तीन कोशिशों के बाद भारत आ पाए थे गांधी

sachin yadavसचिन यादव Updated Fri, 09 Jan 2015 12:00 PM IST
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when mahatama gandhi had decide to return india.

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अतीत में ऐसे कई मौके आए थे जब गांधी वतन-वापसी का पक्का मन बना चुके थे। अक्टूबर 1901 में वे डरबन से बेहतरी की आस में अपने परिवार के साथ रवाना हुए। लेकिन एक ही साल बाद उन्हें दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों के लिए युद्धोत्तर-कालीन वार्ता के लिए वापस आना पड़ा। हालांकि उन्होंने उम्मीद की थी कि जितना जल्दी हो सकेगा वे लौट आएंगे।
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सन 1904 में उन्होंने लॉर्ड मिलनर को समझौते का एक प्रस्ताव भेजा जो श्वेतों और उग्र भारतीयों की मांगों का बीच का रास्ता था। अगर वो स्वीकार हो गया होता तो गांधी, कस्तूरबा और बच्चों के पास चले जाते और बंबई हाईकोर्ट में तीसरी बार भाग्य आजमा रहे होते।
जब मिलनर ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया तो गांधी ने फिर अपने परिवार से कहा कि वो दक्षिण अफ्रीका आ जाएं। सन 1906 और 1909 में उन्होंने भारतीयों के अधिकारों की पैरवी के लिए लंदन की यात्रा की और इनमें से किसी भी मौके पर अगर उनकी मांगें मान ली जातीं तो वे भारत लौट जाते।
सन 1911 की गर्मियों में एक बार फिर से उन्होंने ये उम्मीद की कि जनरल स्मट्स उनकी मुख्य मांगों को मान लेंगे। लेकिन वैसा भी नहीं हो सका। इसलिए सत्याग्रह का एक ताजा चक्र शुरू करना पड़ा। लेकिन आखिरकार एक आखिरी समझौता कानून का शक्ल लेने वाला था और गांधी परिवार अपने दोस्त प्राणजीवन मेहता की पुरानी इच्छा को पूरा करने के लिए अब स्वदेश लौट सकता था।
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गांधी को उम्मीद थी कि वो वापस लौट सकते हैं

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