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कश्मीर के सेब उत्पादक पहली बार ऑनलाइन बेच सकेंगे फसल, एमआईएस की शुरुआत

कश्मीर घाटी में कोरोना महामारी और मौसम की मार झेलने वाले सेब उत्पादक पहली बार अपनी उपज की ऑनलाइन बिक्री कर बाजार के हिसाब से कीमत वसूल कर पाएंगे। हार्टीकल्चर (बागवानी) विभाग ने बुधवार से मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) की शुरुआत कर दी है। पहली बार कश्मीर का किसान अपने सेबों की बिक्र ऑनलाइन कर पाएगा। विभाग का दावा है कि पिछले वर्ष हुई गलतियों से सबक लेते हुए व्यवस्था को और बेहतर किया गया है। इस बिक्री के लिए दरें भी तय कर दी गई हैं।

हार्टीकल्चर विभाग के निदेशक एजाज अहमद भट के अनुसार, इस बार भी एमआईएस स्कीम को लागू किया गया। हमारे बेहतर किस्म का सेब उपलब्ध है जिसको अच्छी मार्केट की जरूरत है और किसान इस स्कीम का लाभ उठाकर अपने माल की बिक्री कर सकते हैं। भट ने बताया कि हम पिछले वर्ष की गलतियों से सबक लेते हुए इस बार खामियों को दूर करेंगे।

इस बार एमआईएस स्कीम की खास बात पहली बार उत्पादकों द्वारा सेब की ऑनलाइन बिक्री की जा सकेगी। इसके लिए उन्हें विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपनी जानकारी देकर रजिस्टर करना होगा जिसके बाद उसे एक एसएमएस के जरिये जानकारी भेजी जाएगी ताकि वो अपनी नजदीक की मंडी में जाकर अपना माल बेच सकेगा। 

इस स्कीम में किसानों को परिवहन संबंधी कोई परेशानी नहीं होगी क्योकि शेष सारा काम नैफेड द्वारा किया जाएगा। पिछले वर्ष किलो के हिसाब से खरीद की गई थी लेकिन इस बार पेटियों के हिसाब से माल खरीदा जाएगा। जिस किसान का माल खरीदा जाएगा उसका भुगतान जल्द से जल्द किया जाएगा। 

घाटी के सेब उत्पादकों की मांग थी कि एमआईएस खरीद ग्रेडिंग में रियायत दी जाए ताकि किसानों को अच्छा दाम मिल सके। इस सबको ध्यान में रखते हुए विभाग के निदेशक एजाज अहमद भट ने सरकार से किसानों के एमआईएस को लागू करने के लिए सिफारिश की थी। 

सात लाख परिवार जुड़े
जेएंडके स्टेट्स इकोनॉमिक सर्वे 2017 के अनुसार, प्रदेश की 3.4 लाख हेक्टेयर भूमि पर फलों की खेती होती है। इसमें 48 फीसदी जमीन का उपयोग सेब उगाने के लिए किया जाता है। सेब के कारोबार से कश्मीर के लगभग सात लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी हुी है।
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एम्स जम्मू के लिए एमबीबीएस की 50 सीटें मंजूर, जीएमसी कठुआ में पहला बैच इसी सत्र से 

विजयपुर के रखबरोड़ियां में संभाग के प्रतिष्ठित एम्स जम्मू (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस) के  लिए 50 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी गई है। इसी सत्र से जीएमसी कठुआ में वैकल्पिक व्यवस्था में एम्स के पहले एमबीबीएस बैच को शुरू किया जाएगा।

एम्स की सीटों के साथ जम्मू कश्मीर में एमबीबीएस की 1100 से अधिक सीटें हो गई हैं। हाल ही में जीएमसी डोडा को 100 सीटों की मंजूरी मिली है। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्तीय आयुक्त अटल डुल्लू ने बताया कि एम्स के लिए 50 सीटें मंजूर हो गई हैं।

