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Rabindranath tagore geet from suno deepshalini

काव्य चर्चा

'सुनो दीपशालिनी' से रबीन्द्रनाथ ठाकुर के चुनिंदा गीत

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हर विधा में रचनाएं लिखने वाले कवि रबीन्द्रनाथ ठाकुर को साहित्य में योगदान के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत सहित उन्होंने कुल तीन देशों के राष्ट्रगान लिखे। साथ ही 2,000 से अधिक गीतों की रचना की। पेश हैं उनकी किताब 'सुनो दीपशालिनी' से उनके लिखे कुछ गीत। इनका अनुवाद प्रयाग शुक्ल ने किया है।

द्वार थपथपाया क्यों तुमने ओ मालिनी
पाने को उत्तर ओ किससे क्या मालिनी
फूल लिए चुन तुमने गूँथी है माला 
मेरे घर का अन्धकार जड़ा हुआ ताला 
खोज नहीं पाया पथ दीप नहीं बाला 

आई गोधूलि और पुँछती सी रोशनी 
डूब रही स्वर्णकिरण अँधियारी में सनी
होगा जब अन्धकार आना तब पास में
दूर कहीं पर प्रकाश जब हो आकाश में

पथ असीम रात घनी, सुनो दीपशालिनी 

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