युवाओं की प्रतिभा और कुशलता को नए पंख देगी नई शिक्षा नीति : एलजी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 22 Sep 2020 02:05 PM IST
विज्ञापन
स्कूल के छात्र
स्कूल के छात्र - फोटो : amar ujala

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
जम्मू-कश्मीर सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बल्कि कुशल प्रतिभा के लिए भी जाना जाता है। नई शिक्षा नीति प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा और कुशलता को नए पंख देगी, जिससे वह विश्व भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। जम्मू-कश्मीर के उज्जवल और समृद्ध भविष्य के लिए शिक्षा की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जम्मू यूनिवर्सिटी में सोमवार को नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर विचार और मंथन के लिए आयोजित कांफ्रेंस में एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि नई शिक्षा नीति वैश्विक प्रतिभा का निर्माण करते हुए स्थानीय सशक्तीकरण सुनिश्चित करेगी।
विज्ञापन

एलजी ने शिक्षा प्रणाली में प्रतिक्रिया संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया। नई शिक्षा नीति के प्रमुख लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थानों में पूरे शिक्षाशास्त्र को खत्म करना है। नई शिक्षा नीति वैश्विक प्रतिभा का निर्माण करते हुए स्थानीय सशक्तीकरण सुनिश्चित करेगी। एलजी ने शिक्षकों से शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र की बदलती गतिशीलता के लिए खुद को उन्मुख करने का आह्वान किया। नई शिक्षा नीति प्रौद्योगिकी क्षमता का विकास करने के साथ समान और समावेशी शिक्षा प्राप्त करने में मदद करेगी।
युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगी नई शिक्षा नीति
कौशल विकास पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कला और शिल्प की समृद्ध विरासत है, जिसमें चांदी के बर्तन, बुनाई, लकड़ी से क्राफ्टिंग और फुलकारी शामिल है। छात्रों को ऐसे कौशल में इंटर्नशिप देने के साथ स्थानीय कारीगरों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग देने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सकता है।

आत्म निर्भर बनने के लिए कौशल प्रशिक्षण जरूरी: प्रो. सिन्हा
श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के वाइसचांसलर प्रो. आरके सिन्हा ने कहा कि नई शिक्षा नीति की सफलता के लिए लोगों को अपने नजरिये तथा सोच में बदलाव लाना होगा। शिक्षा, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा का संगम विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि रोडमैप तय करने के साथ ही समयबद्ध तरीके से उसका अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। एक्शन प्लान की लगातार निगरानी के साथ ही उसकी नियमित रूप से समीक्षा भी जरूरी है। महात्मा गांधी ने बुनियादी शिक्षा की बात कही थी। आजादी के बाद यह शुरू भी हुआ, लेकिन बाद के दिनों में बंद हो गया।

हमने बच्चों को कंक्रीट की चारदीवारी में बंद कर दिया। उनका बाहरी दुनिया से कोई मतलब नहीं रह गया। आधा अधूरा ज्ञान दिया गया, यही शिक्षा की चुनौती है। कौशल जिंदगी जीने की कला है। आज छोटे-छोटे कामों के लिए दक्ष लोगों को खोजना पड़ता है। नई शिक्षा नीति में आत्मनिर्भर बनने के लिए कौशल का प्रशिक्षण आवश्यक है। बहुविषयी पढ़ाई के लिए सरकारी स्तर पर भी कोरोना संक्रमण को देखते हुए मदद करनी चाहिए। सभी विश्वविद्यालयों में इंक्यूबेशन सेंटर बनने चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X