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सबरीमाला: इस दावे से शुरू हुई थी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Updated Wed, 17 Oct 2018 04:20 PM IST
सबरीमाला मंदिर
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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को असंवैधानिक बता कर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महिलाओं के हक में फैसला सुनाया था। आज शाम पांच बजे सबके लिए (महिला और पुरुष) मंदिर के कपाट भी खुल जाएंगे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही इसका भारी विरोध किया जा रहा है। चलिए जानते हैं कि क्या है सबरीमाला की पूरी कहानी और महिलाओं को प्रवेश की अनुमति से पहले क्या कुछ हुआ।
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कई रहस्य और धरोहर समेटे हुए है मंदिर
केरल का बेहद प्राचीन और पारंपरिक मंदिर इससे पहले भी विवादों में रहा है। ये मंदिर अपने आप में कई रहस्य और धरोहर समेटे हुए है। केरल का ये प्राचीन मंदिर राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर दूर है और पहाड़ियों पर स्थित है। सबरीमाला मंदिर चारों तरफ से 18 पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
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क्या है इतिहास?

कंब रामायण, महाभारत के अष्टम स्कंध और स्कंदपुराण के असुर कांड में जिस शिशु शास्ता का जिक्र है, अय्यप्पा उसी के अवतार माने जाते हैं। उन्हीं का मंदिर अय्यप्पा का मशहूर मंदिर पूणकवन के नाम से विख्यात 18 पहाड़ियों के बीच स्थित है। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं हैं। माना जाता है कि परशुराम ने अय्यप्पा पूजा के लिए सबरीमाला में मूर्ति स्थापित की थी। गौर करने वाली बात यह है कि कुछ लोग इसे शबरी से भी जोड़कर देखते हैं। सवाल उठता है कि जिस मंदिर का नाम शबरी के नाम से जुड़ा हो वहां महिलाओं के प्रवेश पर रोक क्यों था?
 
मंदिर में अय्यप्पा के अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे उप देवताओं की भी मूर्तियां हैं। महिलाओं को प्रवेश से वंचित रखने को लेकर जहां मंदिर की काफी आलोचना हुई, वहीं कुछ मामलों को लेकर तारीफ भी की जाती है। इस मंदिर में न तो जात-पात का कोई बंधन है और न ही अमीर-गरीब के बीच की खाई।  यहां प्रवेश करने वाले सभी धर्म और वर्ग के लोग समान हैं।  

यहां आने वाले लोगों को दो महीने मांस-मछली और तामसिक प्रवृत्ति वाले खाद्य पदार्थों का त्याग करना पड़ता है। मान्यता है कि अगर कोई भक्त तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर व्रत रखता है तो उसकी मुराद पूरी हो जाती है। 
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