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मध्यप्रदेश: आपका बच्चा 12 साल से छोटा तो माता-पिता को तुरंत लगेगा टीका, सीएम शिवराज का एलान

मध्यप्रदेश: करीब 3000 जूनियर डॉक्टरों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिन पहले हड़ताल पर गये प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों को 24 घंटे में काम पर वापस लौटने के बृहस्पतिवार को दिए आदेश के कुछ घंटों बाद ही करीब 3,000 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया।

मध्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) के अध्यक्ष अरविंद मीणा ने बताया कि प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों के करीब 3,000 जूनियर डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को अपने-अपने मेडिकल कॉलेजों के डीन को सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तीसरे वर्ष के जूनियर डॉक्टर्स के इनरोलमेंट रद्द कर दिए हैं। इसलिए अब हम परीक्षा में कैसे बैठेंगे।

मालूम हो कि स्नातोकत्तर (पीजी) कर रहे जूनियर डॉक्टर्स को तीन साल में डिग्री मिलती है, जबकि दो साल में डिप्लोमा मिलता है।

मीणा ने कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए हम जल्द ही उच्चतम न्यायालय में जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन एवं फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन भी हमारे साथ आ रहे हैं।

इससे कुछ ही घंटे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक तथा न्यायमूर्ति सुजय पॉल की युगलपीठ ने प्रदेशव्यापी शासकीय जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध करार देते हुए जूनियर डॉक्टरों को 24 घंटों में काम पर लौटने के आदेश देते हुए कल (शुक्रवार) दोपहर ढाई बजे तक काम पर वापस लौटने का निर्देश दिया था।

अदालत ने कहा कि निर्धारित समय सीमा पर जूनियर डॉक्टर हड़ताल समाप्त कर काम पर नहीं लौटते हैं तो राज्य सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

युगलपीठ ने कोरोना महामारी काल में जूनियर डॉक्टर के हड़ताल पर जाने की निंदा की है। उन्हें कहा है कि विपत्तिकाल में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल को किसी प्रकार से प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता है।

सिविल लाइन जबलपुर निवासी अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह की तरफ से जूनियर डॉक्टर की प्रदेशव्यापी हड़ताल के खिलाफ उच्च न्यायालय में आवेदन दायर किया गया था।

इसी बीच, मध्य प्रदेश के आयुक्त चिकित्सा शिक्षा निशांत वरवड़े ने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स की समस्याओं के निराकरण के संबंध में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग कई बार उनके प्रतिनिधियों से चर्चा कर चुके हैं। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने मांगों के सकारात्मक समाधान के लिए अनेक कदम भी उठाए हैं।
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मप्र: मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत का कारण ही नहीं, कोरोना पीड़ितों की मदद कैसे करेंगे शिवराज?

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले अरविंद (परिवर्तित नाम) ने कोरोना महामारी के दौरान अपने माता-पिता दोनों को गंवा दिया। सीएम शिवराज की ओर से जारी आर्थिक मदद के एलान के चलते वह प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचा, लेकिन उसे वापस लौटा दिया गया। अरविंद से कहा गया कि उसके अभिभावकों के मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत की वजह कोरोना से होने की बात नहीं लिखी है। ऐसे में उसे मुआवजा नहीं मिल सकता। बता दें कि अरविंद के पास अपने माता-पिता की कोरोना रिपोर्ट है, जिसमें उनके संक्रमित होने की जानकारी है। वहीं, अस्पताल की ओर से मिले कागजात पर भी मौत की वजह कोरोना से होने की बात लिखी है, लेकिन सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी प्रमाण पत्र पर मौत की वजह नहीं है। मध्यप्रदेश में मुआवजे के लिए परेशान होने वालों में अरविंद अकेला नहीं है, बल्कि उसकी तरह तमाम बेसहारा बच्चों को इस तरह की दिक्कत से जूझना पड़ रहा है।
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मध्यप्रदेश : 11 जिलों में हो सकती है भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि दक्षिण पश्चिम मानसून अपने सामान्य समय से सात दिन पहले बृहस्पतिवार को मध्यप्रदेश में पहुंच गया। भोपाल मौसम विभाग ने प्रदेश के 11 जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट तथा 2 दर्जन जिलों में भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी किया है।

