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एक माह तक वृंदावन बिहारी जी मंदिर में कराएं चन्दन तुलसी इत्र सेवा , मिलेगा नौकरी व व्यापार से जुड़े समस्याओं का समाधान
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जम्मू-कश्मीरः एक ही दिन में सामने आए कोरोना संक्रमण के 162 मामले, कश्मीर संभाग में दो और की जान गई

जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण चिंताजनक स्थिति में पहुंच रहा है। बुधवार को प्रदेश में कोरोना का कहर ही टूट पड़ा और एक ही दिन में 162 मामले सामने आए। अब तक एक दिन में मिले मामलों में यह सर्वाधिक संख्या रही। यही नहीं, कश्मीर संभाग में कोरोना पीड़ित दो और लोगों की मौत हुई है। कश्मीर घाटी में की कोरोना से 23 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ प्रदेेश में मौतों का आंकड़ा 27 तक पहुंच गया है। श्रीनगर में सबसे अधिक सात लोगों की जान गई है, जबकि जम्मू संभाग के जम्मू और उधमपुर जिले में चार लोगों की मौत हुई है।  

बुधवार को मिले नए मामलों में जम्मू संभाग के 37 और कश्मीर संभाग के 124 मामले शामिल हैं। अब तक प्रदेश में पॉजिटिव मिले मामलों का आंकड़ा 1922 हो गया है। इनमें से 1041 मामले सक्रिय हैं। जम्मू संभाग में 288 और कश्मीर में 753 मामले सक्रिय हैं। राहत यह रही कि इस दौरान जम्मू और कश्मीर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 21 पॉजिटिव मरीज स्वस्थ हो गए हैं। इनमें जम्मू से पांच और कश्मीर से 16 मरीज शामिल हैं।

जम्मू जिले में पॉजिटिव पाए गए चार मामलों में बीएसएफ का जवान, बीएसएफ के अधिकारी की पत्नी और बिश्नाह निवासी एक व्यक्ति हवाई मार्ग से जम्मू पहुंचे थे। इसके अलावा ट्रेन से आई जानीपुर निवासी एक महिला भी पॉजिटिव पाई गई है। चारों पहले से ही क्वारंटीन थे। उधमपुर में 11 नए संक्रमित मिले हैं, जिनमें नौ बाहरी राज्यों से आए हैं। इनमें सेना के पांच जवान और छह श्रमिक हैं। इस दौरान पुंछ में 11, कठुआ, सांबा और रियासी में तीन-तीन, रामबन और रियासी से भी एक-एक केस मिला है।

श्रीनगर स्थित जीएमसी अस्पताल के नोडल अफसर डॉ. सलीम खान ने बताया कि श्रीनगर के फतेहकदल इलाके के एक 55 वर्षीय व्यक्ति की कोविड संक्रमण से मौत हुई है। उन्हें 18 मई को एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती किया गया था।

पॉजिटिव आने पर उसे श्रीनगर के सीडी अस्पताल रेफर किया गया था। बुधवार सुबह तड़के चार बजे दिल का दौरा पड़ने से व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं, एक व्यक्ति की जीएमसी, अनंतनाग में मौत हो गई। प्रिंसिपल डॉ. शौकत जिलनी ने बताया कि मृतक जिले के सरनाल इलाके का रहने वाला था। मंगलवार को उसकी मौत हुई थी। उसके सैंपल में बुधवार को उसके पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई।
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जम्मू-कश्मीरः लॉकडाउन ने तोड़ी जेकेएसआरटीसी की कमर, अब सरकार से मदद की आस

देशव्यापी लॉकडाउन का सबसे बुरा असर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर पड़ा है। इसमें निजी और सरकारी परिवहन सेवा का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है। पर्यटन प्रदेश होने के कारण निजी और सरकारी सार्वजनिक परिवहन पर्यटन पर अधिक निर्भर है। लॉकडाउन के कारण निजी और सरकारी परिवहन सेवा को भी खासा नुकसान हुआ है।  

लॉकडाउन ने जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कारपोरेशन होने के कारण इसका ज्यादातर फोकस अपने लिए स्वयं राजस्व उत्पन्न करना है। लॉकडाउन के दो महीने में कारपोरेशन की सभी व्यावसायिक गतिविधियां ठप हैं, लेकिन प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में फंसे प्रदेश के लोगों को निशुल्क परिवहन सेवा मुहैया करा रही है।

