आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Kavya Charcha ›   rabindranath tagore jayanti 2019 famous hindi poetry
8 साल की उम्र में कविता लिखने वाले रवीन्द्रनाथ की चुनिंदा रचनाएं....

काव्य चर्चा

8 साल की उम्र में कविता लिखने वाले गुरुदेव रवीन्द्रनाथ की चुनिंदा रचनाएं....

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

5198 Views
बांग्ला साहित्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर रवीन्द्रनाथ ठाकुर बीसवीं शताब्दी के शुरुआती चार दशकों तक भारतीय साहित्याकाश में ध्रुवतारे की तरह चमकते रहे। 'गीतांजलि' के लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। रवीद्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई 1861 को हुआ था। उनकी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल में हुई। उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर एक जाने-माने समाज सुधारक थे। वे चाहते थे कि रवीन्द्रनाथ बड़े होकर बैरिस्टर बने और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ने लंदन विश्वविद्यालय   से कानून की पढ़ाई भी की लेकिन बिना डिग्री लिए वापस आ गए। गुरुदेव का रुझान बचपन से ही कविता, छन्द और रचनात्मक लेखन में था। कहते हैं उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी। प्रस्तुत है रवीन्द्रनाथ ठाकुर की चुनिंदा कविताएं-  

पिंजरे की चिड़िया थी..

पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में
                 वन कि चिड़िया थी वन में
एक दिन हुआ दोनों का सामना
             क्या था विधाता के मन में

वन की चिड़िया कहे सुन पिंजरे की चिड़िया रे
         वन में उड़ें दोनों मिलकर
पिंजरे की चिड़िया कहे वन की चिड़िया रे
            पिंजरे में रहना बड़ा सुखकर

वन की चिड़िया कहे ना...
   मैं पिंजरे में क़ैद रहूँ क्योंकर
पिंजरे की चिड़िया कहे हाय
     निकलूँ मैं कैसे पिंजरा तोड़कर

वन की चिड़िया गाए पिंजरे के बाहर बैठे
          वन के मनोहर गीत
पिंजरे की चिड़िया गाए रटाए हुए जितने
         दोहा और कविता के रीत

वन की चिड़िया कहे पिंजरे की चिड़िया से
       गाओ तुम भी वनगीत
पिंजरे की चिड़िया कहे सुन वन की चिड़िया रे
        कुछ दोहे तुम भी लो सीख

वन की चिड़िया कहे ना ....
     तेरे सिखाए गीत मैं ना गाऊँ
पिंजरे की चिड़िया कहे हाय!
     मैं कैसे वनगीत गाऊँ

वन की चिड़िया कहे नभ का रंग है नीला
      उड़ने में कहीं नहीं है बाधा
पिंजरे की चिड़िया कहे पिंजरा है सुरक्षित
      रहना है सुखकर ज़्यादा

वन की चिड़िया कहे अपने को खोल दो
     बादल के बीच, फिर देखो
पिंजरे की चिड़िया कहे अपने को बाँधकर
     कोने में बैठो, फिर देखो आगे पढ़ें

सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!