क्या डोभाल के अहम से नाकाम हुआ ऑपरेशन?

Amit Tiwariअमित तिवारी Updated Thu, 07 Jan 2016 03:32 PM IST
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Doval's ego creates problems during pathankot's operation?

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पठानकोट एयरफोर्स बेस पर चरमपंथी हमले पर काबू पाने में भारतीय अधिकारियों को चार दिन लग गए। पाकिस्तानी सीमा के नजदीक स्थित इस बेस पर हुए हमले में सात भारतीय सैनिक मारे गए जबकि 22 अन्य घायल हो गए। मेरे हिसाब से सुरक्षा ऑपरेशन का संचालन पूरी तरह विफल रहा। आधिकारिक सूचनाओं के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के पास पहले से ही एक जनवरी के सुनियोजित हमले के प्लान की खुफिया जानकारी थी।
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सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पठानकोट हमले पर भारत की प्रतिक्रिया बिल्कुल नौसिखिया थी- आक्रमण अपर्याप्त था, कई फोर्स एक साथ ऑपरेशन में शामिल थीं, इसके बाद उपयुक्त हथियारों की कमी ने पूरे ऑपरेशन को करीब-करीब नाकाम कर दिया। जब हमले शुरू हुए तब अजित डोभाल ने 150 एनएसजी कमांडोज को माणेसर से एयरलिफ्ट कराकर अनजान इलाके में लड़ने के लिए भेज दिया। मिशन का नेतृत्व एनएसजी, डिफेंस सर्विस कॉर्प्स और वायु सेना के गरुड़ स्पेशल फोर्सेस को सौंप दिया गया।
डिफेंस सर्विस कॉर्प्स, सेवानिवृत और प्रेरणाविहीन सैनिकों का समूह है तो वहीं गरुड़ भारत की बढ़ते स्पेशल फोर्सेस के भीड़ के बीच अपने लिए औचित्य तलाश रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरे ऑपरेशन पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए डोभाल ने पठानकोट में पहले से तैनात 50 हजार सैनिकों को नजरअंदाज कर दिया जो संभवतः पूरे देश में सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। रिपोर्टों की मानें तो डोभाल ने सेना प्रमुख से महज 50 से 60 फौजियों की टुकड़ी ऑपरेशन के बैक-अप के लिए मांगी थी।
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