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मेरे अल्फाज़

खूबसूरत

डॉ. डी.डी.

1 कविता

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बहुत खूबसूरत होगा ताज,
मैं अक्सर सोचता हूं।
टूटता है भ्रम मेरा,
मगर जब तुझको देखता हूं।
न होगा खूबसूरत,
मैं ये तो नहीं कहता।
मगर हो खूबसूरत तुमसे,
ऐसा भी नहीं लगता।
मुझको तो यकीन है,
जिसने भी ताज बनाया होगा।
तुम्हारे रूप से ही कुछ नूर चुराया होगा।


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