बता दें कि मौसम विभाग, भोपाल के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक पी. के. साहा के मुताबिक एक दिन पहले ही भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित राज्य के कई हिस्सों में बारिश हुई है। मानसून की उत्तर सीमा मध्यप्रदेश के बैतूल और मंडला जिलों से होकर गुजरती है। इसके साथ ही राज्य के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंच गया है। आमतौर पर, मानसून का आगमन मध्यप्रदेश में 17 जून को होता है।

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में मॉनसून शहडोल, जबलपुर, होशंगाबाद संभाग में अधिकांश स्थानों पर पहुंच गया है। इसके साथ ही भोपाल, सागर, रीवा, ग्वालियर संभाग में कुछ स्थानों पर कहीं-कहीं बारिश हुई है। चंबल और उज्जैन संभाग में मौसम शुष्क रहा।

विभाग ने कहा कि इस दौरान प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर छह से 10 सेमी. बारिश दर्ज की गई। विभाग की ओर से ऑरेंज और यलो अलर्ट भी जारी किया गया है।

इन 11 जिलों के लिए है ऑरेंज अलर्ट 
विभाग ने 12 जून के लिए अनूपपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, सागर, सीहोर, होशंगाबाद, बैतूल, देवास कुल 11 जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां भारी बारिश, बिजली चमकने/गिरने के साथ ही 30 से 40 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

इन स्थानों के लिए यलो अलर्ट जारी
वहीं दूसरी ओर विभाग ने रीवा, इंदौर, ग्वालियर, चंबल, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, विदिशा, रायसेन, भोपाल, राजगढ़, हरदा, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, नीमच और मंदसौर के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। यहां गरज के साथ बिजली चमकने/गिरने और 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के लिए यहां
क्लिक करें।
 
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बारिश बारिश

भोपाल: दिग्विजय सिंह समेत 30 के खिलाफ केस दर्ज, पेट्रोलियम मूल्यवृद्धि के खिलाफ किया था प्रदर्शन

पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के खिलाफ बृहस्पतिवार को भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोविड गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन किया। इसे लेकर भोपाल पुलिस ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत 30 लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 188 और 145 के तहत केस दर्ज किया है। 



भोपाल के एएसपी अंकित जायसवाल ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। भोपाल की टीटी नगर पुलिस ने यह केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है प्रदर्शनकारियों ने कोविड गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है। इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वीडियोग्राफी के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी महंगाई को लेकर प्रदर्शन कर किया था। प्रदर्शन में युकां प्रदेशाध्यक्ष विक्रांत भूरिया समेत कई नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे। इसमें भी कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। इस मामले में नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। 
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मध्यप्रदेश: कैबिनेट बैठक में सीएम शिवराज और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा आमने-सामने, जानें क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश में भाजपा की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है। इसी सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक में सियासी नजारा दिखने को मिला। कैबिनेट बैठक में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नर्मदा घाटी विकास योजना में बजट से ज्यादा छूट देने के प्रस्ताव का विरोध किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में जिस तरह नरोत्तम मिश्रा ने परियोजनाओं को सरकारी छूट दिए जाने पर आपत्ति जताई वह हैरान करने वाली घटना थी, पहली बार मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस मुद्दे पर आमने-सामने दिखे।
 
दरअसल, कोरोना के बाद पहली बार भोपाल में सभी मंत्री वल्लभ भवन में बैठक करने आए थे। कोरोना के चलते पिछले कई महीनों से वर्चुअल कैबिनेट बैठक हो रही थी। बैठक में नर्मदा घाटी विकास योजना के 8800 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट को बजट से ज्यादा छूट देने का प्रस्ताव आया । इस पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विरोध करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं में बांध नहीं बने हैं, लेकिन पाइप पहले ही डाले जा रहे हैं। यह समझ से परे है।

