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गुरुवार को इन चार राशियों की चमकेगी किस्मत, ग्रह-नक्षत्र दे रहे हैं संकेत
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गुरुवार को इन चार राशियों की चमकेगी किस्मत, ग्रह-नक्षत्र दे रहे हैं संकेत

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अवाम की आवाज: उप-राज्यपाल ने सराहा नर्स का काम, जानिए मीना शर्मा ने क्या कहा

कोरोना काल में डॉक्टरों और फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स जिसमें नर्स और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ की तरह फीमेल मल्टीपर्पस हेल्थ वर्कर मीना शर्मा कोविड मरीजो...

21 मई 2021

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Digital Edition

जम्मू -कश्मीर : कोरोना का ग्राफ नीचे आते ही अमरनाथ यात्रा की सुगबुगाहट, लंगर की अनुमति

जम्मू-कश्मीर में कोरोना का ग्राफ नीचे आते ही अमरनाथ यात्रा की तैयारियां एक बार फिर शुरू हो गई हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इस बीच श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने कुछ लंगर संगठनों को बालटाल ट्रैक के लिए 28 जून से 22 अगस्त तक लंगर लगाने की अनुमति दे दी है। इसके लिए लंगर संगठनों से 19 जून तक सेवादारों के आवासीय पते, फोन नंबर, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, दो पासपोर्ट साइज फोटो, मान्यता प्राप्त डॉक्टर/चिकित्सा संस्थान से जारी अनिवार्य चिकित्सा प्रमाणपत्र मांगे गए हैं।

 संगठनों को 20 जून को ट्रेवल शेड्यूल के साथ नामित कैंप निदेशक/जनरल मैनेजर (कार्य) से संपर्क कर रिपोर्ट करने को कहा है। लंगर के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। लंगर के लिए अनुमति से यात्रा को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। पारंपरिक बालटाल ट्रैक को लगभग साफ कर दिया गया है। 

औपचारिक तौर पर घोषित 28 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा के लिए कुछ लंगर संगठनों को लंगर के लिए अनुमति दी गई है। हालांकि बालटाल ट्रैक पर अन्य कार्य भी चल रहे हैं, जिससे उन्हें भी लंगर सेवाओं का लाभ दिया जाएगा। लंगर संगठनों को जारी की गई शर्तों में उन्हें किचन/कुकिंग क्षेत्र में उचित साफ सफाई रखनी होगी। इस क्षेत्र को पीवीसी शीट (2एमएम थिक) से कवर करना होगा। इसके अलावा अन्य जरूरी कोविड गाइडलाइन का पालन करना होगा। 

सेवादार नियमित रूप से फेस मास्क, सामाजिक दूरी, भीड़ न करना आदि का पालन करेंगे। कोविड महामारी को देखते हुए भीड़ से बचाव के लिए लंगर स्थलों पर खाने की अनुमति नहीं होगी और लोगों को पैक्ड फूड वितरित किया जाएगा। अनुमति हासिल करने वाले लंगर संगठनों में से एक बर्फानी सेवा मंडल, हरियाणा है। श्राइन बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि यात्रा पर अभी आधिकारिक कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन बालटाल ट्रैक को पवित्र गुफा तक लगभग साफ कर लिया गया है। इस ट्रैक पर अन्य कार्य भी चल रहे हैं। ट्रैक पर सुरक्षाबलों की पहले ही तैनाती की गई है। 

सीमित लंगर संगठनों को अनुमति देने से रोष
श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (साबलो) के महासचिव राजन गुप्ता ने श्राइन बोर्ड की ओर से सीमित लंगर संगठनों को अनुमति देने पर रोष जताया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से यात्रा की अभी औपचारिक कोई घोषणा नहीं की गई है, उस पर कुछ लंगर संगठनों को अनुमति देने का क्या तर्क है। बोर्ड को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि अन्य लंगर संगठन भी अपनी तैयारी कर सकें। फिलहाल बोर्ड यात्रा करवाने में असमर्थ नजर आ रहा है। 

इस साल भी आरती का सीधा प्रसारण होगा
पिछले साल की तरह इस बार भी श्राइन बोर्ड की ओर से पवित्र अमरनाथ गुफा से आरती का सीधा प्रसारण किया जाएगा। इसके लिए एमएचवन प्राइम चैनल पर पवित्र गुफा से 28 जून से 22 अगस्त तक प्रात: छह बजे से 6.30 बजे और सायं 5 से 5.30 बजे तक आरती का सीधा प्रसारण होगा।
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जम्मू-कश्मीर: रिकॉर्ड 12600 करोड़ रुपये के जिला बजट को मंजूरी, जनभागीदारी से खर्च होगी राशि

