आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Irshaad ›   Happy Rakshabandhan 2020: Makhanlal chaturvedi famous poem utho talwaron ki rakhi bandh gai
उठो तलवारों, कि राखी बँध गई झंकार कर दो: माखनलाल चतुर्वेदी।

इरशाद

उठो तलवारों, कि राखी बँध गई झंकार कर दो: माखनलाल चतुर्वेदी

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

269 Views
वह मरा कश्मीर के हिम-शिखर पर जाकर सिपाही,
बिस्तरे की लाश तेरा और उसका साम्य क्या?
पीढ़ियों पर पीढ़ियाँ उठ आज उसका गान करतीं,
घाटियों पगडंडियों से निज नई पहचान करतीं,
खाइयाँ हैं, खंदकें हैं, जोर है, बल है भुजा में,
पाँव हैं मेरे, नई राहें बनाते जा रहे हैं। आगे पढ़ें

सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!