कारपोरेशन की व्यावसायिक गतिविधियां ठप होने का असर कर्मचारियों पर भी दिख रहा है। कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। कारपोरेशन फंड की कमी का रोना रो रहा है। ऐसे में लॉकडाउन के बाद भी कारपोरेशन को लंबे समय तक सरकार की मदद पर निर्भर रहना पड़ेगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा जारी प्रदेश के बजट में जेकेएसआरटीसी के उत्थान के लिए सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जेकेएसआरटीसी इंप्लाइज यूनियन के प्रधान मूनीर अहमद ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा। कारपोरेशन फंड का रोना रो रही है, अब सरकार से मदद की उम्मीद है, जिससे स्थिति में सुधार होगा।
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लॉकडाउन ने कश्मीरी शहद पर लगाया ताला, 4 लाख से अधिक लोगों की आजीविका पर संकट

कोरोना वायरस के चलते कश्मीर घाटी में मधुमक्खी पालन से जुड़े चार लाख लोगों की रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। न तो तैयार पड़ा शहद बिक रहा है और न ही नए शहद को बनाने के लिए फूलों वाले इलाकों में जाना मुमकिन हो पा रहा है।

मधुमक्खी पालन से जुड़े लोग मधुमक्खियों की कॉलोनियों के साथ पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों के अलावा कश्मीर के अन्य क्षेत्रों में जाते हैं जहां उन्हें फूल मिलते हैं लेकिन लॉकडाउन में यह संभव नहीं हो पा रहा है। कई दशकों से इस व्यवसाय से जुड़े श्रीनगर के बिलाल अहमद कहते हैं कि हमें माइग्रेशन में दिक्कत आ रही है। इसका असर शहद के उत्पादन पर पड़ा है। जो शहद बना पड़ा है उसे भी नहीं बेच पा रहे हैं। अगर ऐसे ही हालात रहेंगे तो 60 फीसदी उत्पादन प्रभावित होगा।   

पिछले साल 350 टन शहद का उत्पादन हुआ था
जम्मू-कश्मीर का वातावरण मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल है। घाटी में ही पिछले साल 350 टन शहद का उत्पादन किया गया था। बिलाल अहमद का कहना है कि इस कारोबार के साथ एक लाख से ज्यादा युवा जुड़े हुए हैं। मजदूरों को मिलाकर इनकी संख्या चार लाख से भी ज्यादा है। घरेलू बाजार के साथ ये शहद फ्रांस, यूएई समेत कई मुल्कों में भेजा जाता है।
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जानिए कौन थे गुलाम रसूल गलवां, जिनके नाम पर है लद्दाख की ये घाटी, साथ ही पढ़ें चीन की चाल

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

जंग-ए-बदर से पहले ही मिल गए थे आत्मघाती हमले के इनपुट

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में आत्मघाती हमले की बड़ी साजिश नाकाम करने के पीछे जम्मू-कश्मीर पुलिस की भी अहम भूमिका रही है। पुलिस इनपुट मिलने के बाद से ही सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर जंग-ए-बदर (रमजान के 17वें दिन) के पहले से ही आतंकियों पर कड़ी नजर बनाए हुए थी। इसी के चलते आतंकी जंग-ए-बदर के दिन साजिश को अंजाम नहीं दे पाए।

 जानकारी के अनुसार आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के आतंकियों को जंग-ए-बदर के दिन ही इस कार्रवाई को अंजाम देकर सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बनाना था, लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस को इस बात की सूचना पहले ही मिल चुकी थी। इसके आधार पर सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर आतंकियों की पूरी हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही थी ताकि वह किसी कार्रवाई को अंजाम न दे सकें। 

इतना ही नहीं सुरक्षाबलों ने भी आतंकियों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए कई कदम उठाने के साथ-साथ कई जगह पर कोर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (कासो) चलाए और कामयाबी भी पाई। 

जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से पुलवामा पुलिस को यह इनपुट था कि जैश और हिज्ब मिलकर आत्मघाती हमले को अंजाम देने वाले हैं। उसके लिए उन्होंने सेंट्रो कार ली है जिसमें आईईडी लगाकर हमला करेंगे। बुधवार सुबह और पुख्ता इनपुट मिलने के बाद पुलवामा पुलिस ने सेना, सीआरपीएफ और एसओजी के साथ मिलकर अलग-अलग जगह नाके लगाए। 

पुलवामा के आएगुंड में लगे नाके के करीब जब वही गाड़ी पहुंची तो जॉइंट पार्टी ने वार्निंग शॉट फायर किए। आतंकी गाड़ी घुमाकर मौके से भाग निकले लेकिन दूसरी ओर लगे एक और नाके पर भी सुरक्षाबलों की जॉइंट पार्टी ने वार्निंग शॉट हवा में चलाए। इस दौरान घेरा सख्त देख आतंकियों ने गाड़ी वहीं छोड़ दी और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले। 

