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martin carter poem in hindi

विश्व काव्य

मार्टिन कार्टर की कविता 'तुम्हारे हाथों को देखते हुए'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मार्टिन कार्टर (1927 -1997) कैरेबियन द्वीपसमूह के महत्वपूर्ण कवि हैं। वह भूख और ग़रीबी के कवि के रूप में जाने गए और राजनीति में भी सक्रिय रहे।

तुम्हारे हाथों को देखते हुए

नहीं!
मैं खामोश नहीं होऊंगा!
बहुत कुछ
हासिल करना है मुझे
अगर तुम देखते हो मुझे
किताबों को निहारते हुए या तुम्हारे घर आते हुए
या धूप में घूमते हुए
जान लो, आग की तलाश है मुझे!

मैंने सीखा है
किताबों से प्यारे बंधु
स्वप्नदर्शी जिंदा लोगों के बारे में
प्रकाशहीन कमरे में भूखे प्यासे रहते हुए
जो मर नहीं पाए,
क्योंकि मौत उनसे ज्यादा दीन थी
जो सपना देखने के लिए नहीं सोते थे, बल्कि दुनिया को
बदलने के सपने देखा करते थे।

और हां
अगर तुम देखते हो मुझे
तुम्हारे हाथों पर नजर डालते हुए
तुम्हारी बात सुनते हुए
तुम्हारे जुलूस में चलते हुए
तुम्हंे जान लेना चाहिए
मैं सपना देखने के लिए नहीं सोता,
बल्कि दुनिया को
बदलने के सपने देखा करता हूं।

यह अंधियारा समय है प्रिय

यह अंधियारा समय है प्रिय
हर जगह धरती पर रेंगते हैं भूरे झींगुर
चमकता सूरज छुप गया है
आकाश में कहीं
सुर्ख फूल दुख के बोझ से झुक गए हैं
यह अंधियारा समय है प्रिय
यह उत्पीड़न, डार्क मेटल के संगीत और आंसुओं का मौसम है।
बंदूकों का त्योहार है, मुसीबतों का उत्सव है
लोगों के चेहरे हैरान और परेशान हैं चहुंओर
कौन टहलता आता है
रात के घुप्प अंधेरे में?
किसके स्टील के बूट रौंद देते हैं नर्म घास को
यह मौत का आदमी है प्रिय,
अपरिचित घुसपैठिया
देख रहा है तुम्हें सोते हुए
और निशाना साध रहा है तुम्हारे सपने पर।

अनुवाद : सरिता शर्मा (हिंदी समय से)
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