अमेरिका जाने पर ही मिल पाएगा इस महिला को तलाक

नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Sun, 21 Jul 2013 12:04 AM IST
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पति से कानूनी विवाद के चलते अमेरिका की अदालत के अधिकार क्षेत्र को लांघकर अपने बच्चे को साथ भारत आई महिला को अब वापस लौटना होगा।
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सर्वोच्च अदालत ने विदेशी अदालत के अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए पति को पत्नी और बच्चे को वापस ले जाने का इंतजाम करने का आदेश दिया है।
जस्टिस एसएस निज्जर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पति-पत्नी, दोनों की ओर से दायर क्रॉस अपील पर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को जारी रखते हुए कुछ अपने निर्देश भी शामिल किए हैं।
अलगाव पर उतारू अमेरिका में कार्यरत पति बीजे राव को यूएस कोर्ट में मामले के निपटारे तक पत्नी ए. बांदी और आठ वर्षीय पुत्र के लिए आवास सहित सभी व्यवस्थाएं करनी होंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यूएस कोर्ट के वर्ष 2008 के आदेश पर दो हफ्ते के लिए बच्चे के साथ भारत आई मां को विदेशी कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करने का जिम्मेदार माना।

ऐसे में कोर्ट ने कहा कि पति तलाक और बच्चे की देखरेख के मामले के निपटारे के लिए पत्नी-बेटे को साथ अमेरिका ले जाए। लेकिन इससे पहले यूएस कोर्ट की ओर से पत्नी के खिलाफ जारी जमानती वारंट को वापस लिए जाने का आवेदन करे।

वारंट वापस लिए जाने के बाद पति अन्य व्यवस्थाएं कर पत्नी-बच्चे को वापस ले जाए। इसके अलावा पति को पत्नी के नाम पर पांच हजार यूएस डॉलर जमा कराने होंगे और एक अधिवक्ता उपलब्ध कराना होगा।

अमेरिका में बीजे राव ने 2003 में ए. बांदी से विवाह किया था। दोनों तलाकशुदा थे। बेटे के जन्म के बाद से पति-पत्नी के बीच नहीं बनी।

2006 में घरेलू उत्पीड़न का मामला पत्नी ने पति के खिलाफ दर्ज कराया। इसके बाद केंट, वाशिंगटन की अदालत में बच्चे की देखरेख का मामला पहुंचा।

जहां पत्नी की ओर से किए गए कई आवेदनों के बाद अदालत ने मां को बच्चे को साथ भारत ले जाने की इजाजत दी थी।
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