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Nav varsh ka nishchaya

विश्व काव्य

नववर्ष का निश्चय

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नववर्ष के नूतन प्रभात में मेरा नव निश्चय प्रारम्भ करूंगा परित्याग परदेशी सामान समुच्चय।
स्वदेशी से स्वावलम्बन का होगा स्वपन साकार अवश्य।
नववर्ष के नूतन प्रभात में मेरा नव निश्चय।
स्वदेशी से स्वराष्ट्र सिद्ध सोने की चिड़िया स्वदेशी ने ही स्वराज का शोर्य शंख बजाया।
स्वदेशी से ही संभव है सशक्त सम्पन्न समाज
स्वदेशी से संस्कारित स्वाधीनता सदा सुरक्षित नहीं संशय।
नववर्ष के नूतन प्रभात में मेरा नव निश्चय।
विपदायें जब आये घिरकर अकाल सूखा भूकंप भयंकर।
बाढ़ से बेहाल प्रत्यक्ष काल असंख्य अनाथ बाल।
मां की गोद सा स्वदेशी नहीं कोई और आश्रय।
नववर्ष के नूतन प्रभात में मेरा नव निश्चय।
शिक्षा,साहित्य,संस्कार,हो स्वदेशी शिक्षण संस्थान।
परिधान,स्वास्थ्य संधान,मिले स्वदेशी परिवाद निदान।
स्वदेशी किसान स्वदेशी जवान,हो स्वदेशी अनुसंधान।
आओ करे स्वदेशी से प्राप्त निश्रेयष और अभ्युदय|
नववर्ष के नूतन प्रभात में मेरा नव निश्चय।


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