जम्मू-कश्मीर में विकास की गति को रफ्तार देने के लिए उप-राज्यपाल प्रशासन ने रिकॉर्ड 12600.58 करोड़ के जिला कैपेक्स (पूंजी व्यय) बजट को मंजूरी दी है। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में श्रीनगर नागरिक सचिवालय में बुधवार को उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। वर्ष 2021-22 के लिए स्वीकृत यह विकास राशि बीते वित्त वर्ष की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। वर्ष 2020-21 में 5134.40 करोड़ रुपये की विकास योजना मंजूर की गई थी।

खास बात है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद यह पहला बजट है, जिसमें विकास योजनाओं का खाका पंचायत, ब्लॉक विकास और जिला विकास परिषद की अनुशंसा से तैयार किया गया है। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रदेश का यह बजट जनभागीदारी का कैपेक्स बजट है। यह पैसा रोजगार के अवसर बढ़ाने, बेहतर सड़क नेटवर्क, स्वच्छ पेयजल व बिजली आपूर्ति में सुधार लाने के अलावा पर्यटन को बढ़ावा देकर व युवाओं को सशक्त बनाने के लिए खर्च किया जाएगा।

उप-राज्यपाल ने कहा कि विकास योजनाएं चूंकि जमीनी स्तर से तैयार हुई हैं, ऐसे में यह बजट जमीनी स्तर पर व्यापक परिवर्तन सुनिश्चित करेगा। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के हर अंग को वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। जिला स्तर की योजनाओं को पंचायत स्तर पर तैयार किया गया, जिसे बीडीसी और डीडीसी स्तर से होकर मंजूरी दी गई है। इस लिहाज से यह ऐतिहासिक विकास बजट है जिसके लिए जिला विकास परिषद अध्यक्ष, ब्लाक विकास अध्यक्ष, सरपंच, पंच और प्रशासन के अधिकार बधाई के पात्र हैं। उन्होंने जिला उपायुक्तों को निर्देश देकर कहा कि ढांचागत परियोजनाओं में आ रही बाधाएं प्राथमिकता से दूर करें। 

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बिजली कटौती से मचा हाहाकार:  उप-राज्यपाल बोले- मैं आपका पसीना व्यर्थ नहीं जाने दूंगा

जम्मू संभाग में बिजली की अघोषित कटौती से मचे हाहाकार पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता को जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उप-राज्यपाल ने जम्मू संभाग के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मैं आपका पसीना व्यर्थ नहीं जाने दूंगा और जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। संभाग को जिस अनिर्धारित बिजली कटौती का सामना करना पड़ा वह सामान्य नहीं था।
 
उप-राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हर साल नुकसान के बावजूद 3500 करोड़ रुपये बिजली पर खर्च किए जा रहे हैं। व्यवस्था सुधार किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप सर्दियों में कश्मीर में लोगों को बर्फबारी के दौरान भी नियमित बिजली आपूर्ति मिलती रही।

70 साल के बराबर चार वर्ष में बिजली बनाकर 24 घंटे देंगे आपूर्ति
उप-राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारी जल संसाधन के चलते बिजली क्षमता में 14867 मेगावाट की कुल पहचान की गई है। पिछले 70 वर्षों में केवल 3504.90 मेगावाट का उपयोग किया जा सका है। पिछले 11 माह में जिन परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है, उससे अगले चार वर्ष में 3500 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। ट्रांसमिशन नेटवर्क में विस्तार से चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। उप-राज्यपाल ने कहा कि डिवीजनल स्टोर्स के अलावा दूरदराज के इलाकों में ट्रांसफार्मर, खंभे और कंडक्टर का पर्याप्त स्टाक जमा है।


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परिसीमन से जम्मू में चार और कश्मीर में तीन नई सीटें बढ़ने की संभावना

परिसीमन आयोग की ओर से जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के उपायुक्तों से 18 बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश में विधानसभा की सात सीटें बढ़नी हैं। इसमें चार सीटें जम्मू और तीन सीटें कश्मीर के खाते में आने की संभावना है।

आबादी के हिसाब से अनुसूचित जनजाति को भी पहली बार प्रतिनिधित्व का मौका मिलेगा। परिसीमन के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सात विधानसभा सीटों का रोस्टर बदल जाएगा। नियमानुसार दो विधानसभा चुनाव के बाद रोस्टर बदल जाना चाहिए लेकिन यहां चार चुनाव बिना रोस्टर बदले ही हो गए हैं। आरक्षित सभी सीटें जम्मू संभाग में ही हैं।

