दिल्ली हिंसा: अगर वक्त पर लग गया होता कर्फ्यू तो इतनी जानें नहीं जाती

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली   Updated Tue, 25 Feb 2020 07:08 PM IST
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delhi police - फोटो : अमर उजाला

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दिल्ली के आधा दर्जन से ज्यादा इलाकों में हुई हिंसा में दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबर आ रही है।पुलिस कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में लगाई गई धारा 144 जब पूरी तरह फेल हो गई तो कर्फ्यू क्यों नहीं लगाया गया। दिल्ली पुलिस के पास तमाम तरह की जानकारी थी।
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पुलिस के एक अधिकारी ने अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की मांग की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।उसके बाद भी मौके पर उपद्रवी खुलेआम घूमते रहे। पुलिस मुख्यालय में तैनात स्पेशल सीपी स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को जब दंगों की शुरुआत हुई तो उसी वक्त उन इलाकों में अगर कर्फ्यू लगा दिया जाता तो हालात काबू से बाहर नहीं जाते। जिस दौरान यह हिंसा हुई, उस वक्त पुलिसकर्मियों की संख्या कहीं पर पचास थी तो कहीं सौ रही। दूसरी ओर, उपद्रवियों की संख्या हजारों में थी। उनके पास हथियार भी थे। वे लगातार पथराव करते रहे।
सोमवार को यह पता चल चुका था कि धारा 144 का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है तो उसी वक्त हिंसाग्रस्त इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजकर कर्फ्यू लगा देना चाहिए था। यहां बता दें कि दिल्ली में केंद्रीय अर्धसैनिक बल पर्याप्त संख्या में मौजूद थे, लेकिन सभी जगह पर उनकी तैनाती नहीं की गई।
रविवार को दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा हुई।सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। हिंसा की जो तीव्रता थी, दिल्ली पुलिस ने उसे धारा 144 के जरिए नियंत्रित करने का प्रयास किया। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार, पुलिस को मालूम था कि उपद्रवियों पर धारा 144 का कोई असर नहीं हो रहा। सोमवार सुबह भजनपुरा, चांदबाग, जाफराबाद, गोकुलपुरी और मौजपुर में कुछ जगहों पर तो हालात इतने बिगड़ चुके थे कि वहां जाने के लिए पुलिस हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। इसकी वजह थी, अपर्याप्त पुलिस बल।

बड़े अधिकारियों ने पुलिस बल को उपद्रवियों पर गोली चलाने का आदेश तो दे दिया, मगर कर्फ्यू के बारे में किसी ने नहीं सोचा। यदि रविवार की रात को उक्त इलाकों में 50 कंपनियां भी तैनात कर दी जाती तो वहां कर्फ्यू लगाया जा सकता था। जब किसी को घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं मिलती तो हिंसा का तांडव भी टाला जा सकता था। सोमवार को दिन में जब हिंसा का असली तांडव हुआ तो भी कर्फ्यू नहीं लगाया गया। दिल्ली पुलिस को मालूम था कि हिंसा में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैंकड़ों घायल हो चुके हैं। इसके बावजूद मंगलवार को गृह मंत्रालय की बैठकों का इंतजार किया गया।
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