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मुश्ताक अली खां अली के अल्फ़ाज़- शेर भगत सिंह

इरशाद

मुश्ताक अली खां अली के अल्फ़ाज़- शेर भगत सिंह 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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निकला ज़ुबां से 'मरहबा' यारों से जबकि यह कहा 
रहिए मुल्के अदम हुआ हिंद का नवजवां भगत 

खुशियां मनाओ हिंदियों रंजो अलम फ़ना करो
क्या ख़ुश नसीब मुल्क है, जिसमे था नवजवां भगत  आगे पढ़ें

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