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सरदार भगत सिंह (फाइल फोटो)

मुड़ मुड़ के देखता हूं

भगत सिंह का भाई कुलतार सिंह के नाम पत्र...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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सेंट्रल जेल लाहौर से सरदार भगत सिंह ने अपने छोटे भाई के नाम जो अंतिम पत्र लिखा वो इस प्रकार है- 

प्यारे कुलतार सिंह,
         आज तुम्हारी आंखों में आंसू देखकर बहुत रंज हुआ। आज तुम्हारी बातों में बहुत दर्द था। तुम्हारे आंसू हमें बर्दाश्त न हुए। प्यारे भाई हिम्मत से तालीम हासिल करते जाना और सेहत का ख़याल रखना। और क्या लिखूं हौंसला रखना, सुनो- 

      उसे यह फ़िक्र है हरदम नई तर्ज़-ए-ज़फ़ा क्या है 
      हमे यह शौक़ है देखें सितम की इंतेहा क्या है 

      दहर से क्यों ख़फा रहे, चर्ख़ का क्यों गिला करें 
      सारा जहां अदू सही औओ मुक़ाबला करें 

      कोई दम का मेहमां हूं अहले महफ़िल 
      चिरागे सेहर हूं बुझा चाहता हूं 

      आबो हवा में रहेगी, ख़याल की बिजली 
      ये मुश्ते खाक है फ़ानी रहे रहे न रहे 
      अच्छा खुश रहो अहले वतन हम तो सफ़र करते हैं 
      आनंद से रहना। 


                     तुम्हारा भाई- भगत सिंह         

साभार: क्रांतिवीर भगत सिंह 'अभ्युदय और भविष्य', संपादक- चमनलाल ( राजकमल प्रकाशन)
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