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पंजाब

रविवार, 29 मार्च 2020

कर्फ्यू: कंधे पर सामान-मासूम बच्चे, जेब में सिर्फ 200 रुपये, चंडीगढ़ में घरों के लिए निकले मजदूर

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते चंडीगढ़ में कर्फ्यू लगा है, जिसके कारण सबसे ज्यादा दिक्कत दिहाड़ीदार मजदूरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। दिल्ली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से बड़ी संख्या में मजदूर पलायन कर रहे हैं। इसी तरह चंडीगढ़ से भी लोग पलायन करने लगे हैं। पिछले बुधवार से ही भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है, जिस वजह से एक तिहाई आबादी घरों में रहने के लिए मजबूर है।

लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत दिहाड़ीदार मजदूरों को हो रही है, इसलिए वे पैदल ही अपना सामान और बच्चों को लेकर घरों और गांवों की ओर निकल पड़े हैं। शनिवार सुबह सड़क पर दिखे मजदूरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हम मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के लिए जा रहे हैं। हमारी जेब में सिर्फ दो सौ रुपये हैं। अगर हम अपने घर नहीं जाएंगे तो हम यहां क्या खाएंगे? जो पैसे जेब में हैं, उन्हें भी रास्ते में बच्चों के खाने पर खर्च करुंगा।
 
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कोरोना के खिलाफ जंग के असली 'हीरो' हैं ये, रोजाना गाड़ी में चाय-बिस्कुट बांटने निकलते रॉबिन

कोरोना की जंग में अब मदद के लिए हाथ भी उठने लगे हैं। इसकी मिसाल है श्री गुरु रविदास फोर्स के प्रधान रॉबिन सांपला। रॉबिन अपनी टीम के आधा दर्जन सदस्यों के साथ रोजाना तीन गाड़ियों के काफिले में शहर के उन तमाम नाकों पर जाते हैं, जहां पर दिन रात पुलिस मुलाजिम ड्यूटी पर तैनात हैं। वह चाय पिलाते हैं, उनको बिस्किट व दूध देते हैं।

रॉबिन सांपला की संस्था में काफी नौजवान हैं और उनके सामने आ रहा था कि दुकानें व ढाबे बंद होने के कारण पुलिस को पानी व चाय की परेशानी है। कर्फ्यू के अगले ही दिन अपने साथियों के साथ फोन पर वार्तालाप किया और उसी समय तय किया सड़कों पर जो भी लोग नजर आएं, चाहे वह दिहाड़ीदार हो या रिक्शा चालक या पुलिस मुलाजिम, तमाम लोगों को चाय, दूध पिलाई जाएगी।

बाकयदा रोजाना सुबह अपनी फॉर्चूयनर गाड़ी में गर्म चाय, पानी की बोतलें, बिस्कुट के पैकेट, गर्म दूध रख लेते हैं और डिस्पोजल गिलासों में जालंधर में बांटते रहते हैं। रोजाना वह चार घंटे तक शहर की सड़कों पर सेवा कर वापस चले जाते हैं। इसके लिए वह किसी से फंड भी नहीं ले रहे हैं, रॉबिन का कहना है कि हम दोस्त ही मिलकर इस अभियान को चला रहे हैं।
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कोरोना वायरसः जालंधर सेहत विभाग की नाकामी से हजारों लोग आ सकते हैं कोरोना की चपेट में

कागजातों में सेहत विभाग कोरोना को लेकर काफी सीरियस है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सेहत विभाग की नाकामी के कारण कोरोना की चपेट में हजारों लोग आ सकते हैं। आलम यह कि 21 मार्च को सुमन छाबड़ा को सिविल अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए उनका बेटा रवि छाबड़ा लेकर गया था, लेकिन सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने वापस भेज दिया और कहा कि सब ठीक है। उसका इलाज तक नहीं किया गया, ब्लड सैंपल भी नहीं लिया गया और छह दिन में सुमन छाबड़ा काफी लोगों के संपर्क में आ चुकी थी।

इससे पहले बलदेव सिंह पठवाला के मामले में भी जालंधर के सरकारी अस्पताल की नालायकी सामने आई थी और अब सुमन छाबड़ा के मामले में सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने उसके बारे में न तो आला अधिकारियों को बताया और न ही कोरोना के नोडल अधिकारी को। सुमन छाबड़ा जालंधर के निजात्म नगर इलाके में रहती है और सीएमसी में कोरोना वायरस से ग्रस्त पाई गई है। वह जिंदगी मौत के बीच जंग लड़ रही है और वेंटिलेटर पर है। उसके बेटे रवि छाबड़ा के मुताबिक, उनकी माता बिलकुल ठीक थी। कुछ सांस लेने की तकलीफ हुई तो निजी अस्पताल ले गया।

