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Mamta Kalia in amar ujala kavya shakhsiyat

शख़्सियत

शख़्सियत में इस बार मिलिए वरिष्ठ महिला साहित्यकार ममता कालिया से

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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काव्य के विशेष कार्यक्रम 'शख़्सियत' में इस बार मेहमान होंगी कलम के ज़रिए इबारतें लिखने वाली ममता कालिया। ममता कालिया का गद्य की हर विधा में एक सार्थक हस्तक्षेप है। उनकी कहानियां तो सामाजिक-विमर्श करती ही हैं उनके निबंध में भी गंभीर चिंतन है। इसके साथ ही उन्होंने भावों के महीन धागों को बुनते हुए कई कविताएं भी लिखीं। उनकी कविताओं में स्त्री चिंतन के स्वर मुखर होते हैं साथ ही जीवन की छोटी-छोटी चेष्टाओं के पुट भी हैं। उनका लिखा साहित्य उनकी संवेदनशीलता का स्पष्ट उदाहरण है। 

ममता कालिया का जन्म 2 नवम्बर 1940 को वृन्दावन में हुआ था। उनकी शिक्षा दिल्ली, मुंबई, पुणे समेत विभिन्न शहरों में हुई। साहित्य सृजन के गुर उन्हें अपने पिता विद्याभूषण अग्रवाल से मिले। वह आकाशवाणी में कार्यरत थे और अंग्रेजी व हिंदी साहित्य के विद्वान थे।

 

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