तेजी से सिकुड़ रहे जम्मू-कश्मीर के जल स्रोत

बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला Updated Wed, 11 Dec 2019 04:57 AM IST
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जम्मू-कश्मीर जल स्रोत
जम्मू-कश्मीर जल स्रोत - फोटो : Social Media

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सार

  • 50 फीसदी से अधिक जल स्रोतों का दायरा घटा, ग्लेशियर क्षेत्र भी 25 प्रतिशत कम
  • 1230 झीलें और जल स्रोत हैं केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में

विस्तार

जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के ग्लेशियर और झीलों के साथ ही अन्य जल स्रोत तेजी से सिकुड़ रहे हैं। इसके चलते आमतौर पर पर्यावरण के अनुकूल और ठंडे माने जाने वाले इस पर्वतीय क्षेत्र में सामान्य तापमान में डेढ़ डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी आने वाले दिनों में खतरनाक हालात का संकेत दे रही है।
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सरकार की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार ग्लेशियर के दायरे में 17-25 प्रतिशत की कमी आई है। सबसे ज्यादा खतरा अनंतनाग जिले के कोलहाई ग्लेशियर को है। इसके साथ ही अन्य जल स्रोतों का दायरा भी 50 फीसदी कम हुआ है। विश्व पर्वत दिवस के मौके पर यह आंकड़े न केवल चौंकाते हैं, बल्कि आगाह भी कर रहे हैं कि जल स्रोतों के संरक्षण में देर नहीं करनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर सरकार के पर्यावरण तथा रिमोट सेंसिंग विभाग की ओर से प्रदेश में मौजूद झीलों तथा जल स्रोतों की मौजूदा स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वे कराया गया। इसमें रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी और जीआईएस का इस्तेमाल किया गया। सर्वे में कुल 1230 झील तथा जल स्रोत चिह्नित किए गए। इनमें 150 जम्मू संभाग मे, 415 कश्मीर संभाग में तथा 665 लद्दाख क्षेत्र में हैं।
1998 के सर्वे में श्रीनगर, राजोरी, पुंछ, डोडा व अनंतनाग जिलों को छोड़कर तीनों क्षेत्रों में 1248 झील तथा जल स्रोत थे। श्रीनगर, राजोरी, पुंछ, डोडा व अनंतनाग जिलों में मौजूदा समय में 287 जल स्रोत हैं। यानी पूर्ववर्ती राज्य में 1535 जल स्रोत थे।

सर्वे में अहम बात यह पता चली कि आंचर, वुलर, मीरगुंड, बरिनामबल, रखतीर्थ, परिहासपुर नामबल, होकरसर, हैगाम आदि झीलें सिकुड़ रही हैं। बारामुला जिले में वुलर झील का 41 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र विलुप्त हो गया है।

1911 में यह झील 91.29 वर्ग किमी में फैली थी। 1965 में इसका दायरा घटकर 79.82 किमी रह गया। वर्तमान में 50 वर्ग किमी क्षेत्र रह गया है। डल झील 1965 के सर्वे में 15.86 वर्ग किमी थी जो अब 11.20 वर्ग किमी ही रह गई है। श्रीनगर के बाहरी इलाके में आंचर झील 680 हेक्टेयर में थी जो अब आधी से अधिक दलदल बन गई है।
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