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विलियम बटलर येट्स की कविता: मिथ्यावादी जीभ की आग में जलते हुए

विश्व काव्य

विलियम बटलर येट्स की कविता: मिथ्यावादी जीभ की आग में जलते हुए

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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थके समय में थका हुआ दिल,
गलत और सही के जाल को तोड़ो;
दिल, फिर से हँसो धुन्धली साँझ में,
दिल, फिर से आह भरो, सुबह की ओस में ।

तुम्हारी मातृभूमि आयरलैण्ड हमेशा जवान है,
ओस हमेशा चमकती है और गोधूलि धूसर है;
हालाँकि आप निराश हो रहे हैं और प्यार घट रहा है,
मिथ्यावादी जीभ की आग में जलते हुए । आगे पढ़ें

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