सरकार सीमा से ज्यादा छूट देने पर क्यों सोच रही
नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जब कोरोना संकट के दौरान सारे विभागों के बजट में कटौती की जा रही है तो इस विभाग को सरकार सीमा से ज्यादा छूट देने पर क्यों  सोच रही है। हालांकि बैठक में  कुछ दूसरे मंत्रियों ने कहा कि इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी जानी चाहिए, जिसपर मिश्रा ने कहा कि इस पर उनका विरोध दर्ज किया जाए। वह इसके पक्ष में कतई नहीं हैं। मिश्रा के तेवर देख सभी मंत्री हैरान थे। हालांकि कुछ मंत्री गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ थे, तो कुछ उनके खिलाफ में आवाज उठाए। 

बैठक में नरोत्तम मिश्रा के विरोध करने पर भी शिवराज सिंह चुपाचाप बैठे रहे
इतना ही नहीं गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस मामले पर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस से भी जवाब तलब किया। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चुपचाप बैठे रहे और मिश्रा बैठक से उठकर सीधे भाजपा दफ्तर पहुंचे और और संगठन मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखी। हालांकि बाद में ये सारे प्रस्ताव पारित कर दिए गए।

कांग्रेस सरकार गिराने में नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका
दरअसल, पिछले कुछ समय से शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा के बीच मनमुटाव चल रहा है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिराने के पीछे दतिया विधायक नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका बताई जा रही थी। नरोत्तम मिश्रा और उनके करीबियों क मानना है कि प्रदेश में भाजपा सरकार भले ही सत्ता में आ गई, लेकिन उनका हक नहीं मिला। यही वजह है कि कुछ दिनों पहले उनकी कैलाश विजयवर्गीय, प्रभात झा और प्रह्लाद पटेल से बैठकों की तस्वीरें सामने आई थी उन्होंने इसे सामान्य मेल मुलाकात कहा था।
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सियासत: सिंधिया ने जितिन प्रसाद को बताया छोटा भाई, भाजपा में शामिल होने पर किया स्वागत

भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जितिन प्रसाद को अपना छोटा भाई बताते हुए बुधवार को भाजपा में शामिल होने के उनके निर्णय का स्वागत किया।

सिंधिया ने प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के फैसले का स्वागत करते हुए यहां संवाददाताओं से कहा कि मैं बहुत खुश हूं, वह मेरे छोटे भाई हैं। सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा के नेतृत्व में देश विकास के मामले में आगे बढ़ रहा है।

इससे पहले बुधवार को दिल्ली में भाजपा कार्यालय में प्रसाद (47) भाजपा में शामिल हुए। प्रसाद के गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश में इससे भाजपा को ताकत मिलने की उम्मीद बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

संयोग से, सिंधिया और प्रसाद दोनों अलग-अलग समय पर राजनीतिक तौर पर अहम माने जाने वाले उत्तर प्रदेश के मामलों के कांग्रेस में प्रभारी थे। सिंधिया मार्च 2020 में अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

सिंधिया ने बुधवार को यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा और नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह से मुलाकात की। सिंधिया ने शर्मा के आवास पर आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं के साथ भोजन किया और इसके बाद चौहान के साथ उनके निवास पर बैठक की। यह बैठक लगभग एक घंटे से अधिक समय तक चली।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर सिंधिया ने कहा कि मैं केवल लोगों के सेवा की परवाह करता हूं और मैं लोगों से जुड़े रहना चाहता हूं।
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बड़ी खबर: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ में कोरोना वायरस के लक्षण, मेदांता में हुए भर्ती

ज्योतिरादित्य सिंधिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कमलनाथ पिछले दो दिनों से सर्दी-बुखार से पीड़ित हैं। उनमें बुखार के अलावा कोरोना संक्रमण के अन्य लक्षण भी दिखे हैं। कमलनाथ सुबह 10 बजे मेदांता अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचे, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने को कहा। 

