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How are you nowadays?

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आजकल कैसे हो

kushagra gupta

28 कविताएं

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आजकल कैसे हो? क्या चल रहा है के जवाब में
दिल से ये पंक्तियां निकली थीं...
जहां था वहीं हूँ,
वहीं पर अटक गया हूँ..
उछाला गया था ज़मीं से,
कि जाऊंगा आसमां तक..
मगर रस्ते के पेड़ से मोहब्बत कर ली,
उसी पर लटक गया हूँ..
कागजों पर उकेरता हूँ दिल के सारे दर्द,
फिर मैं कहता हूं कवि हूँ,
वो कहते हैं सटक गया हूँ...
दुनिया भर से मेल मिलाप का दौर जारी है,
मगर खुद ही से मिलने को तरस गया हूँ...
चला था उसी पथ पर जो जाता था मन्ज़िल तक,
पर उसने गले लगाकर कहां मोड़ा,
अब भटक गया हूँ...
जहां था वहीं हूँ वहीं पर अटक गया हूँ

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