वार्निंग का रोमांच रोंगटे खड़े कर देगा

अमर उजाला मुंबई/रवि बुले Updated Wed, 25 Sep 2013 09:33 AM IST
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इस शुक्रवार एक अनोखी फिल्म 'वार्निंग' रिलीज होनी वाली है। कैसी है ये फिल्म इसे खुद बता रहे हैं इस फिल्म के निर्माता।
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बनारस में रहे और अलीगढ़ में पढ़े अनुभव सिन्हा का प्रोडक्शन हाउस है बनारस मीडिया वर्क्स। इस शुक्रवार को वे निर्माता के रूप में अपनी पहली फिल्म लेकर आ रहे हैं ‘वार्निंग’।
तुम बिन, दस और रा.वन जैसी फिल्मों के निर्देशक अनुभव का निर्माता के रूप में कैसा रहा अनुभव और भविष्य में क्या है उनकी योजनाएं।
फिल्म इंडस्ट्री में आपको बीस साल हो चुके हैं। निर्देशक के बाद निर्माता के रूप में पारी शुरू कर रहे हैं?

मैंने पिछले दस साल में मात्र छह फिल्मों का निर्देशन किया, जबकि मेरे पास कई आइडिये हैं जिन्हें दर्शकों तक पहुंचाना चाहता हूं। ऐसे में मैंने महसूस किया कि जो मैं सोचता हूं उसे पर्दे पर उतारने में वक्त लगता है तो क्यों न उन लोगों के साथ काम करूं जो मेरी तरह सोचते हैं।

उनके आइडिये में अपनी भागीदारी निर्माता के रूप में करूं। अपनी फिल्में बनाता रहूं, लेकिन नए लोगों को प्लेटफॉर्म दूं। कुछ टीवी सीरियल और म्यूजिक एलबम पहले प्रोड्यूस कर ही चुका था।

फिल्म निर्माता के रूप में पहला अनुभव कैसा रहा?

बहुत मजा आया। ‘वार्निंग’ रिलीज होन जा रही है। ‘गुलाब गैंग’ की शूटिंग हो चुकी है। दो फिल्मों पर और काम चल रहा है। निर्माता के रूप में बस मैं इतना ही डर रहा था कि निर्देशक भी होने के नाते कहीं मैं दूसरे निर्देशकों के काम में हस्तक्षेप न कर बैठूं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आपने खुद को दूसरे निर्देशक के काम में हस्तक्षेप करने से बचाया, यह कैसे संभव हुआ?

यह ऐसे हुआ कि मैंने खुद से कहा, मुझे निर्माता के विजन से फिल्म नहीं बनानी है। मुझे उस नजरिये से फिल्म बनानी है जो मेरा निर्देशक चाह रहा है। मैं उसके विजन में विश्वास करूंगा। जब मैंने यह बात समझ ली तो मेरा काम आसान हो गया।

‘वार्निंग’ को बनाने का फैसला कैसे लिया?

यह कहानी प्रधान फिल्म नहीं है। यह अनुभव प्रधान फिल्म है। कहानी तो बहुत सरल है कि कुछ दोस्त बीच समुद्र में चले गए हैं और वहां एक हादसे में उनकी जान पर आ बनी है। लेकिन इसे जिस ढंग से फिल्माया गया है, वह देखने के काबिल है। हमने इसे थ्री-डी में भी बनाया है। इसका रोमांच रोंगटे खड़े कर देता है। ऐसी फिल्में दुनिया में बनी हैं, लेकिन भारत में नहीं बनी। इसलिए मैंने इसे बनाया।

‘गुलाब गैंग’ की भी चर्चा है। इसे कब तक रिलीज करेंगे...?

कोशिश इसी साल रिलीज करने की है। पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है।

फिल्म उत्तर प्रदेश में केंद्रित है?

सीधे-सीधे उसे उत्तर प्रदेश से नहीं जोड़ सकते। मूल रूप से यह ग्रामीण समाज की महिलाओं पर केंद्रित है। मेरा मानना है कि तमाम तरक्की के बावजूद इस समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की है।

मैं छोटे शहर में पला-बढ़ा हूं, मेरी संवेदनाएं उनसे जुड़ती हैं। यह कहानी भी अलग है। इसमें महिलाओं को अपनी तरक्की और भलाई के लिए एक महिला से ही संघर्ष करना पड़ रहा है।

संपत पाल के गुलाबी गैंग से आपकी फिल्म प्रेरित बताई जा रही है?

ऐसा नहीं है। फिल्म बनाना एक कठिन काम है। इसके साथ कई बातें जुड़ी होती हैं, इस कारण आसानी से विवाद खड़े हो जाते हैं।

यह बताइए कि अगर आप संपत पाल के जीवन या घटनाक्रम से प्रेरित होकर फिल्म बनाते हैं तो क्रेडिट देने में क्या समस्या है?

जब मैंने ऐसा किया ही नहीं तो मैं खामखां क्यों किसी को क्रेडिट दूं? वैसे में आपसे कहूं कि संपत पाल और उन्होंने जो किया है, उसका बहुत सम्मान करता हूं।
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