मुजफ्फर हुसैन बेग का कहना है कि कश्मीर सियासी बैक ग्राउंड में जा चुका है। जल्द विधानसभा चुनाव होने के भी कोई आसार नहीं है। ऐसे में नजरबंद चल रहे नेताओं की रिहाई का मामला हो या फिर कश्मीर में राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने का यह सब केंद्र सरकार से बातचीत का चैनल खुलने से ही संभव है।
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पीडीपी में सियासी कलह, ढूंढा जा रहा महबूबा मुफ्ती का विकल्प, चर्चाओं का दौर तेज

पांच अगस्त 2019 से नजरबंद चल रहीं पीडीपी की अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का विकल्प पार्टी में ढूंढा जा रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी के संरक्षक मुज्जफर हुसैन बेग को पार्टी के नेता विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इस संबंध में महबूबा के विश्वास वाले नेताओं को राजी करने का प्रयास किया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार अनुच्छेद 370 हटने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू कश्मीर में सियासी परिदृश्य एक दम से बदल चुका है। महबूबा मुफ्ती नजरबंदी से कब बाहर आएगी। इसको लेकर भी कोई साफ साफ कुछ नहीं कह सकता।

ऐसे में पार्टी की गतिविधियों को संभालने के लिए नेतृत्व की दरकार है। पीडीपी के वरिष्ठ नेता जम्मू व कश्मीर में इस संबंध में चर्चा कर रहे हैं। ताकि पार्टी में टूट और अंतर्कलह रुके और नए सिरे से पार्टी अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें। ऐसे में मुज्जफर हुसेन बेग को विकल्प के रूप में देखा जा रहा हैं।

हालांकि अभी तक यह चर्चाएं अंतिम रूप नहीं ले पाई हैं। पार्टी नेताओं का कहना हैं कि बेग के अलावा पार्टी में कोई ओर नेता इतना योग्य नहीं हैं कि वह पीडीपी को मुश्किल दौर से बाहर निकालकर आगे लेकर जा सकें।
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