जम्मू में रायपुर दोमाना, छंब, चिनैनी, सांबा आदि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इनके ओपन होने की संभावना को देखते हुए अभी से सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से क्षेत्र में सरगर्मी बढ़ा दी गई है। कहा जा रहा है कि परिसीमन आयोग की ओर से जल्द ही दूसरी बैठक बुलाई जाएगी। इसमें सभी सांसदों से विचार विमर्श किया जाएगा।

दूसरी बैठक में नेकां के तीनों सांसदों डॉ. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन के भाग लेने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि आयोग की ओर से सभी डीसी से जल्द ही परिसीमन को लेकर वर्चुअल संवाद किया जाएगा। इसके बाद आयोग की दूसरी बैठक बुलाई जाएगी। 

दूर होंगी विसंगतियां
सूत्रों के अनुसार परिसीमन के बाद सभी विसंगतियां दूर हो सकती हैं। आयोग ने प्रशासनिक चुनौतियों के मद्देनजर जानकारी मांगी है कि यदि कोई विधानसभा क्षेत्र एक से अधिक जिले में लगता हो, तहसील का दायरा एक से अधिक विस क्षेत्र में हो, पटवारी हलका, राजस्व गांव एक से अधिक विस क्षेत्र में आता हो। आयोग ने माइग्रेशन करने वाली आबादी के बारे में भी जानकारी मांगी है ताकि उनकी भी चुनाव में हिस्सेदारी सुनिश्चित कराई जा सके। 

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या को लेकर व्यापक पैमाने पर विसंगतियां हैं। जम्मू संभाग में कुछ सीटों पर मतदाताओं की संख्या एक लाख से अधिक भी है तो कश्मीर में कई सीटों पर मतदाताओं की संख्या 50 हजार से कम है। इसलिए आयोग ने अधिक और कम आबादी वाले इलाकों के बारे में भी जानकारी एकत्रित की है।
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अध्ययन में खुलासा : लद्दाख के ठंडे मरुस्थल  में कभी आती थी भीषण बाढ़, अध्येताओं ने चेताया

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विशेष जलवायु के लिए ठंडे मरुस्थल के रूप में जाना जाने वाला लद्दाख कभी भीषण बाढ़ का केंद्र हुआ करता था। बाढ़ भी ऐसी कि पानी की लहरें नदियों के मौजूदा स्तर से 30 मीटर ऊंचाई तक उफनती थीं। वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन ज्योलॉजी देहरादून के वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की टीम ने गहन अध्ययन के बाद यह खुलासा किया है। 

टीम के अध्ययन के अनुसार लद्दाख में जिस तरह से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है, भविष्य में बाढ़ आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में शहरी और ग्रामीण योजनाओं को लेकर गंभीर होना पड़ेगा।

अध्ययन के अनुसार भारत की नदियों में बाढ़ के कई कारण होते हैं। ऐसे में केवल सौ साल के इतिहास का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। वाडिया संस्थान की टीम ने लद्दाख के जंस्कार और सिंधु नदी मार्ग पर पिछले तीन से 15 हजार साल के इतिहास में आई बाढ़ का अध्ययन किया। 

अध्ययन के दौरान जंस्कार और सिंधु नदी के आसपास स्लैक वाटर डिपॉजिट मिले। बारीकी से अध्ययन में कितनी और कब-कब बाढ़ आई, इसका पता लगाया गया। निष्कर्ष में पाया गया कि लद्दाख के मरुस्थल वाले इलाकों में नदी के वर्तमान स्तर से 30 मीटर ऊंची बाढ़ आया करती थी। 

इस क्षेत्र का हजारों वर्ष पूर्व इंसानों ने रहने और शिविर लगाने के लिए इस्तेमाल किया। कुल 15 हजार वर्ष के कालखंड का अध्ययन बताता है कि पहले लद्दाख की जलवायु वर्तमान से काफी गर्म थी, जिससे ग्लेशियर पिघलते और भीषण बाढ़ आती।
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जम्मू-कश्मीर: पहाड़ी रास्तों और नदियां पार कर घर द्वार पहुंचकर हो रहा टीकाकरण, देखिए तस्वीरें

