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काव्य चर्चा

रवीन्द्रनाथ टैगोर की 3 चुनिंदा कविताएं...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बांग्ला साहित्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर रवीन्द्रनाथ ठाकुर बीसवीं शताब्दी के शुरुआती चार दशकों तक भारतीय साहित्याकाश में ध्रुवतारे की तरह चमकते रहे। 'गीतांजलि' के लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। रवीद्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई 1861 को हुआ था। उनकी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल में हुई। उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर एक जाने-माने समाज सुधारक थे। वे चाहते थे कि रवीन्द्रनाथ बड़े होकर बैरिस्टर बने और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ने लंदन विश्वविद्यालय   से कानून की पढ़ाई भी की लेकिन बिना डिग्री लिए वापस आ गए। गुरुदेव का रुझान बचपन से ही कविता, छन्द और रचनात्मक लेखन में था। कहते हैं उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी। प्रस्तुत है रवीन्द्रनाथ ठाकुर की चुनिंदा कविताएं-  

यदि नहीं चीन्ह मैं पाऊँ, क्या चीन्ह मुझे वह लेगा ।
इस नव फागुन की बेला, यह नहीं जानती हूँ मैं ।।
निज गान कली में मेरी, वह आकर क्या भर देगा,
यह कहाँ जानती हूँ मैं ।। इन प्राणों को हर लेगा ।

क्या अपने ही रंगों में, वह फूल सभी रंग देगा,
क्या अंतर में आ करके वह नींद चुरा ही लेगा,
क्या गःऊँघट नव पत्तों का, कर जाएगा वह चंचल,
मेरे अंतर की गोपन वह बात जान ही लेगा—
यह कहाँ जानती हूँ मैं ।।

मूल बांगला से अनुवाद : प्रयाग शुक्ल  आगे पढ़ें

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