 ज्वाइंट पार्टी ने जब दूर से ही सर्च लाइट की मदद से गाड़ी का नंबर देखा तो वही निकला जिसका इनपुट था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने घेरा सख्त कर पहले रोशनी का इंतजार किया। वीरवार सुबह बम निरोधक दस्ते की मदद से इस गाड़ी में रखी आईईडी को उड़ा दिया गया। धमाके में गाड़ी का मलबा हवा में करीब 50 मीटर तक उड़ा और इस दौरान पूरा इलाका धुंए के गुबार से ढक गया। 

आसपास के इलाको में भी धमाके की गूंज सुनाई दी गई। आईजीपी विजय कुमार ने सेना और सीआरपीएफ को बधाई देने के साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों और जवानों को बधाई दी।
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जम्मू-कश्मीरः चतुर्थ श्रेणी की विशेष भर्ती में दैनिक वेतनभोगियों को पांच साल की छूट, किन्नरों को पेंशन

केंद्र शासित प्रदेश में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर चतुर्थ श्रेणी विशेष भर्ती अधिनियम को मंजूरी दे दी है। इसके तहत दैनिक वेतन भोगियों को अधिकतम आयु में पांच साल की छूट दी जाएगी। अधिनियम में विधवाओं, दैनिक वेतन भोगियों और जिन परिवारों का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होगा, उन्हें प्राथमिकता (वेटेज) देने का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने बताया कि डॉक्टरों, वेटरेनरी, पंचायत अकाउंट्स असिस्टेंट और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के 10 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। शुरुआत चतुर्थ श्रेणी पदों पर भर्ती से होगी। इसके लिए 7052 पद चिह्नित हैं।

सभी पद विशेष भर्ती प्रक्रिया के तहत भरे जाएंगे, जिसके लिए सर्विस सलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) को अधिकृत किया गया है। भर्ती प्रक्रिया एक साल में पूरी करनी है। इसे छह माह तक बढ़ाया जा सकता है। 100 नंबर की लिखित परीक्षा होगी। साक्षात्कार नहीं होगा। आवेदन करते वक्त डोमिसाइल सर्टिफिकेट समेत किसी भी प्रकार के दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।

बताया कि विधवाओं, तलाकशुदा और अनाथ बच्चियों को पांच नंबर का वेटेज दिया जाएगा। जिन परिवारों का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होगा उन्हें भी पांच नंबर का वेटेज मिलेगा। पांच साल तक दैनिक भोगी के रूप में काम करने वालों को पांच नंबर के वेटेज के साथ ही अधिकतम आयु में पांच साल की छूट मिलेगी।
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अमरनाथ यात्रा के लिए केंद्र पर टिकीं निगाहें, चौथी बार बढ़ाई गई तिथि, 31 मई के बाद होगा फैसला

रोहित कंसल
अमरनाथ यात्रा को लेकर निगाहें अब केंद्र सरकार पर टिक गई हैं। लॉकडाउन को लेकर केंद्र के निर्देश के अनुसार ही यात्रा पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, यात्री पंजीकरण को 31 मई तक स्थगित कर दिया गया है। यह चौथी बार है, जब पंजीकरण तिथि आगे बढ़ाई गई है।

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के तय शेड्यूल में 23 जून को यात्रा को शुरू करना प्रस्तावित है। इस बीच गुरुवार को सोशल मीडिया पर यात्रा अवधि 15 दिन किए जाने और बालटाल रूट से ही केवल यात्रा शुरू किए जाने की खबरें तैरती रहीं।

बोर्ड के पुराने शेड्यूल में देश भर की बैंक शाखाओं में गत एक अप्रैल से अग्रिम यात्री पंजीकरण प्रक्रिया को शुरू किया जाना था लेकिन 25 मार्च को लॉकडाउन के चलते यह संभव नहीं हो पाया। इसके बाद लगातार 4 लॉकडाउन हो चुके हैं, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।
 
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पुलवामाः बारूदी कार का मालिक है आतंकी हिदायतुल्ला मलिक, जुलाई 2019 से घाटी में फैला रहा आतंक

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों पर जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन की फिदायीन हमले की साजिश नाकाम कर दी गई। सुरक्षाबलों ने राजपोरा इलाके के आयगुंड में 45 किलो आईईडी से लदी एक सेंट्रो कार को खोज निकाला और उसे उड़ा दिया। आतंकियों ने कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी। कार पर दर्ज नंबर कठुआ जिले के निवासी और श्रीनगर में तैनात बीएसएफ के एक जवान की मोटर साइकिल का है।