कोरोना महामारी के दौरान लोगों की जान बचाने का स्वास्थ्य विभाग में जुनून है। नदी-नाले, पहाड़ियां, दुर्गम रास्ते तय कर विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर लोगों को टीका लगा रही है। सेना भी इस काम में मदद कर रही है। उसकी पेट्रोल टीम सुदूर इलाकों में जाकर लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक कर रही है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जांच भी कर रही है। भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर जिलों में लोग टीकाकरण केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने तय किया कि वे खुद ही घर-घर जाकर लोगों को टीका लगाएंगे ताकि कोरोना को मात दिया जा सके। कोई भी बिना टीका लगाए न रह जाए। जम्मू संभाग के कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, रियासी, पुंछ, राजोरी तथा कश्मीर संभाग में बांदीपोरा, कुपवाड़ा, कुलगाम तथा शोपियां में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर टीकाकरण कर रही है। पुलवामा में तो स्वास्थ्य कर्मी तब्बसुम खेतों तक पहुंचीं। यहां धान की रोपाई कर रहे लोगों को टीका लगाया। अब तक अकेले तब्बसुम आठ हजार से अधिक लोगों को टीका लगा चुकी है।
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जम्मू-कश्मीर : श्रीनगर में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक दहशतगर्द ढेर

शहर के बाहरी इलाके नौगाम के वागूरा में कल रात से जारी मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया गया है। जिसकी पहचान शोपियां निवासी उजैर अशरफ दर के रूप में हुई है। अभी और आतंकी घिरे होने की आशंका है। तलाश जारी है। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक पिस्टल, एक गोला बारुद की मैगजीन, छह राउंड और दो ग्रैनेड बरामद किए हैं।
 
बताते हैं कि वागूरा इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने रात को घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। घेरा सख्त होता देख घर में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि, सुरक्षाबलों ने संयम बरतते हुए उन्हें आत्मसमर्पण का मौका दिया था। 

कई बार की कोशिश के बाद भी आतंकियों ने समर्पण करने की बजाय फायरिंग शुरू कर दी। इस पर जवाबी कार्रवाई से मुठभेड़ शुरू हो गई। कुछ देर के बाद दूसरी ओर से फायरिंग आनी बंद हो गई।

सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में कड़ी घेराबंदी कर रखी है। इलाका रिहायशी होने के कारण सेना संयम बरत रही है ताकि किसी प्रकार का जानी नुकसान न होने पाए।
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जम्मू-कश्मीर: बैंकों में बड़ी संख्या में पहुंच रहे लोग, लगातार उड़ रही कोरोना नियमों की धज्जियां

जम्मू जिले में अनलॉक होते ही बैंकों और सरकारी दफ्तरों में अपने काम करवाने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है। प्रदेश के सभी बैंकों में एक जैसा हाल चाहे फिर वो जेके बैंक हो या फिर अन्य कोई। हर बैंक के बाहर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इस दौरान कोविड प्रोटोकोल की जमकर धज्जियां उड़ती हुई नजर आ रही हैं। सामाजिक दूरी का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा। बैंकों की लचर कार्यप्रणाली और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जम्मू पुलिस मुख्यालय के एसपी रमनीश गुप्ता का कहना है कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन न करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। पुलिस इसे प्रभावी बनाने में जुटी है। यह देखा जाएगा कि कहां पर लापरवाही हो रही है और कार्रवाई की जाएगी। ... और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के लिए अच्छी खबर: बनिहाल-काजीगुंड टनल का संचालन जल्द होगा, कोरोना पाबंदियों के चलते हो रही देरी

बहुप्रतीक्षित बनिहाल काजीगुंड सड़क टनल को जल्द चालू किया जाएगा। टनल को अंतिम रूप देने के लिए सिंगापुर से सुरक्षा गैजेट लाए जा रहे हैं, जिन्हें लाने में कोरोना पाबंदियों की वजह से कुछ देरी हुई है। सड़क, परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय सचिव गिरिधर अरमाने ने अपने बनिहाल दौरे में इसकी जानकारी दी है। आठ किलोमीटर लंबी इस सड़क टनल का निर्माण कार्य एनएचएआई ने नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी को सौंपा था, वर्ष 2011 में कंपनी द्वारा टनल निर्माण कार्य शुरू किया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय सचिव ने पिछले दिनों काजीगुंड और बनिहाल के बीच डबल-ट्यूब फोर-लेन टनल पर निर्माण कार्य की स्थिति का आकलन करने के लिए दौरा किया था, जो श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा है। टनल का निरीक्षण करने के बाद केंद्रीय सचिव ने बनिहाल में एक संक्षिप्त बैठक की अध्यक्षता की। जिसमें संबंधित एजेंसियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भाग लिया। ... और पढ़ें
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