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शाम-ए-अवध

RiShU Tripathi

1 कविता

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ए अवध तेरी खूबसूरती पे चाँद भी आहें भरता होगा,
निहारता होगा और फिर चकोर से अंदाज़-ए-बयान करता होगा।
काश ये रात यहीं ठहर जाए,
मैं इस खूबसूरत महफिल में डूबा रहूं।
पर एेसा मुमकिन नहीं,
चांदनी का साथ मेरा तारों की बारात
नवाबों की नगरी में रोज़ बिताऊं रात।

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