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acharya mahaveer prasad dwivedi daulatpur city

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी: एक वट वृक्ष जिसकी छाया में हिन्दी साहित्य पल्लवित हुआ

मनीष कुमार श्रीवास्तव, रायबरेली

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी हिन्दी साहित्य के वह महान युग प्रवर्तक साहित्यकार हैं जिन्होंने हिन्दी को न केवल ऊंगली पकड़ कर चलना सिखाया अपितु अनुशासन की छड़ी से शुद्ध एवं व्याकरण सम्मत बनाया।
 
द्विवेदी जी का जन्म मेरे शहर रायबरेली के सुदूर गांव दौलतपुर में हुआ था। इस महापुरुष की याद में रायबरेली की धरती आज भी गौरवान्वित महसूस करती है। रायबरेली की इस पवित्र भूमि ने एक से बढ़कर एक महान हस्तियों को जन्म दिया है। यह साहित्य, शिक्षा, धर्म एवं राजनीति में अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है।
 
आचार्य जी ने रेलवे की नौकरी न छोड़ी होती तो आज हमें हिन्दी का ऐसा सशक्त साहित्यकार न मिल पाता। आचार्य द्विवेदी जी के अतुलनीय योगदान के कारण ही आधुनिक हिन्दी साहित्य का दूसरा युग 'द्विवेदी युग' के नाम से प्रसिद्ध है।
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