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बदल रहा भारत अपना...

Sukarma Thareja

1 कविता

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बदल रहा है अब भारत अपना

जनता का मत व्यवहार,
धर्म और जाति नहीं अब आधार ,
प्रत्येक शहर में हो मेट्रो की झंकार ,
ऐसी है जन जन की पुकार,
क्योकि बदल रहा है अब भारत अपना l

स्वास्थ्य फिटनेस में युवाओं ,
की बढ़ रही रुचि अपार,
गली गली -फिटनेस जिम की कतार,
योग सेन्टर्स में सुबह शाम प्राणायाम की गुहार,
क्योकि बदल रहा है अब भारत अपना l

फ़ोन मोबाइल, डिजिटल इंडिया का प्लेटफार्म नवीन ,
प्रत्येक भारतीय की जेब में छोटे- बड़े मोबाइल हसीन ,
सोशल नेट वर्किंग का ताना बाना
कुछ करें इससे अर्जित ज्ञान ,
कुछ पायें इससे नौकरियों में स्थानl

डिजिटल इंडिया बने मेरा भारत ,
लेस्स कैश इकॉनमी से,
कैश लेस्स इकॉनमी की
ओर बढ़े मेरा भारत ,
सवा सौ करोड़ भारतीयों का ये ही सपना,
क्योंकि बदल रहा है अब भारत अपना l

प्राइवेट संस्थाओ की बढ़ती फीस ,
सरकारी स्कूलों में शिक्षा का गिरता स्तर ,
आई आई टी,एवं एन आई टी में डिजीटल क्लास रूम्स,
प्रवेश परीक्षा प्रोफेशनल कोर्सेस में ,
कोचिंग का दम ख़म,
बिजली आपूर्ति की पूर्ति हो जल्दी ,
ऐसा करने की ईमानदार कोशिश,
क्योंकि बदल रहा है अब भारत अपना l

राष्ट्रीय भ्रष्टाचारी स्कैम्स की घटती संख्या,
महिला वैज्ञानिकों की भागेदारी की बढ़ती संख्या ,
इसरो द्वारा 104 सेटेलाइट लॉन्च ,
का अभूतपूर्व सफल प्रदर्शन ,
भारत के गांव -में अब दरुस्त,
एवं चुस्त महिला प्रधान ,
क्योंकि बदल रहा है अब भारत अपना l
sukarma Rani Tharja
alumnus IITK-1986
[email protected]


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