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भारतीय कंपनियों के लिए अच्छा समय, अवसर बढ़ेः अनिल राय गुप्ता, चेयरमैन व सीईओ, हेवल्स ग्रुप

अभिषेक यादव, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Jan 2020 05:13 PM IST
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अजय राय गुप्ता, चेयरमैन, हेवल्स ग्रुप
अजय राय गुप्ता, चेयरमैन, हेवल्स ग्रुप - फोटो : SELF
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करीब छह दशक पहले दिल्ली के भगीरथ पैलेस में एक स्कूल टीचर कीमत राय गुप्ता ने बिजली के सामान की दुकान शुरू की। समय के साथ उन्होंने हेवल्स इंडिया कंपनी में बदला जो विभिन्न उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए आज न केवल भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली कंपनी बन चुकी है, विश्व के कई देशों में फैली है। वहीं कीमत राय के पुत्र और कंपनी के चेयरमैन व सीईओ अनिल राय गुप्ता इसके जरिए मल्टीनेशनल कंपनियों से भारत में कड़ा मुकाबला कर रहे हैं। अमर उजाला ने उनसे भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्योगों से लेकर खुद उनके विषय में रोचक बातचीत की। जानिए उन्होंने इन विषयों पर क्या-क्या कहा।
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प्रश्न: इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेस के क्षेत्र में एक भारतीय कंपनी को प्रतिष्ठित ब्रांड बनकर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से टक्कर लेने के लिए क्या तैयारियां करनी होती हैं?
कुछ अलग नहीं करना होता, लेकिन परिस्थितियां और अवसर मायने रखते हैं। आज भारतीय कंपनियों के लिए आगे बढ़ने के रास्ते में पुरानी बाधाएं लगातार कम हो रही हैं। बीते 15 वर्षों में कई मूल चुनौतियां खत्म हुई हैं, जैसे आज बाजार में पूंजी है, उत्पादन में क्वालिटी है, तकनीक के शोध और विकास (आर एंड डी) में निवेश हो रहा है। यह सब हमें अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के सामने खड़ा करने में मदद कर रहा है।
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था के वृद्धि के अनुमान घटा रही हैं, दूसरी ओर कई भारतीय व विदेशी कंपनियां भारत में अपना काम बढ़ा भी रही हैं, आपके अनुभव में क्या ऐसा करने का यह सही समय है?
आर्थिक विकास दर में कमी की जो बात कही जा रही है, कई उद्यमी उसमें भी अवसर देख रहे हैं। दरअसल उद्यमी को सर्वाइव करने के लिए लंबे समय के विजन के साथ काम करना होता है, हमने 2007-08 की मंदी भी देखी है। वहां चुनौतियों के बावजूद कई कंपनियों ने खुद को स्थापित किया। मैं हमेशा से मानता आया हूं कि भारत संभावनाओं से भरा हुआ है। हमारी प्रगति को रोक पाना असंभव है। सौभाग्य की बात है कि मुझे यहां काम करने अवसर मिल रहा है, और यकीनन यहां सभी के लिए काफी अवसर हैं।

प्रश्न: भारतीय उपभोक्ताओं के जेहन में जगह बनाना कितना मुश्किल है और आपने ऐसा क्या किया जो सफल रहा?
भारतीय उपभोक्ताओं के मन में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए अच्छी छवि और प्रतिष्ठा की जरूरत होती है। यह तभी बनते हैं, जब आप लोगों के विश्वास को हासिल कर पाते हैं। किसी कंपनी की पहचान बनने वाला ब्रांड होने के लिए भी यही सच है। हमें लगता है इसी में हमें सफलता मिली।

प्रश्न: उद्यमी में कौनसे गुण जरूर होने चाहिए? क्या जोखिम उठाने की आदत डाल लेनी चाहिए?
हर उद्यमी में दो गुण जरूर होने चाहिए, धैर्य और साहस। धैर्य उसे अपने मूल्यों और सही विजन में विश्वास रखना सिखाएगा और साहस जोखिम लेने में मदद करेगा। लेकिन मैं यह भी साफ कर दूं कि जोखिम कभी अंधेरे में रहकर नहीं लिया जाता। युवा और भावी उद्यमियों को सुझाव देना चाहूंगा कि जोखिम हमेशा नपा-तुला होता है। आपको पता होना चाहिए कि विफल होने पर कितना नुकसान होगा। नुकसान ऐसा न हा कि सब कुछ खत्म हो जाए।

प्रश्न: बीते वित्त वर्ष हेवल्स का रेवेन्यू 21 फीसदी बढ़ा, कंपनी को कहां पहुंचाने का लक्ष्य हैं?
देखिए यह कहना आसान होता है कि एक वर्ष में रेवेन्यू काफी बढ़ा, लेकिन यह सब रातों-रात या एक साल में नहीं होता। थोड़े समय में मिली सफलता, थोड़े ही समय में खत्म भी हो जाती है। एक उद्यमी की असली सफलता के पीछे 20-25 वर्षों की मेहनत होती। हम कई बार असफल होते हैं, उनसे सीख लेते हैं। आगे भी यही प्रयास होगा।

