इन अफसर की कुछ अलग ही थी बात, जुर्म और जुल्म के शिकार लोगों की व्यक्तिगत स्तर पर करते थे मदद

न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 01 Jan 2020 04:16 PM IST
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पीपीएस परेश पांडेय
पीपीएस परेश पांडेय - फोटो : अमर उजाला

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लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें परेश पांडेय की अलग पहचान थी। उन्हें आम जनता का दोस्त बनकर उनका दुख-दर्द बांटने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता था।
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लखनऊ के बाशिंदों में परेश पांडेय का नाम एक जनप्रिय पुलिस अफसरों में शुमार है। उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरुआत एक अंग्रेजी अखबार में पत्रकार के तौर पर की थी। कुछ महीने बाद ही वह शिक्षा के क्षेत्र में आ गए और नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक कॉलेज में लेक्चररशिप की।
हालांकि, उनका यह सफर भी छोटा ही रहा और वर्ष 1987 में उन्होंने पुलिस सेवा जॉइन की। पत्रकारिता और शिक्षा क्षेत्र का अनुभव उनके काफी काम आया और उन्होंने पूरे सेवाकाल में सोशल पुलिसिंग ही की। फरियादियों को वह कभी दुखी और निराश नहीं होने देते थे। जुर्म और जुल्म के शिकार लोगों  को हिम्मत बंधाकर उनकी व्यक्तिगत स्तर पर मदद करते थे।
 
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