जहां चिकित्सकों ने एक्स-रे किया और तत्काल सरकारी सिविल अस्पताल जाने के लिए कहा। रवि छाबड़ा 21 मार्च को अपनी माता को सरकारी सिविल अस्पताल आया और एक्स-रे आदि दिखाए। वहां पर बैठे चिकित्सक इस कदर लापरवाह थे कि उन्होंने मरीज को सीरियस ही नहीं लिया और कहा कि सब ठीक है आप घर चले गए। नियमानुसार उसका आइसोलेशन कर ब्लड सैंपल लेकर अमृतसर मेडिकल कॉलेज भेजना चाहिए था लेकिन नहीं भेजा। न ही चिकित्सकों ने संदिग्ध मरीज के बारे में सिविल सर्जन या नोडल अधिकारी को अवगत करवाया।

रवि छाबड़ा मां को लेकर घर वापस आ गया और जब अगले दिन तकलीफ बढ़ी तो लेकर सीएमसी चला गया। जहां उसको अस्पताल में भर्ती किया गया और खून का सैंपल लेकर पीजीआई चंडीगढ भेजा जहां से 26 मार्च को उसमें कोरोना पॉजिटव पाया गया। अगर सेहत विभाग 21 मार्च को ही सैंपल लेकर महिला को आईसोलेट कर देता तो उसकी चपेट में आने से काफी लोग बच सकते थे। इस दौरान सुमन छाबड़ा काफी लोगों से मिलती जुलती रही और इलाके में भी कई घरों में गई।
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कोरोना वायरस: ईरान में 45 दिनों से फंसे 70 भारतीय, जहाज में खाना तक नहीं बचा, सिर्फ मास्क दिए गए

कोरोना वायरस के कारण ईरान में विभिन्न बंदरगाहों पर 70 भारतीय जहाजी फंसे हुए हैं। इनमें एक फिरोजपुर का युवक भी शामिल है। उन्होंने तेहरान में भारतीय दूतावास और डायरेक्टर जनरल शिपिंग को भेजे गए मेल में अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने मेल में लिखा है कि 70 भारतीय जहाजी यहां कई दिनों से खोर्रमशहर बंदरगाह, किश, बंदर अबास और बुशहर में फंसे हुए हैं।

उन्होंने अपनी साइन ऑफ प्रक्रिया पूरी कर ली थी लेकिन सभी साधन बंद होने के कारण वे यहीं फंसे रह गए। जहाज के मालिकों और अन्य स्थानीय चालक दल ने जहाज छोड़ दिया है। फंसे हुए भारतीयों में फिरोजपुर जिले के जीरा सब-डिवीजन के तहत आते मक्खू का गुरजंट सिंह गिल भी है। उसने व्हाट्सएप पर बताया कि यहां उन्हें फंसे हुए 45 दिनों से अधिक समय हो गया है।

उनके पास अब भोजन भी नहीं बचा है। उन्हें सिर्फ मास्क ही दिए गए हैं, बाकी कुछ नहीं। उसने बताया कि उन्हें 4 अप्रैल को उड़ान भरनी थी लेकिन उसे रद्द कर दिया गया। अब कोई उड़ान उपलब्ध नहीं है। हमारे एजेंट भी टिकट के लिए पैसा नहीं दे रहे हैं और अब उन्होंने जवाब देना छोड़ दिया है। महाराष्ट्र के ठाणे के अनुराग कैलाश चंद ने फोन पर बताया कि जहाज में उनके पास बिजली की आपूर्ति भी नहीं है। किसी तरह उनकी मदद की जाए।

ट्वीट के बाद तैयार की सूची तैयार :
अटके हुए जहाजियों ने भारतीय दूतावास और जहाजरानी मंत्री को कई ट्वीट किए थे। इसके बाद डायरेक्टर जनरल शिपिंग ने विभिन्न बंदरगाहों पर अटके समुद्री यात्रियों का विवरण मांगा। अंतरराष्ट्रीय समुद्री महासंघ के अध्यक्ष कैप्टन संजय पाराशर ने एक सूची तैयार कर भेजी, जिसमें ईरान में अटके 70 समुद्री नाविकों का विवरण है। हालांकि इसके बावजूद ईरान में अटके समुद्री नाविकों को लाने के लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

