आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   dil ki aarju

मेरे अल्फाज़

दिल की, आरजू पूरी हो सबकी

आकिब जावेद

162 कविताएं

730 Views
जुस्तजू है दिल की,आरजू पूरी हो सबकी!

मिल जाए, सबको वह सब, तमन्ना हो जिसकी!!

रहे साथ, सब मिलकर, इंसानियत हो सबकी !!!

मुखौटा न लगाए, अब दूसरा न कोई! 

सबका एक चेहरा, एक दिल पाक हो !!

सब साथ मिलकर, अपने देश को बढ़ाये !!

जात,धर्म, ऊंच-नीच से अपने को ऊपर उठाए !!!

मानवता के मार्ग पर नित नए कदम बढाए !!!

- आकिब

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!