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मां को जानना है तो मुनव्वर राना का काव्य पढ़िए...

मनीष कुमार श्रीवास्तव, चतुर्भुजपुर रायबरेली

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मां शब्द का नाम आते ही व्यक्ति को संपूर्णता प्राप्त हो जाती है। कविता और शायरी के माध्यम से आज के समय में मां का नाम आते ही बरबस मुनव्वर राना का नाम आखों के सामने छा जाता है। मां की अहमियत क्या है शब्दों में बयां नहीं हो सकती। अनेकों काव्य मां की महत्ता से भरे पड़े हैं, पर आज के समय में अगर सबसे पहले किसी का नाम आता है तो वह मुनव्वर राना का है। एक शेर है:

अभी ज़िंदा हैं मां मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा।
मैं जब घर से निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है।


राणा जी ने ग़ज़ल को महबूब से लाकर मां पर उतार दिया है जो शायद ही किसी ग़ज़लगो ने किया हो। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुनव्वर राणा के जन्म स्थान किला बाजार रायबरेली में स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में मेरी शिक्षा हुई। मुझे गर्व है कि मेरा जन्म भी रायबरेली में हुआ है जहां पर इतने महान शायर का जन्म हुआ। रायबरेली की इस पावन धरती पर अनेक साहित्यकारों ने जन्म लिया। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का नाम लिए बिना हिंदी साहित्य ही अधूरा है। उन्हीं के पावन भूमि पर राणा जी ने मां के बारे में इतना विशाल संग्रह लिखा है जो कि साहित्य की अमूल्य निधि है। आगे पढ़ें

वह लिखते हैं...

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