वहीं, कैप्टन पाराशर ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास के अधिकारी जहाजियों से बात कर रहे हैं और उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं। वे भी यथासंभव मदद की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सभी जल्द ही वापस आ जाएंगे। यह संभवतया 15 अप्रैल को लॉकडाउन हटने के बाद ही होगा।
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ईरान में फंसे भारतीय। ईरान में फंसे भारतीय।

पंजाब में गायब हुए NRI पर सख्त हुई सरकार, ईमेल और हेल्पलाइन नंबर पर मांगी जानकारी

कोविड -19 पर नियंत्रण पाने के सख्त प्रयासों की कड़ी में पंजाब सरकार ने शनिवार को आम लोगों से अपील की कि राज्य में 30 जनवरी के बाद आए एनआरआई और विदेश यात्रा से लौटे लोगों का विवरण, हेल्पलाइन नंबर 112 पर दर्ज करवाएं। 

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में एक स्व:घोषणा प्रोफार्मा भी जारी किया गया है, जिसमें प्रवासी भारतीयों और विदेश यात्रा से लौटने वालों को अपना पासपोर्ट नंबर, एयरपोर्ट का नाम, भारत आने की तारीख और पंजाब आने की तारीख जैसे विवरण देने होंगे। उन्होंने बताया कि इन व्यक्तियों को अपने स्थायी पते या मौजूदा ठहरने या होटल, अगर कोई है तो उस संबंधी जानकारी भी देनी होगी। इसके अलावा उन्हें पंजाब में अपने जाने वाले स्थानों और संपर्क नंबर जैसे कि मोबाइल, लैंडलाइन और ई-मेल पते की जानकारी भी देनी होगी।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि अगर किसी प्रवासी भारतीय या विदेश से लौटने वाले व्यक्ति ने अपने विवरण जानबूझ कर सरकार से छिपाए तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाने संबंधी विचार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय यह जानकारी हेल्पलाइन नंबर 112 के अलावा ई-मेल [email protected] और वेबसाइट https://ners.in/ पर भी भर सकते हैं। इसके अलावा वह यह जानकारी 112 मोबाइल एप पर भी दर्ज कर सकते हैं।
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पंजाब: कर्फ्यू में फंसी यूक्रेन की महिला, डीसी ने टैक्सी से दिल्ली भिजवाया, ठहरने की व्यवस्था भी की

कर्फ्यू के कारण होशियारपुर में फंसी एक यूक्रेन की महिला को दिल्ली भेजने में जिला प्रशासन ने मदद की। डीसी ने न केवल एक टैक्सी की व्यवस्था की बल्कि वहां ठहरने की व्यवस्था भी निजी तौर पर करवाई। 34 वर्षीय कंप्यूटर गेम डिजाइनर ओल्हा कुशपिट, यूक्रेन के सोकोला-बटका से 22 जनवरी को भारत आई थीं। 

वह 22 जनवरी से 02 फरवरी तक विपश्यना कोर्स के लिए करनाल चली गई। इसके बाद वह चंडीगढ़ आई और 05 फरवरी को होशियारपुर विपश्यना कोर्स के लिए आईं। 16 फरवरी को वह अपने दोस्त से मिलने पालमपुर चली गईं फिर 19 फरवरी को विपश्यना पाठ्यक्रम के लिए होशियारपुर पहुंचीं। 

इसके बाद वह 04 मार्च को विपश्यना कोर्स के लिए हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला भी गई। 20 मार्च को लौटी और होशियारपुर पहुंचीं। इस बीच परिवहन बंद हो गया और वह घंटाघर के पास एक होटल में फंस गई। 27 मार्च को अपनी बुकिंग का विस्तार करना था जो उसने ऑनलाइन किया था। होटल के मालिक ने उसे इसे रद्द करने और सीधे नकद में भुगतान करने के लिए कहा। 

उन्होंने 16 अप्रैल तक अपने कमरे की बुकिंग के लिए अग्रिम 10000 रुपये का भुगतान किया। इस बीच दोपहर में जल्द से जल्द दिल्ली पहुंचने के लिए यूक्रेन दूतावास का संदेश मिला। जब उसी दिन (27 मार्च) उसने होटल के मालिक को बुकिंग रद्द करने और पैसे वापस करने के लिए कहा तो उसने न केवल इसके लिए मना कर दिया बल्कि उसे धमकी भी दी कि जब तक वह शेष राशि 9000 रुपये का भुगतान नहीं करती वह उसे जाने नहीं देगा।  

