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आज का शब्द- ऊर्मिल और जयशंकर प्रसाद की कामायनी भाग -1 से चुनिंदा अंश

आज का शब्द

आज का शब्द- ऊर्मिल और जयशंकर प्रसाद की कामायनी भाग -1 से चुनिंदा अंश 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- ऊर्मिल, जिसका अर्थ है- लहरों से युक्त, जिसमें छोटी-छोटी लहरें या तरंगे उठती हों, तरंगित। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कामायनी भाग -1 से चुनिंदा अंश...

"किस गहन गुहा से अति अधीर
झंझा-प्रवाह-सा निकला
यह जीवन विक्षुब्ध महासमीर
ले साथ विकल परमाणु-पुंज।

नभ, अनिल, अनल,
भयभीत सभी को भय देता।
भय की उपासना में विलीन
प्राणी कटुता को बाँट रहा। आगे पढ़ें

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