कश्मीर में सेना कर रही आतंकियों का सफाया, विकास के  मोर्चे पर सरकार

फिदा हुसैन, अनंतनाग Updated Sat, 31 Oct 2020 05:13 AM IST
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Volleyball tournament at Anantnag - फोटो : अमर उजाला

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जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर भले ही कुछ सियासतदां हो हल्ला मचा रहे हों, लेकिन कश्मीर में धरातल पर अब फिजा बदल रही है। घाटी में एक तरफ जहां सुरक्षाबल पूरी सख्ती के साथ आतंकियों का सफाया कर रहे हैं, वहीं विकास का  मोर्चा संभालकर सरकार लोगों के दिलों को जीतने की कोशिश कर रही है। आतंकवाद की नर्सरी के लिए बदनाम दक्षिण कश्मीर में एक साल के दौरान काफी बदलाव देखा जा रहा है। आतंक के गढ़ रहे अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां में सड़कें बन रही हैं। दूर दराज के कई इलाकों में दशकों बाद काम शुरू हुआ है। युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए जगह-जगह खेल मैदान बन रहे हैं। नई पौध को नशे से दूर रखने के लिए खेल प्रतियोगिताएं करवाई जा रही है।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित दक्षिण कश्मीर में कई विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं। एक साल के दौरान अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों के उन इलाकों में विकास कार्य शुरू हुए जहां आज तक किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया था। इन जिलों में दर्जनों सड़कें बनकर तैयार हो गई हैं। कई सड़कों का काम चल रहा है। आम लोगों के साथ संवाद स्थापित करने और जन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा एलजी मनोज सिन्हा भी जगह-जगह दौरे कर रहे हैं। लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं।
अनंतनाग के श्रीगुफारा के लतीफ  अहमद का कहना है कि एक साल में विकास कार्य तेज हुए हैं। कोरोना महामारी के बावजूद कई कार्य शुरू हुए हैं। धरातल पर काम दिखने लगे हैं। बैक टू विलेज-3 में जिस तरह से सरकार खुद इस कार्यक्रम का हिस्सा बनी, उसी से यह संभव हो पाया है। कुलगाम के युवा अरशद कहते हैं कि एक साल में यहां की तस्वीर कुछ बदली है। हम खेलना चाहते हैं लेकिन खेल सुविधाओं के अभाव में सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। अब सरकार खेल स्टेडियम बना  रही है। इससे युवा उत्साहित हैं। खिलाड़ियों को उनके सपने पूरे होने की उम्मीद जगी है। अनंतनाग तेलवनी निवासी मोहम्मद मकबूल ने कहा कि पहले दिल्ली से विकास के लिए पैसा आता था लेकिन वह जनता तक नहीं पहुंचता था। अब ये पैसा जनता पर खर्च हो रहा है। केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी आम लोगों तक पहुंच रहा है।
एक साल 8 आतंकियों का कराया आत्मसमर्पण
कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार बताते हैं कि इस वर्ष अब तक आठ आतंकी विभिन्न मुठभेड़ों के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें से पांच ने सिर्फ अक्तूबर माह में ही हथियार डालकर मुख्य धारा में लौटने का फैसला किया है।

अब तक 190 से ज्यादा आतंकी मारे गए
इस वर्ष अब तक जम्मू-कश्मीर की विभिन्न मुठभेड़ों में 190 से ज्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं। वर्ष 2019 में 163 और 2018 में 271 आतंकी मारे गए थे।
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