वहीं पुलिस के सूत्रों का कहना है कि जिस कार का इस्तेमाल आत्मघाती हमले को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था, वह दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के शरतपोरा गांव के रहने वाले हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी हिदायतुल्ला मलिक की है। आतंकी मलिक जुलाई 2019 से घाटी में आतंक फैला रहा है।

बता दें कि पुलिस को पहले से सूचना थी कि दोनों आतंकी संगठन एक साथ मिलकर बड़े फिदायीन हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। जानकारी यह भी थी कि आतंकी वर्ष 2019 में पुलवामा के लेथपोरा इलाके में सीआरपीएफ  के काफिले पर किए गए आत्मघाती हमले की तर्ज पर एक और हमले को अंजाम देने की साजिश में हैं।

 
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खुलासाः जैश और हिजबुल ने मिलकर रची थी पुलवामा को दहलाने की साजिश, आतंकियों की हुई पहचान

सीआरपीएफ के 400 जवानों को निशाना बनाने के लिए जैश ने रची थी बारूदी साजिश

पुलवामा जिले के राजपोरा इलाके में सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से आज यानी कि गुरुवार को एक बड़ी आतंकी वारदात टल गई। इलाके से एक सैंट्रो कार से करीब 40 किलो आईईडी बरामद हुई है। जिसे बम निरोधक दस्ते की मदद से निष्क्रिय किया गया है।
 

वहीं इस घटना के बाद कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जो काफी हैरान करने वाले और चिंताजनक हैं। सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद द्वारा रची गई इस साजिश में सीआरपीएफ के करीब 400 जवान निशाने पर थे।

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सूत्रों के मुताबिक करीब 20 वाहनों का सीआरपीएफ का काफिला आज सुबह श्रीनगर से चलकर जम्मू पहुंचना था। इस काफिले में करीब 400 जवान शामिल होते। संदेह जताया जा रहा है कि इसी काफिले को निशाना बनाने के लिए आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने ये साजिश रची थी। उधर, सुरक्षाबलों को निशाना बनाए जाने की बात आईजीपी विजय कुमार ने भी स्वीकार की है।
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जम्मू-कश्मीरः सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार किए हिजबुल के दो मददगार, हथियार और गोला-बारूद बरामद

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के दो मददगारों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आतंकियों के मददगारों के पास से हथियार व गोलाबारूद बरामद किया गया है। दोनों से पूछताछ चल रही है। संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

विश्वसनीय जानकारी के आधार पर हंदवाड़ा पुलिस, सेना की 30 आरआर और 92 बटालियन सीआरपीएफ ने कालगुंड इलाके में एक नाका लगाया। इसी दौरान दो संदिग्ध दिखे। जिन्होंने मौके से भागने की कोशिश की। नाका पार्टियों ने पीछा कर दोनों को गिरफ्तार किया।

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पकड़े गए आतंकियों के मददगारों की पहचान आसिफ अहमद डार और मुजम्मिल अहमद पीर के रूप में हुई है। इनके पास से दो पिस्टल, दो पिस्टल मैगजीन, बीस पिस्टल कारतूस बरामद हुए हैं। ये (आतंकियों के मददगार) ओजीडब्ल्यू 2018 से सक्रिय थे।

ये हिजबुल के कई कैडरों के लिए काम कर चुके हैं। घाटी के कई हिस्सों में छिपे आतंकियों तक भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद का भी पहुंचाया है। साथ ही क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों को रसद, समर्थन और आश्रय भी देते रहे हैं।
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कोरोना पर केंद्रीय गाइडलाइन का सख्ती से हो पालन: उपराज्यपाल मुर्मू

उपराज्यपाल सरकार ने प्रदेश में कोरोना रोकथाम को लेकर केंद्र की ओर से जारी गाइडलाइन के सख्ती से पालन पर जोर दिया है। प्रशासनिक परिषद की बैठक में उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने कई निर्देश जारी किए।

उपराज्यपाल मुर्मू ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण से उपजे हालात और निपटने की रणनीति पर निर्देश जारी किए। वहीं, प्रशासनिक परिषद ने प्रदेश में कई अफसरों के तबादलों को भी मंजूरी दी।

उपराज्यपाल ने कहा कि केंद्रीय गाइडलाइन का हर हाल में पालन किया जाए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बैठक में कई अधिकारियों के तबादलों को मंजूरी प्रदान की गई। उपराज्यपाल ने जरूरी पदार्थों की जम्मू-कश्मीर में स्थिति को भी जाना। मुख्य सचिव व सलाहकारों ने उपराज्यपाल को वर्तमान हालात की जानकारी दी।
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