इंदौर में लिफ्ट हादसे से बिगड़ी थी तबियत
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी महीने में इंदौर के एक निजी अस्पताल में लिफ्ट गिरने के हादसे में कमलनाथ बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उस सदमे की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल में ही ब्लड प्रेशर चेक कराया गया था। जहां ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था।




2018 में सीएम बने थे कमलनाथ
मध्यप्रदेश में साल 2018 में हुए विधासभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिली थी। कांग्रेस क वरिष्ठ नेता कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन पार्टी में बगावत के एक साल बाद ही कांग्रेस की सरकार प्रदेश में गिर गई। उसके बाद सीएम शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार की राज्य में वापसी हुई। 

हनीट्रैप मामले में कमलनाथ पर एसआईटी का शिकंजा
बता दें कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश में हनीट्रैप का मामला जोरों पर था। इसमें कमलनाथ भी कटघरे में आ गए थे। एसआईटी ने नोटिस जारी कर पेन ड्राइव की मांग की थी। दरअसल, कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार की महिला मित्र ने आत्महत्या कर ली थी, इस मामले में उमंग सिंघार पर केस दर्ज हुआ था। उसके बाद कमलनाथ ने उमंग सिंघार का बचाव करते हुए कहा था कि उनके पास भी भाजपा नेताओं के हनीट्रैप की पेन ड्राइव है। इस मामले पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कमलनाथ की निंदा की थी। इसी सिलसिले में एसआईटी ने उनपर शिकंजा कसा था।
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सियासत: एमपी भाजपा ने जाति लिख जारी की कार्यसमिति सदस्यों की लिस्ट, 10 मिनट में सुधारी गलती

मध्यप्रदेश: सीएम शिवराज के ओएसडी नहीं बनेंगे तुषार पांचाल, खुद ट्वीट करके दी जानकारी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज के ओएसडी तुषार पांचाल को लेकर शुरू हुए सियासी घमासान के अब थमने के आसार लग रहे हैं। दरअसल, तुषार ने खुद ही ओएसडी बनने से इनकार कर दिया है। माना जा रहा है कि विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों के मुद्देनजर तुषार ने यह फैसला किया। बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुषार पांचाल को अपना नया ओएसडी नियुक्त किया था, जिसका आदेश सोमवार (7 जून) रात जारी किया गया। 

गौरतलब है कि तुषार मुंबई के रहने वाले हैं और साल 2015 से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सोशल मीडिया संभाल रहे हैं। उन्हें संविदा के आधार पर ओएसडी नियुक्त किया गया था। तुषार को यह जिम्मेदारी मिलते ही मध्यप्रदेश में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया था। 
 

तुषार के ओएसडी बनते ही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेर लिया। इसके बाद कांग्रेस ने तुषार के कुछ पुराने ट्वीट शेयर कर दिए, जिनमें उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ लिखा था। कांग्रेस ने लिखा था कि शिवराज ने छेड़ी मोदी के खिलाफ जंग। मोदी के घोर विरोधी को बनाया ओएसडी। सोशल मीडिया पर मोदी की खिल्ली उड़ाने, उनके कद को छोटा करने और बीजेपी के सिद्धांतों पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले को शिवराज ने अपना ओएसडी बनाया है।




बता दें कि तुषार सीएम शिवराज के साथ 2015 से जुड़े हुए हैं। 2018 में विधानसभा चुनाव के अभियान की जिम्मेदारी भी तुषार के पास ही थी। 18 महीने के लिए मध्यप्रदेश में जब भाजपा सत्ता से बेदखल हुई, तब तुषार ही शिवराज का सोशल मीडिया संभाल रहे थे। उस दौरान वह कमलनाथ के खिलाफ अभियान चला रहे थे। इसके बाद शिवराज चौथी बार सत्ता में लौटे तो तुषार पंचाल भी उनके साथ थे।
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भोपाल: दो ट्रांसफार्मर फैक्ट्री में लगी भीषण आग, सिलेंडरों में ब्लास्ट, उपकरण स्वाहा 

