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कोल्ड स्टोर से फेंका गया 50 हजार पैकेट आलू

अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज Updated Sun, 26 Nov 2017 11:53 PM IST
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स्लम आवास कालोनी के बाहर फेंका गया आलू।
स्लम आवास कालोनी के बाहर फेंका गया आलू। - फोटो : अमर उजाला
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छिबरामऊ। इस बार मंदी में कई किसान कोल्ड स्टोरेज आलू छुड़ाने नहीं गए। अब स्थिति यह है कि शीतगृहों में आलू डंप पड़ा  है और शीतगृह मालिकों के लिए सिरदर्द बना है। नगर के एक कोल्ड स्टोरेज से 50 हजार पैकेट आलू तालग्राम रोड पर भेज दिया गया। बीनने के लिए गरीबों में होड़ लग गई। दर शाम तक आलू बीनने वालों की भीड़ लगी हुई थी।
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रविवार को तालग्राम रोड पर ग्राम बहवलपुर के पास बने स्लम आवासों के निकट एक कोल्ड स्टोर से लगभग 50 हजार पैकेट आलू खुले में फेंक दिया गया। जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी हुई तो आलू बीनने वालों की भीड़ लग गई। थोड़ी ही देर में वहां ग्रामीणों भीड़ लग गई। गरीबों ने आलू छांटकर अपने खाने के लिए भंडारित कर लिया। मालूम हो कि इस बार आलू पर मंदी छाई रही, जिससे किसानों ने आलू की बुवाई भी कम की है। किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू को छुड़ाना भी मुनासिब नहीं समझा। अब स्थिति यह है कि नगर के सभी शीतगृहों में लाखों पैकेट आलू भरा हुआ है और किसान सूचना देने के बाद भी उसे लेने नहीं आ रहा है।
अब शीतगृह मालिकों के सामने उसे फेंकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसी तरह फर्रुखाबाद रोड पर भी कई शीतगृहों में आलू निकालकर सड़क किनारे फेंक दिया। अच्छा आलू गरीब खाने के लिए लेकर चले गए, जबकि खराब आलू आवारा मवेशियों का निवाला बन रहा है। आलू की इतनी दुर्गति पहले कभी नहीं देखी गई। यही वजह है कि इस बार आलू की बेल्ट में बुवाई का रकबा कम हो गया है। किसानों का कहना है कि अब आलू की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। सरकार भी आलू किसानों की ओर ध्यान नहीं दे रही है। यह वजह है कि लोग आलू की खेती से दूर होते चले जा रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह धान और गेहूं की तरह आलू को भी समर्थन मूल्य पर खरीदें, तभी इससे पार पाया जा सकता है।
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