स्थानीय युवक विजय शर्मा से इसके बारे में पता चलने पर होटल शिराज रीजेंसी के मालिक पंडित शाम सुंदर शर्मा और विवेक शर्मा ने उन्हें अपने होटल में मुफ्त में ठहराया। इस मामले को डिप्टी कमिश्नर अपनीत रियात के संज्ञान में भी लाया गया। इस पर डीसी ने ओलहा के न केवल पैसा वापस कराए बल्कि दिल्ली जाने के लिए एक टैक्सी और दिल्ली में रहने की भी व्यवस्था की। 
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पंजाब: 14 अप्रैल तक चलेगी कोरोना के खिलाफ जंग, कर्फ्यू को लेकर हो सकता नया एलान

कोरोना के खतरे के मद्देनजर देशभर में जारी लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने भी राज्य में 31 मार्च तक के लिए उठाए कदमों को 14 अप्रैल तक बढ़ाने का मन बना लिया है। इसके तहत सभी सरकारी विभागों में विभाग प्रमुखों को 14 अप्रैल तक न्यूनतम स्टाफ के साथ कार्य करने की हिदायत दे दी गई है। माना जा रहा है कि आम लोगों के लिए राज्य में 31 मार्च तक लागू कर्फ्यू की अवधि में भी इजाफा किया जाएगा, जिसका एलान अगले 2 दिन में हो सकता है।

राज्य सरकार के परसोनल विभाग की ओर से सभी विभाग प्रमुखों, डिविजनों के कमिश्नरों, सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में केंद्रीय गृह मामलों के मंत्रालय की ओर से 24 मार्च को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि पुलिस, होमगार्ड्स, सिविल डिफेंस, फायर और इमरजेंसी सर्विस, आपदा प्रबंधन और जेल, जिला प्रशासन और ट्रेजरी, बिजली, वाटर सप्लाई व सेनिटेशन, म्युनिसिपल इकाइयों के कार्यालयों को छोड़कर बाकी सभी कार्यालयों में न्यूनतम स्टॉप के साथ काम किया जाए जबकि अधिकतर स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम के लिए घरों में रहने को कहा जाए।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने कोरोना के खतरे के चलते के सभी प्रशासनिक विभागों में कर्मचारियों की भीड़ कम करने के लिए 50-50 प्रतिशत की रोटेशन का नियम लागू किया हुआ है। इसके तहत एक समय में दफ्तर में केवल 50 फीसदी कर्मचारी ही काम पर आएंगे जबकि बाकी 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। 15 दिन बाद दफ्तर में ड्यूटी कर रहे कर्मचारी घर पर और घर पर काम करने वाले कर्मचारी दफ्तर में ड्यूटी देंगे।
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कर्फ्यू: हर मुसीबत में काम आएंगे ये 15 हेल्पलाइन नंबर, कभी भी कर सकते हैं कॉल

कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर)
मोहाली के लोगों को कोरोना महामारी के चलते लगाए गए कर्फ्यू में आपको घरों में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत न आए, इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से कंट्रोल रूम बनाए गए हैं और इनके हेल्पलाइन फोन नंबर जारी कर दिए गए हैं। जी हां प्रशासन ने आपके लिए 15 हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं। इन पर आप 24घंटे कॉल कर सकते हैं और आपकी सुनवाई होगी। इसके साथ ही पहल के आधार पर लोगों की समस्याओं को हल किया जाएगा। वहीं, इसके लिए प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की है।
  • पंजाब इमजरेंसी हेल्पलाइन-  112
  • जरूरी चीजों के लिए हेल्पलाइन-  01722219541, 7888556264
  • कोविड-19 मेडिकल हेल्पलाइन-  104, 0172-2270091, 7814641397
  • डिस्ट्रिक कंट्रोल रूम-   0172-2219505, 0172-2219506, 9779816600
  • नोडल अफसर कंट्रोल रूम
  • मेडिकल रिलेटेड क्वैरी 
  • मोहाली-    9888877203
  • खरड़-    9872211756
  • डेराबस्सी-    9256192655
  • सब डिवीजनल कंट्रोल रूम
  • मोहाली-    0172-2219580
  • खरड़-    0160-2280222
  • डेराबस्सी-    0176-2297129
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पंजाब के सभी अस्पतालों में जल्द बनेंगे आईसीयू, कोरोना संदिग्धों की रिपोर्ट भी आएगी जल्द

