Ayodhya Ram Mandir: 70 साल का संकल्प आज से लेगा आकार, 22-23 दिसंबर 1949 को रखी गई थी राम मंदिर मुद्दे की नींव

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Updated Wed, 05 Aug 2020 11:04 AM IST
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अयोध्या - फोटो : amar ujala

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भगवान राम की नगरी अयोध्या में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब रामलला के मंदिर की नींव रखेंगे तो उन आठ प्रमुख किरदारों का संकल्प भी आकार लेगा, जिन्होंने 70 साल पहले श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर राम के विशाल मंदिर का संकल्प लिया था।
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साथ ही, उनका संघर्ष भी एक नया आयाम लेगा, जिन्होंने प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका में होते हुए भी तथ्यों के आधार पर मंदिर का सपना देखने वाले किरदारों का साथ दिया। इस स्थान को लेकर संघर्ष तो 1528 में तब से चल रहा था, जब कहा जाता है कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर को बलपूर्वक तोड़कर मस्जिद बना दी थी।
वर्ष 1949 तक हिंदुओं ने इस स्थल की मुक्ति के लिए 76 युद्ध लड़े। इनमें कई लोग मारे गए। पर, जिस लड़ाई के बाद मंदिर निर्माण की शुरुआत होने जा रही है, उसकी पूरी पटकथा 22-23 दिसंबर, 1949 को अयोध्या में लिखी गई। संघर्ष तो इसके बाद भी हुए और 1990 में सुरक्षा बलों की गोलियों से कारसेवकों की मौत और 6 दिसंबर, 1992 को ढांचा ध्वंस जैसी घटनाएं भी घटीं, लेकिन सफलता 1949 में लिखी गई संघर्ष की पटकथा को ही मिली।

पहले पांच लोगों से हुई शुरुआत

ऑस्ट्रिया के पादरी ने वर्ष 1740-1785 तक 45 वर्ष के भारत भ्रमण वृत्तांत में करीब 50 पृष्ठों में अयोध्या का वर्णन किया। उन्होंने लिखा कि रामकोट में गुंबदों वाला ढांचा है, जिसमें 14 काले कसौटी के पत्थर के खंभे लगे हैं।

इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने अपने तीन भाइयों के साथ जन्म लिया। इस स्थान पर बने मंदिर को बाबर ने तुड़वाया। पादरी की डायरी की पंक्तियों और इस स्थान पर लगे कसौटी पत्थर के खंभों के जिक्र से पांच लोगों के दिल में इस स्थल की मुक्ति का सपना हलचल मचाने लगा। ये पांच लोग थे, गोरखपुर पीठ के महंत दिग्विजय नाथ, अयोध्या के महंत अभिराम दास, बाबा राघव दास, रामचंद्र परमहंस और हनुमान प्रसाद पोद्दार।

पोद्दार वही हैं जिन्होंने हिंदू धर्मग्रंथों को सरल भाषा और सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए गीता प्रेस गोरखपुर की स्थापना की। वरिष्ठ पत्रकार सर्वेश सिंह बताते हैं कि इन्हीं पांच लोगों ने 22 दिसंबर 1949 की रात सरयू में स्नान कर संबंधित स्थल पर बालस्वरूप श्रीराम की मूर्ति की पूजा कर प्राण प्रतिष्ठा की।
 

जुड़ गए तीन और किरदार...

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