एम्स के लिए मंजूर हुई सीटों में 12 ओबीसी, 1 ओबीसी (पीएच), 5 ईडब्ल्यू, 21 जनरल, 1 जनरल (पीएच), 7 एससी, 3 एसटी एमबीबीएस सीटें शामिल हैं। जीएमसी कठुआ में पहले बैच को शुरू करने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के साथ समझौता पत्र पर पहले ही हस्ताक्षर किए हैं। जीएमसी कठुआ के मुख्य भवन का निर्माण नवंबर के अंत तक मुकम्मल करने का लक्ष्य रखा गया है जिससे अस्थायी व्यवस्था में पहले बैच को शुरू किया जाएगा। 

एम्स प्रोजेक्ट को 22 फरवरी 2020 में शुरू किया गया था और तीस माह के अंतराल में इसे 21 अगस्त 2022 को मुकम्मल करने का लक्ष्य रखा गया है। एम्स जम्मू के लिए एम्स ऋषिकेश मेंटर संस्थान के तौर पर काम कर रहा है।

एम्स जम्मू के लिए एमओएचएंडएफडब्ल्यू की ओर से एचईएफए (उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी) के माध्यम से धनराशि उपलब्ध करवाई जा रही है। पहले चरण में एम्स के लिए मंजूर हुई 1661 करोड़ रुपये की राशि में 1404 करोड़ रुपये सी/ओ मेडिकल कालेज और अन्य ढांचा व 257 करोड़ रुपये की राशि चिकित्सा उपकरण व फर्नीचर के लिए रखी गई है।

अस्पताल ढांचे में यह शामिल होगा
अस्पताल ढांचे में 750 बेड की क्षमता, 1 बेसमेंट सहित जी प्लस 6 स्टोरी, छह टावरों का कंबिनेशन, 1 ओपीडी, 2 आईपीडी, 1 इमरजेंसी, 1 डायग्नोस्टिक, 1 प्रशासनिक, एमआरआई प्रावधान, सीटी, न्यूक्लियर मेडिसन, मॉड्यूलर ओटी, आईसीयू, सुपर स्पेशियलिटी विभाग, ओपीडी, ट्रॉमा बेड के अलावा प्रशासनिक भवन में मेडिकल कालेज (100 विद्यार्थी हर साल) व नर्सिंग कॉलेज (60 विद्यार्थी हर साल), 1000 बैठने की क्षमता वाला सभागार शामिल है।
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टेरर फंडिंग केस: एनआईए का घाटी में 10 ठिकानों पर छापा, महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रानिक गैजेट व अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद

देश-विदेश से धर्मार्थ गतिविधियों के नाम पर पैसा इकट्ठा कर उसका आतंकी आर्थिक मदद में इस्तेमाल करने के मामले में एनआईए ने बुधवार को घाटी में 10 स्थानों पर छापा मारा। यह छापा कुछ एनजीओ और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के ठिकाने पर मारा गया। 

एनआईए के पास शिकायत थी कि कुछ एनजीओ और ट्रस्ट पैसा इकट्ठा कर उसका इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों और आतंकियों को मदद करने में करते हैं। छापे के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रानिक गैजेट तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। 

एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को एजेंसी की विभिन्न टीमों द्वारा श्रीनगर में 9, बांदीपोरा व बंगलूरू में एक-एक स्थानों पर छापामारी की गई। एजेंसी को जानकारी मिली थी कि घाटी में कुछ एनजीओ और ट्रस्ट धर्मार्थ गतिविधियों के नाम पर देश और विदेश से पैसा जुटाते हैं। 

इसी पैसों से बाद में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जाती है। इस संबंध में एनआईए ने आठ अक्तूबर को भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया था। 

इनके ठिकानों पर हुई कार्रवाई
जिन लोगों के ठिकानों पर छापामारी की गई उनमें जेएंडके कोयलेशन ऑफ सिविल सोसाइटी के कोआर्डिनेटर खुर्रम परवेज का घर और दफ्तर शामिल है। इसके अलावा खुर्रम के अन्य साथी परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मट्टा और बंगलूरू की स्वाति शिसादरी के घर और दफ्तरों पर भी छापामारी की गई। 