पंजाब के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि सभी जिला अस्पतालों में आधुनिक तकनीक के उपकरणों से लैस आईसीयू जल्द स्थापित किए जाएंगे। सेहत मंत्री ने सभी निजी अस्पतालों को हिदायत दी कि इस वायरस के पीड़ित मरीजों के बारे में रोजाना संबंधित सिविल सर्जन को रिपोर्ट दें।  शनिवार को बलबीर सिद्धू ने नवांशहर और होशियारपुर में स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा कि जिला अस्पतालों की मांग को पूरा करने के लिए सूबे को 50 नए वेंटिलेटर मिलेंगे। 

इसके अलावा इन आईसीयू और वेंटिलेटरों को संभालने के लिए डॉक्टरों को आधुनिक सेहत संस्था द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवांशहर के अस्पताल को पहले ही दो वेंटिलेटर मिल चुके हैं। फिलहाल स्थिति को कंट्रोल करने के लिए नजदीकी जिलों की सहायता से प्रभावशाली प्रबंध किए गए है।

जिला प्रशासन और सेहत विभाग द्वारा विशेष तौर पर नवांशहर और होशियारपुर में कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर संतोष जाहिर करते हुए सेहत मंत्री ने कहा कि अभी कई ओर कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि इस वायरस के फैलाव को रोका जा सके। सेहत मंत्री ने दोनों जिलों के अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता का जायजा लिया
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लॉकडाउन का असरः देश में चंडीगढ़ की हवा सबसे साफ, इन वजहों से कम हुआ प्रदूषण

लॉकडाउन का प्रदूषण पर जबरदस्त असर पड़ा है। हवा पूरी तरह से साफ हो चुकी है। आसमान भी नीला दिख रहा है। शनिवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से चार बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक चंडीगढ़ का एयरक्वालिटी (एक्यूआई) इंडेक्स 17 दर्ज किया गया है, जो पूरे 101 शहरों में सबसे कम रहा है। सीपीसीबी हर रोज देश के 101 शहरों की एयर क्वालिटी का मूल्यांकन करता है। इसमें देश के सभी प्रमुख शहर शामिल हैं। चंडीगढ़ के पर्यावरण विशेषज्ञों ने माना है कि शनिवार के दिन की हवा की गुणवत्ता पिछले एक साल में सबसे साफ रही है।

उनका यह भी कहना है कि जब तक लॉकडाउन चलेगा, तब तक हवा की गुणवत्ता अच्छी बनी रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को देश भर में लॉकडाउन का एलान किया था। इसके बाद से सड़कों पर निजी वाहनों का चलना, निर्माण कार्य, इंडस्ट्री और ढाबे बंद हो गए हैं। इससे पूरे देश के साथ-साथ चंडीगढ़ की हवा में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लॉकडाउन नहीं होता तो इस समय एयरक्वालिटी इंडेक्स 100 के आसपास रहता। यह आकलन विशेषज्ञों ने अपने पूर्वानुमान के हिसाब से बताया है।

इन वजहों से कम हुआ पॉल्यूशन
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के सिर्फ एक कारण नहीं होते बल्कि कई फैक्टर एक साथ काम करते हैं। एक्यूआई में आए इस बदलाव के पीछे लॉकडाउन के अलावा बीते कुछ दिनों से हो रही बारिश का भी योगदान रहा है। चंडीगढ़ में भी लगातार दो दिन बारिश हुई है। इससे पहले भी मार्च में रुक-रुक कर बारिशें होती रही हैं। 
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मोहाली: पीजी और घरों से किराएदारों को नहीं निकाल पाएंगे मालिक, किराए के लिए भी न करें मजबूर

कोरोना महामारी के चलते शहर में अधिकतर कंपनियां और संस्थान बंद पड़े हैं। ऐसे में अधिकतर लोग घर बैठने के लिए मजबूर हो गए हैं। दूसरी तरफ जिला प्रशासन के सामने यह बात आई है कि ऐसे हालातों में कुछ लोग अपने किराएदारों या पीजी में रहने वालों पर घर खाली करने का दबाव बना रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने फैसला लिया है कि जब तक कर्फ्यू या लॉकडाउन की स्थिति बनी रहती है तब तक किराएदारों को कोई घर खाली करने के लिए मजबूर नहीं करेगा। यह आदेश डीसी गिरीश दियालन ले दिए हैं। जिसे पूरे जिले में तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जो आदेशों की अवहेलना करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