प्रश्न: जीरो से शुरू करने में, जैसा आपके पिता ने किया, एक उद्यमी के लिए क्या दिक्कतें आती हैं?
हमारी ही नहीं, कई उद्यमियों की कहानी लगभग जीरो कैपिटल से शुरू हुई है। सबसे बड़ी दिक्कत मूल्यों के पालन की होती है, यही आपकी परीक्षा भी होती है। इस पर आप खरे उतरते हैं तो सफल रहते हैं। मुझे लगता है कि मेरे पिता कीमत राय गुप्ता ने जिस तरह इन मूल्यों का पालन करते हुए अपने काम को बढ़ावा, उसी वजह हेवल्स इंडिया आज उस मुकाम पर पहुंची जहां आप देख रहे हैं।

प्रश्न: अपने पिता के किसी कारोबारी निर्णय पर आप कभी असहमत हुए? आज उन निर्णयों को किस प्रकार देखते हैं?
मैं जो बन पाया, वह पिता से मिले आदर्शों की वजह से। उन्हें अपने सपनों के लिए कठोर परिश्रम करते देखा है, मूल्यों का पालन करते देखा है, यह सब महसूस किया है। उनसे असहमति की कोई बात नहीं है। एक उद्यमी अगर कई निर्णय लेता है तो उसमें कुछ गलत हो सकते हैं, बेहतर उद्यमी वही है जो इन गलतियों को सुधारे।

प्रश्न: आप आज भी पढ़ते-सीखते हैं?
गांधीजी ने कहा था कि आखिरी समय तक सीखते रहना चाहिए। अगर सीखना बंद कर देंगे तो अपने काम को बेहतर कैसे कर पाएंगे? व्यक्ति अगर सीखना बंद कर देगा तो उनकी क्षमताएं खत्म होने लगेंगी।

प्रश्न: अगले पांच से 15 वर्षों में कौनसी तकनीकें इंडस्ट्री पर प्रभाव डालेंगी, आप इस दिशा में क्या तैयारियां कर रहे हैँ?
दुनिया और तकनीकें तेजी से बदल रही है, इनके प्रति उद्यमियों को सजग रहना चाहिए। हमारे लिए इस समय इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पर काम करना सबसे जरूरी हो गया है। अगले तीन वर्षों में हम देखेंगे कि मोबाइल फोन में मौजूद एक एप्लीकेशन हमारे टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, लाइट, गीजर, एसी, सभी नियंत्रित कर रहा है। हमने इस दिशा में काम शुरू किया है। कुछ प्रोडक्ट बाजार में उतारे हैं।

प्रश्न: कंपनी और परिवार को कैसे बैलेंस करते हैं?
किसी के भी लिए उसका परिवार सबसे महत्वपूर्ण होता है और कंपनी या कहें काम, दूसरा परिवार है। अगर कर्मचारी के परिवार में सब ठीक है तो वह दूसरे परिवार में वह बढ़िया ढंग से काम करेगा। कुछ मनमुटाव सभी जगह होते हैं, चूंकि परिवार के सदस्यों को पता होता है कि उन्हें साथ ही रहना है तो वे इन मन-मुटावों को भूल कर बड़े लक्ष्य यानी परिवार को मजबूत बनाने पर काम करते हैं।

प्रश्न: अशोका यूनिवर्सिटी अनूठा प्रयोग है, आप इसके संस्थापकों में शामिल हैं, इसके लक्ष्य क्या थे और क्या हासिल किया गया?
हम महसूस कर रहे थे कि हमारी उच्च शिक्षण व्यवस्था में कुछ बदलाव होना चाहिए, नए विकल्प आने चाहिए। अशोका यूनिवर्सिाटी यही प्रयास है। लिबरल आर्ट्स के जरिए हम समाज को कुछ बेहतर देने का प्रयास कर रहे हैं। 100 से अधिक परोपकारी संस्थाएं व व्यक्ति इसके लिए साथ काम कर रहे हैं। यहां 40 प्रतिशत मेधावी विद्यार्थियों का खर्च भी संस्थान उठा रहा है।

5 टेक-अवे कथन

  • थोड़े समय में मिली सफलता, थोड़े ही समय में खत्म हो जाती है
  • पहचान बनाने के लिए प्रतिष्ठा बनानी होती है
  • जोखिम हमेशा नपा-तुला होता है, पता होना चाहिए कि विफल हुए तो कितना नुकसान होगा
  • अगर सीखना बंद कर देंगे तो क्षमताएं खत्म होने लगेंगी
  • उद्यमी में दो गुण जरूर होने चाहिए, धैर्य और साहस
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