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त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरल...

6 सितंबर 2020

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Digital Edition

एलओसी पर पाकिस्तानी ने किया संघर्ष विराम का उल्लंघन, सेना ने मार गिराए दो पाक सैनिक, कई चौकियां तबाह

पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर संघर्ष विराम के उल्लंघन से बाज नहीं आ रही। वीरवार को पुंछ के शाहपुर सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर की गई गोलाबारी के जवाब में सेना ने पाकिस्तानी सेना की एक  चौकी तबाह कर दी और दो जवान ढेर कर दिए, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए।  

पाकिस्तानी सेना ने वीरवार देर शाम शाहपुर सेक्टर के काईयां क्षेत्र में अचानक गोलाबारी शुरू कर दी थी। सैन्य चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। इससे लोगों में भी दहशत फैल गई थी। सेना ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया और जवाबी कार्रवाई में काईयां क्षेत्र में उस पार स्थित पाकिस्तानी सेना की एक चौकी पूरी तरह तबाह हो गई और दो जवान मौके पर ही ढेर हो गए, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

गोलाबारी के डर से कई घंटे बाद उठाईं जवानों की लाशें
सूत्रों के मुताबिक इसके बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलाबारी बंद कर दी गई, लेकिन जवाबी कार्रवाई से खौफजदा पाकिस्तानी सेना को घंटों तक घायल और मृत जवानों को वहां से निकालने की हिम्मत नहीं हुई। कई घंटों के बाद छुपते-छुपाते घायल और मृत जवानों को वहां से निकाला गया।

आईबी पर भी पाकिस्तान ने रात भर दागे गोले
पाकिस्तान ने वीरवार रात भी आईबी पर हीरानगर सेक्टर में करीब सात घंटे गोलाबारी की। पाकिस्तान की 25 चिनाब रेंजर्स ने पप्पू चक पोस्ट से वीरवार रात दस बजे गोलाबारी शुरू की, जो शुक्रवार सुबह पांच बजे तक रुक-रुक कर जारी रही। इस दौरान बीएसएफ की चांदवां, मनियारी, फकीरा पोस्ट व उसके साथ लगते रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। हालांकि, इसमें किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। 

बता दें, पाकिस्तान ने बुधवार रात करीब साढ़े बजे से वीरवार सुबह साढ़े चार बजे तक भी हीरानगर सेक्टर के छन्न टांडा और चक चंगा गांवों में गोलाबारी की थी। इसमें दोनों गांवों के कुल नौ घरों को नुकसान पहुंचा था। सीमा पर चल रहे सुरक्षा बांध के काम को बाधित करने के लिए पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर रहा है।
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पाकिस्तान ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किया संघर्ष विराम का उल्लंघन पाकिस्तान ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किया संघर्ष विराम का उल्लंघन

जम्मू-कश्मीरः ईद के मौके पर फारुख अब्दुल्ला को हजरतबल दरगाह जाने से रोका, घर में किया नजरबंद

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और जेकेएनसी पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर फारुख अब्दुल्ला को ईद-ए-मिलाद-उल-नबी के मौके पर हजरतबल दरगाह जाने से रोक दिया गया। सिर्फ यही नहीं उन्हें उनके घर में दोबारा नजरबंद कर दिया गया है। उन्हें घर से निकलने की इजाजत नहीं दी जा रही।

जेकेएनसी ने प्रशासन के इस कदम की निंदा करते हुए, इसे प्रार्थना करने के सांविधानिक अधिकारों का हनन बताया है, वो भी ईद-ए-मिलाद-उल-नबी के खास मौके पर। बताया जा रहा है कि आज सुबह जब वह ईद की नमाज अदा करने के लिए निकले तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया।

डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि वह किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं बल्कि ईद की नमाज अदा करने के लिए दरगाह जाना चाहते हैं परंतु उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि नमाज अदा करने की आड़ में डॉ. फारुख अब्दुल्ला ने वहां एक सभा बुलाई हुई थी। जिसे उन्हे संबोधित करना था। पुलिस को इस बारे में पता चल गया और उन्होंने डॉ. अब्दुल्ला को घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी।
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हंदवाड़ा पुलिस ने गिरफ्तार किए आतंकियों के दो मददगार, हथियार व गोला-बारूद बरामद

उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला
हंदवाड़ा पुलिस ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत आतंकियों के दो मददगारों को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किए हैं।

जानकारी के अनुसार हंदवाड़ा पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि कुछ आतंकी इलाके में छिपे हुए हैं। इसके बाद हंदवाड़ा पुलिस और सीआरपीएफ की 21आरआर व 92 बटालियन ने संयुक्त अभियान के तहत इलाके में जगह-जगह नाके बनाकर वाहनों और पैदल यात्रियों की चेकिंग शुरू की।

जांच के दौरान चिनार पार्क हंदवाड़ा में बाइक से जा रहे दो लोग सुरक्षाबलों को संदिग्ध लगे। यह बाइक सवार सुरक्षाबलों को देखकर भागने की कोशिश करने लगे लेकिन भाग नहीं सके। शुरुआती जांच में गिरफ्तार लोगों की पहचान लियाकत अहमद और आकिब राशिद मीर के रूप में हुई है। दोनों ही कुपवाड़ा के रहने वाले हैं।

उनके कब्जे से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं जिसे ये दोनों दक्षिण कश्मीर के आतंकियों में बांटने वाले थे। दोनों के खिलाफ आईए एक्ट की धारा 13, 18, 20 और 38 के साथ ही यूएपीए कानून के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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आतंकियों के आगे नहीं झुके कुलगाम के लोग, चेतावनी के बाद भी भाजपा नेताओं के जनाजे में जुटी सैकड़ों की भीड़

कश्मीर में एनजीओ बनाकर आतंकियों को हो रही फंडिंग, श्रीनगर और दिल्ली में एनआईए की दबिश

आतंकी फंडिंग मामले में एनआईए ने जम्मू कश्मीर के अंदर और बाहर संचालित हो रहे पंजीकृत एवं गैर पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की जांच की कड़ी में वीरवार को कुछ और संगठनों पर छापे मारे। दरअसल इन संगठनों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने वाले माध्यम के रूप में किया जा रहा है। 

इनमें से कुछ संगठनों का नेतृत्व हुर्रियत कांफ्रेंस के जफ र अकबर सहित कट्टरपंथी अलगाववादी कर रहे हैं। जांच एजेंसी ने अलगाववादी संगठनों को धन मुहैया करने वाले माध्यमों को बंद करने के बाद यह कार्रवाई की है। वीरवार को श्रीनगर, बारामुला, अनंतनाग और कुलगाम समेत 7 और दिल्ली में 2 जगहों पर दबिश दी। इस दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। 

एनआईए की विभिन्न टीमों ने एक महानिरीक्षक और एक उप महानिरीक्षक की निगरानी में लगातार दूसरे दिन नौ स्थानों पर तलाशी ली। इनमें दिल्ली में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफ र उल इस्लाम खान के नेतृत्व वाले एनजीओ चैरिटी एलायंस पर छापा मारा गया। अधिकारियों ने बताया कि जिन नौ परिसरों में छापामारी की गई, उनमें अनंतनाग में संचालित शब्बीर अहमद बाबा के नेतृत्व वाला ह्यूमन वेलफेयर फ ाउंडेशन, जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामिया की  जीएम भट के नेतृत्व में बडगाम में चल रहे फलाह-ए-आम ट्रस्ट, जेके यतीम फाउंडेशन, साल्वेशन मूवमेंट और अब्दुल कादिर के बारामुला में चल रहे जेके वॉइस ऑफ  विक्टिम्स शामिल हैं। 

एक दिन पहले भी की गई थी छापामारी
अधिकारियों ने बताया कि इन एनजीओ और ट्रस्ट के खिलाफ  विश्वसनीय सूचना मिलने के बाद आठ अक्टूबर को भारतीय दंड संहिता और गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि ये संगठन तथाकथित दान और कारोबारी योगदान के माध्यम से देश और विदेश से चंदा एकत्र करते हैं और उसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग में करते हैं।

