केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के सुचारू कामकाज के लिए जारी किए नए नियम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 28 Aug 2020 01:44 PM IST
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गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना - फोटो : ani

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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पुलिस, अखिल भारतीय सेवाओं (आईएएस-आईएफएस) तथा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सीधे उप-राज्यपाल (एलजी) के नियंत्रण में होगा। इसके साथ ही लोक-व्यवस्था पर भी उनका सीधा नियंत्रण होगा। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत गृह मंत्रालय ने यह नियम जारी किए हैं। इसका उद्देश्य प्रशासन का सुचारु संचालन है। 
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आदेश के अनुसार एलजी मुख्यमंत्री की सलाह पर मंत्री परिषद के सदस्यों को विभागों का बंटवारा करेंगे। किसी मंत्री के पास एक से अधिक विभाग भी हो सकते हैं। मंत्री परिषद एलजी के नाम पर किसी भी विभाग की ओर से जारी होने वाले आदेशों के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगा। कोई भी ठेका राष्ट्रपति के नाम पर जारी होगा, चाहे वह किसी मंत्री की ओर से आदेश किया जाता है या फिर मंत्री परिषद की ओर से सामूहिक रूप से। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री तथा अन्य केंद्रीय मंत्रियों समेत केंद्र की ओर से भेजे गए पत्र जल्द से जल्द एलजी के पास सूचना के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। ऐसे पत्र संबंधित सचिव की ओर से मुख्य सचिव, संबंधित मंत्री तथा मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी लाया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र या किसी भी राज्य से किसी मसले पर विवाद की स्थिति में उस पूरे मामले को एलजी के संज्ञान में लाया जाएगा। 
एलजी तथा मंत्री परिषद के बीच मतभेद होने पर केंद्र को भेजा जाएगा मामला 
आदेश में कहा गया है कि यदि किसी मामले को लेकर एलजी तथा किसी मंत्री के बीच मतभेद उत्पन्न होता है तो बातचीत से इसका समाधान 15 दिन में कर लिया जाना चाहिए। इसके बाद भी मतभेद जारी रहता है तो एलजी उसे मंत्री परिषद के समक्ष भेजेगा। इस पर मंत्री परिषद अपनी अगली बैठक में विचार करेगा, लेकिन यह अवधि 15 दिन से अधिक नहीं होगी। इस पर फैसला लेकर एलजी को जानकारी देनी होगी। यदि 15 दिन में मंत्री परिषद की ओर से संबंधित मामले पर कोई जवाब नहीं मिलता है तो यह मान लिया जाएगा कि एलजी का निर्णय मंत्री परिषद को मान्य है। यदि एलजी और मंत्री परिषद के बीच किसी मसले को लेकर मतभेद उत्पन्न होता है तो उसे राष्ट्रपति के निर्णय के लिए केंद्र के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के निर्णय के अनुसार ही फिर उस मसले पर काम होगा।
 
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प्रदेश में होंगे 39 विभाग 

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