अधिकारी ने बताया कि एसोशिएशन ऑफ  डिसअपीयर्ड पर्सन्स (एपीडीपी) की अध्यक्ष परवीना अहंगर के घर के साथ साथ अथरोट (एनजीओ) पर भी कार्रवाई की गई। इसके साथ ही श्रीनगर के एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक के ट्रस्ट पर भी छापामारी हुई। 

अज्ञात दानदाताओं से लेते थे राशि
एनआईए अधिकारी ने बताया कि इन छापों के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक गैजेट भी जब्त किए गए जिन्हें जांच के लिए साथ लिया गया। मामले में आगे की तफ्तीश जारी है। अज्ञात दानदाताओं से राशि दान में लेकर इनका बाद में आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

वर्ष 2000 में भी तीन एनजीओ पर हुई थी कार्रवाई
वर्ष 2000 में भी एनआईए ने तीन एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई की थी। ये एनजीओ जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की फंडिंग करने में शामिल पाए गए थे।
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जम्मू-कश्मीरः बडगाम मुठभेड़ में जैश कमांडर समेत दो आतंकी ढेर, इलाका सील

मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के आरिबाग मचहामा इलाके में मंगलवार की रात मुठभेड़ में दो आतंकी मार गिराए गए। इस दौरान क्रॉस फायरिंग में जिस मकान में आतंकी छिपे थे उसमें भीषण आग लग गई। सूत्रों ने बताया कि मारे गए आतंकियों में जैश ए मोहम्मद का कमांडर भी शामिल है। 

आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान घेरा सख्त होता देख आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई से मुठभेड़ शुरू हो गई। कुछ देर तक दोनों ओर से फायरिंग के बाद दूसरी ओर से फायरिंग आनी बंद हो गई।

कुछ घंटों के बाद रात साढ़े 11 बजे के बाद दोबारा से फायरिंग शुरू हो गई। इसके साथ ही धमाकों की भी आवाज सुनी गई। गांव के सभी प्रवेश व निकास द्वार को सील कर दिया गया है ताकि आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग न निकलें। 
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जम्मू-कश्मीर में अब कोई भी खरीद सकता है जमीन, गृह मंत्रालय ने जारी की सूचना

जिस मकान में आतंकी छिपे थे उसमें क्रॉस फायरिंग के दौरान आग लग गई...
गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद-बिक्री के संबंध में मंगलवार को महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए निर्देश के मुताबिक अब केंद्र शासित प्रदेश में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है और वहां बस सकता है। हालांकि, अभी खेती की जमीन को लेकर रोक जारी रहेगी।
 

गृह मंत्रालय ने ये फैसला जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत लिया है। इसके तहत अब कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में फैक्ट्री, घर या दुकान के लिए जमीन खरीद सकता है। इसके लिए उसे किसी भी तरह के स्थानीय निवासी होने का सबूत देने की जरूरत नहीं होगी।

उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी
वहीं अलगाववादी नेता उमर अब्दुल्ला केंद्र सरकार के इस फैसले से एक बार फिर भड़क उठे हैं। उन्होंने ट्वीट कर इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने ट्वीट किया कि जम्मू-कश्मीर में जमीन के मालिकाना हक से संबंधित कानून में जो बदलाव किए गए हैं, वो अस्वीकार्य हैं। अब तो बिना खेती वाली जमीन के लिए स्थानीयता का सबूत भी नहीं देना होगा। अब जम्मू-कश्मीर बिक्री के लिए तैयार है, जो गरीब जमीन का मालिक है अब उसकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।



बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था। इसके बाद 31 अक्तूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया था। अब इसके केंद्र शासित प्रदेश बनने के एक साल बाद जमीन के कानून में बदलाव किया गया है।

बता दें कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सिर्फ वहां के निवासी ही जमीन की खरीद-फरोख्त कर सकते थे। मोदी सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक अब बाहर के लोग भी यहां जमीन खरीद सकते हैं।