मध्यप्रदेश के भोपाल में अशोका गार्डन थाना क्षेत्र के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में दो ट्रांसफार्मर फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि दो से ढाई घंटे में ही जलकर स्वाहा हो गई। फैक्ट्री में खड़े ऑयल के टैंकर और गैस के सिलेंडर से आग और तेजी से फैली। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड, निगम, भेल के 20 से ज्यादा फायर टेंडर मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। आग लगने का अभी कोई कारण पता नहीं चल पाया है। 

जानकारी के अनुसार गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में वेस्टर्न ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री और अवध ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री अगल-बगल में ही हैं। दोनों में ट्रांसफार्मर बनाने का काम होता है। मंगलवार रात 9.30 बजे के करीब वेस्टर्न ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री में आग लग गई और देखते ही देखते आग तेजी से भड़क गई। इसके बाद आग ने फैक्ट्री में रखे गैस के सिलेंडर और परिसर में खड़े आयल के टैंकर को अपने चपेट में ले लिया।

इसके बाद सिलेंडरों और टैंकरों में ब्लॉस्ट होने लगे। देखते ही देखते आग ने बगल की अवध ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयानक थी कि दो से ढाई घंटे मे दोनों ही फैक्ट्री धूं धूं कर पूरी तरह से जल गई। आग पर काबू पाने के लिए फायर विभाग, नगर निगम, भेल के फायर टैंडर और पानी के टैंकर मौके पर पहुंचे। आग लगने का अभी कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाया है।

आग की सूचना के बाद मौके पर मंत्री विश्वास सारंग, भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया समेत कई अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
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मध्यप्रदेश:  शिवराज सरकार की अनोखी पहल, मजदूरों के लिए अलग से लगेंगे कोविड टीकाकरण शिविर

कोविड-19 महामारी रोकथाम के मद्देनजर मध्यप्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों (बीपीएल) के लिए विशेष टीकाकरण अभियान आयोजित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सबसे पहले इंदौर से विशेष टीकाकरण शिविर लगाने का फैसला किया है।

राज्य के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इस बाबत जानकारी देते हुए कहा कि इंदौर समेत सूबे के सभी जिलों में विशेष टीकाकरण शिविर लगाए जाएंगे, जिसके तहत मजदूरों, घरेलू नौकरों, धोबी, सैलून कर्मचारियों और लोगों के सीधे संपर्क में आने वाले अन्य लोगों को कोविड वैक्सीन का अलग से टीका लगाया जाएगा।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने रविवार को इस आशय के निर्देश जारी किए। तुलसीराम राज्य औद्योगिक केंद्र, इंदौर जिले के प्रभारी भी हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने मजदूरों के लिए विशेष कोविड-19 टीकाकरण शिविर आयोजित करने का फैसला लिया है।

हालांकि विज्ञप्ति में इस तरह के शिविर शुरू करने की तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है। इसमें कहा गया कि टीकाकरण अभियान में विविधता लाने के उद्देश्य से, मंत्री ने विशेष शिविर आयोजित करके लोगों के सीधे संपर्क में आने वालों के टीकाकरण की सुविधा के लिए पहल की है।

विज्ञप्ति में कहा गया, ‘ये शिविर प्राथमिकता के आधार पर सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक मजदूरों, घरेलू नौकरानियों, धोबी, सैलून कर्मियों, पुजारियों, पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसी के कर्मचारियों के लिए आयोजित किए जाएंगे।’ मंत्री ने मजदूरों के लिए ‘लेबर चौक’ (जहां मजदूर आम तौर पर इकट्ठा होते हैं) पर भी टीकाकरण शिविर आयोजित करने और स्थल पर आराम करने के लिए पीने के पानी और छाया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आश्रय गृहों में रहने वालों को भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा विज्ञप्ति में कहा गया कि ऑडियो सिस्टम वाले वाहनों का उपयोग पूरे जिले में कोविड-19 दिशा-निर्देशों के पालन के संदेश को फैलाने के लिए किया जाना चाहिए है।
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