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Rabindranath tagore gitanjali kavita

काव्य चर्चा

रबीन्द्रनाथ ठाकुर की गीतांजलि से संगीतात्मक कविताएं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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रबीन्द्रनाथ ठाकुर की कृति 'गीतांजलि' नोबेल पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है। इस किताब में लिखी कविताओं का अनुवाद डॉ. डोमन साहु 'समीर' ने किया है। विशेष यह है कि इस किताब में लिखी प्रत्येक कविता एक स्वर लिए हुए है जिसे आप अपनी धुन में गा भी सकते हैं। रबीन्द्रनाथ टैगोर के नाम से रबीन्द्र संगीत भी प्रसिद्ध है। उन्होंने कई गीत लिखे हैं। विश्व संगीत दिवस के मौके पर पढ़ें उनके लिखे कुछ ख़ास गीत


आओ नव-नव रूपों में तुम प्राणों में
आओ गन्धों में, वर्णों में, गानों में
आओ अंगों में तुम, पुलकित स्पर्शों में
आओ हर्षित सुधा-सिक्त सुमनों में
आओ मुग्ध मुदित इन दोनों नयनों में
आओ नव-नव रूपों में तुम प्राणों में

आओ निर्मल उज्जवल कान्त
आओ सुन्दर स्निग्ध प्रशान्त
आओ, आओ है वैचित्र्य-विधानों में

आओ सुख-दुख में तुम आओ मर्मों में
आओ नित्य-नित्य ही सारे कर्मों में
आओ, आओ सर्व कर्म-अवसानों में
आओ नव-नव रूपों में तुम प्राणों में आगे पढ़ें

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