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जमीन खरीदने का कानून बदलने पर भड़के उमर अब्दुल्ला, कहा- अब जम्मू-कश्मीर बिकने के लिए तैयार

गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद-बिक्री के संबंध में मंगलवार को महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए निर्देश के मुताबिक अब केंद्र शासित प्रदेश में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है और वहां बस सकता है। हालांकि, अभी खेती की जमीन को लेकर रोक जारी रहेगी।

इस पर उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी है । उन्होंने लिखा कि जम्मू-कश्मीर में जमीन के मालिकाना हक के कानून में जो बदलाव किए गए हैं, वो अस्वीकार्य हैं। अब तो बिना खेती वाली जमीन के लिए स्थानीयता का सबूत भी नहीं देना है। इसी के साथ कृषि भूमि के ट्रांसफर ओर आसान बना दिया गया है। अब जम्मू-कश्मीर बिकने के लिए तैयार है, जो गरीब जमीन का मालिक है अब उसे और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 
 


बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था। इसके बाद 31 अक्तूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया था। अब इसके केंद्र शासित प्रदेश बनने के एक साल बाद जमीन के कानून में बदलाव किया गया है।



इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सिर्फ वहां के निवासी ही जमीन की खरीद कर सकते थे। मोदी सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक अब बाहर के लोग भी यहां जमीन खरीद सकते हैं।

गृह मंत्रालय ने ये फैसला जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत लिया है। इसके तहत अब कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में फैक्टरी, घर या दुकान के लिए जमीन खरीद सकता है। इसके लिए उसे किसी भी तरह के स्थानीय निवासी होने का सबूत देने की जरूरत नहीं होगी।
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एनआईए का ये ऑपरेशन कर देगा आतंकियों के हमदर्दों की कहानी खत्म, बेनकाब होने वालों में कश्मीर के कई सफेदपोश!

जम्मू-कश्मीर: घुसपैठ की नाकाम कोशिशों से बौखलाए आतंकी, दिवाली पर फिदायीन हमले की रच रहे साजिश

बार-बार घुसपैठ की नाकाम कोशिशों से बौखलाए आतंकी दिवाली पर फिदायीन हमला करने की साजिश रच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जम्मू, सांबा, कठुआ, पंजाब के इलाकों में आतंकी हमला करने की फिराक में हैं। 

खुफिया एजेंसियों ने आतंकियों, पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई की आपस में होने वाली बातचीत को इंटरसेप्ट किया है। इसके बाद सरहद पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। सैन्य और अन्य सुरक्षा ठिकानों की सुरक्षा भी पुख्ता की गई है। 

श्रीनगर में भी सुरक्षाबलों को अलर्ट कर दिया गया है। खुफिया एजेंसियों ने कहा है कि आतंकी हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुंछ, राजोरी, कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा में एलओसी पर पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बैट) भी सक्रिय हो गई है। 

जो सेना पर हमला करने के फिराक में है। यही नहीं, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी प्रदेश में दंगे भी भड़काना चाहती है। आतंकियों की नापाक साजिश के बाद रेलवे स्टेशन, सैन्य प्रतिष्ठानों, नेशनल हाइवे और पुलिस थानों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।

सीमा पार आतंकी घुसैपठ की फिराक में
प्रदेश में कुछ दिन में ही जिला परिषद के चुनाव भी होने जा रहे हैं। साथ ही दिवाली भी आने लगी है। इसे देखते हुए प्रदेश पुलिस ने कमर कस ली है। सोमवार को जम्मू संभाग के आईजी मुकेश सिंह ने पुंछ जिले का दौरा भी किया। यहां पर सुरक्षा के कई पहलुओं पर बातचीत हुई। 

सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि सीमा पार बड़े स्तर पर आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। वह हर एक खास अवसर पर कुछ करना चाहते हैं। बार-बार घुसपैठ की असफल कोशिशें कर रहे हैं। सेना पाकिस्तान की हर एक साजिश का जवाब देने के लिए सक्षम और तैयार है।
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