एनआईए ने बुधवार को इसी मामले में कश्मीर और बंगलूरू के कुछ ठिकानों की तलाशी ली थी और दावा किया था कि इस दौरान उसने कई दस्तावेज जब्त किए हैं। जिन लोगों के परिसरों में छापामारी की गई थी उनमें खुर्रम परवेज (जम्मू कश्मीर कोअलिशन ऑफ  सिविल सोसाइटी के समन्वयक), उनके सहयोगी परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मट्टा और बंगलूरू की स्वाति शेषाद्रि तथा परवीना अहंगर-एसोसिएशन ऑफ  पैरेंट्स ऑफ  डिसैपियर्ड पर्सन्स (एपीडीपी) शामिल हैं। एनजीओ अथरूट और एक अंग्रेजी दैनिक के ट्रस्ट के कार्यालयों में भी छापे मारे गए थे। 

एपीडीपी ने जताया विरोध
एपीडीपी ने एक बयान जारी कर कहा कि एनआईए की टीम ने कई दस्तावेज और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। अहंगर के मोबाइल फ ोन भी जब्त कर लिए गए। बयान में आरोप लगाया गया कि एनआईए की टीम ने जो दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं, उनमें सुरक्षा बलों द्वारा किए गए मानवाधिकार हनन की घटनाओं में निशाना बनाए गए लोगों के नाम, पहचान के ब्योरे हैं।
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जम्मू-कश्मीर : एक लाख पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी पहली बार पंचायत चुनाव में डालेंगे वोट

जम्मू-कश्मीर में बसने के करीब सात दशक बाद करीब एक लाख पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को राज्य के पंचायत चुनाव में वोट डालने का अधिकार मिल गया है। पहली बार वे आगामी कुछ दिनों में होने वाले उपचुनाव में वोट डालेंगे। सभी शरणार्थियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से आयुक्तों को आदेश जारी किया गया है। अनुच्छेद 370 की वजह से पीआरसी तथा स्टेट सब्जेक्ट न होने की वजह से इन्हें राज्य की नागरिकता हासिल नहीं थी। अब तक इन्हें केवल लोकसभा चुनाव में ही वोट डालने का अधिकार प्राप्त था। 

सूत्रों ने बताया कि इन रिफ्यूजियों की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में इसी महीने आपत्ति जताई गई कि अनुच्छेद 370 व 35 ए को हटे एक साल से अधिक का समय हो गया। इसके बाद भी उके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। जनवरी महीने में मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान भी नाम सूची में शामिल नहीं किए गए।
अब राज्य के संयुक्त  मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सभी जिला पंचायत निर्वाचन अधिकारी (डीसी) को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून में पीआरसी तथा स्टेट सब्जेक्ट शब्द हटा दिया गया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून में भी इसका विलोप कर दिया गया है।
ऐसे में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों के नाम पंचायत मतदाता सूची में शामिल किए जाएं, किसी भी योग्य उम्मीदवार का नाम छूटने न पाए। सूत्रों ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आदेश के बाद सभी जिलों के जिला कलेक्टरों की ओर से नाम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 
26 हजार से अधिक परिवार
देश के विभाजन के दौरान वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर में आकर बस गए थे। जम्मू में 22 हजार, कठुआ में 3204 समेत इन चार जिलों में लगभग 26 हजार हजार से अधिक परिवार रहते हैं। वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी वोटरों की संख्या लगभग एक लाख है।  

सात दशक बाद पंचायत मतदाता सूची में रिफ्यूजियों का नाम शामिल हो पाया है। यह सब अनुच्छेद 370 हटने की वजह से संभव हो पाया है। इसका पूरा शरणार्थी समाज स्वागत करता है। 
- लब्बा राम गांधी, अध्यक्ष-वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी
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