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बॉब डिलन

विश्व काव्य

कितने रास्ते तय करे आदमी कि तुम उसे इंसान कह सको - बॉब डिलन

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कितने रास्ते तय करे आदमी
कि तुम उसे इंसान कह सको?
कितने समन्दर पार करे एक सफ़ेद कबूतर
कि वह रेत पर सो सके ?
हां, कितने गोले दागे तोप
कि उन पर हमेशा के लिए पाबन्दी लग जाए?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है। आगे पढ़ें

कितने साल ज़िन्दा रह सकते हैं कुछ लोग कि उसके पहले उन्हें आज़ाद किया जा सके?

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