किराएदारों को किराए के लिए न करें मजबूर
जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा जारी किए आदेशों में कहा गया है कि लोगों को घरों से बाहर निकालना जायजा नहीं है। अगर उन्हें निकाला जाता है तो वे घर भी नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा यह भी अपील की गई है छात्रों, पीजी व अन्य किराएदारों को तुरंत भुगतान के लिए मजबूर न किया जाए। किराए की अदायगी न होने की सूरत में भी घर खाली नहीं करवाया जा सकता है। जिक्रयोग है कि मोहाली पंजाब के अग्रणी शहरों में से एक है। यहां पर कई नामी शिक्षण संस्थान, कंपनियां, खेल के मैदान व अन्य चीजें मौजूद हैं। साथ ही यहां पर विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी छात्र पढ़ने के लिए आए हुए हैं।
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कोरोना वायरस: स्पेशल फ्लाइट से 140 भूटान के छात्र वापस लौटे, चंडीगढ़-पंजाब में कर रहे थे पढ़ाई

कोरोना वायस के कारण लगे कार्फ्यू के चलते चंडीगढ़ और पंजाब में फंसे भूटान के 140 छात्र शनिवार को एक स्पेशल फ्लाइट से अपने देश भेज दिए गए हैं। यह स्पेशल फ्लाइट भूटान से उड़ान भरकर मोहाली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई थी। यह स्टूडेंट्स कई साल से चंडीगढ़ और पंजाब में पढ़ाई कर रहे थे।

इन स्टूडेट्स के लिए भूटान से एक स्पेशल फ्लाइट मोहाली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरी और शाम के समय स्टूडेंट्स को लेकर यहां से रवाना हो गई। फ्लाइट से पहले सभी स्टूडेंट्स की बाकायदा थर्मल स्कैनिंग की गई और उनको एक दूसरे से दूर रहने के लिए हिदायत भी दी गई।

कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन है और ऐसे में भारत में पढ़ाई करने आए स्टूडेट्स भी अब अपने देश वापस लौट रहे हैं। भूटान की ड्रकर एयरलाइन की फ्लाइट यहां ढाई बजे उतरी। एयरपोर्ट के पीआरओ प्रिंस ने बताया कि सभी स्टूडेंट्स की रवानगी के पहले थर्मल स्कैनिंग की गई। इन छात्रों की सहायता के लिए सीआईएसएफ और आईएएफ और पंजाब पुलिस ने भी पूरा सहयोग किया। यह फ्लाइट इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शाम करीब 4.30 बजे रवाना हुई।
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कोरोना वायरस: पंजाब में कोरोना का कोई नया केस नहीं, 264 लोगों की जांच रिपोर्ट का इंतजार

पंजाब के लिए शनिवार का दिन राहत भरा रहा। 24 घंटे के दौरान कोरोना से पीड़ित कोई मामला सामने नहीं आया है। महामारी के कारण में एक मौत देख चुके पंजाब में शनिवार को एक मरीज ठीक होकर अपने घर रवाना भी हो गया। सरकार से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार तक राज्य में 898 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई, जिनमें 596 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई जबकि 264 लोगों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

24 घंटे के दौरान 109 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 76 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव रही जबकि बाकी लोगों की रिपोर्ट का इंतजार है। राज्य में पाजिटिव मरीजों की संख्या 38 है, जिनमें से एक व्यक्ति की मौत बीते सप्ताह हो गई थी। बाकी 37 मरीज जोकि अस्पताल में दाखिल हैं, में से अमृतसर में दाखिल होशियारपुर के मरीज की हालत में सुधार होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

इस तरह पंजाब में कोरोना से पीड़ित लोगों की शनिवार को कुल संख्या 36 है। इन मरीजों की हालत स्थिर बताई गई है। इन मरीजों के नजदीकियों को भी क्वारंटीन किया गया है और वह सब डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इन मामलों के करीबी व्यक्तियों के नमूने भी ले लिए गए हैं और जांच के लिए निर्धारित लैब को भेजे गए हैं।

पंजाब में कोविड-19 की जिलावार रिपोर्ट
 
  • जिला                    कंफर्म केस     ठीक हुए    मृत्यु
  • एसबीएस नगर           19                            0 1
  • एसएएस नगर            06                           0 0
  • जालंधर                     05                           0 0
  • अमृतसर                   01                           0 0
  • होशियारपुर               06                           1 0
  • लुधियाना                 01                            0 0
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