मोदी अंकल, कृषि कानून वापस ले लो, पापा के बिना घर है सूना

Punjab Bureauपंजाब ब्‍यूरो Updated Tue, 27 Oct 2020 10:21 PM IST
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केंद्र के कृषि कानून के विरोध में अमृतसर के जंडियाला गुरु रेलवे स्टेशन पर किसानों के साथ प्रदर्श?
केंद्र के कृषि कानून के विरोध में अमृतसर के जंडियाला गुरु रेलवे स्टेशन पर किसानों के साथ प्रदर्श? - फोटो : AMRITSAR

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मोदी अंकल! मेरे पापा एक महीने से घर नहीं आए हैं। वह रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठे हैं। कहते हैं, जब तक तेरे मोदी अंकल कृषि सुधारों के नाम पर काला कानून वापस नहीं लेते, मेरे घर आने का इंतजार न करना। मैं पापा के साथ ही सोता हूं। मुझे पापा के बिना रहते हुए एक महीना हो गया है। घर में सब सूना-सूना है। प्लीज, मोदी अंकल! काले कानून वापस ले लो ताकि मेरे पापा घर लौट आएं। दशहरा तो बिना पापा के बीत गया, बंदी छोड़ दिवस और दीपावली पर पापा घर होंगे तो पूरा परिवार त्योहार मनाएगा। ये कहना था उन बच्चों का जिनके माता-पिता एक महीने से धरने पर बैठे हुए हैं। मंगलवार को जब बच्चे अपने अभिभावकों से मिले तो भावुक हो गए और परिजनों को गले लगा लिया। सोमवार को किसानों ने अपना धरना देवीदासपुर से हटाकर जंडियाला स्टेशन से तीन किलोमीटर दूर गहरी मंडी स्टेशन पर लगा दिया था।
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अमर उजाला से बात करते हुए मासूम गुरसाहिब सिंह (10) ने बताया कि उसका मम्मी-पापा के बिना घर में मन नहीं लगता। वह उनसे मिलने अपने दादा-दादी के साथ रेलवे स्टेशन पर आया है। उसकी मां भी इस धरने में शामिल है। वह दादा-दादी के साथ रहता है। वहीं सिमरन (8) ने बताया कि पापा बता रहे हैं कि उनके खेत छीने जा रहे हैं। जहां फसल खरीदी जाती है, उन मंडियों को बंद किया जा रहा है। मोदी अंकल इन कानूनों को रद्द कर दें इसलिए वे भी धरने में शामिल होने आए हैं। बाद में बच्चे रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। कुछ बच्चे अपने अभिभावकों की तरह ट्रैक पर लेट गए।
बच्चों के माता-पिता ट्रैक पर, घर में अकेले क्या करें : वरियामनंगल
किसान नेता लखविंदर सिंह वरियामनंगल ने कहा कि 34 दिन से चल रहे धरना-प्रदर्शन को किसान परिवारों की महिलाओं समेत समाज के कई लोगों ने समर्थन दिया है। अब उनके बच्चे भी इस धरने में शामिल हो गए हैं। बच्चे घर में अकेले क्या करें। स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की हुई है। घर में बच्चों को गाइड करने वाला कोई नहीं है। मोदी सरकार जहां किसानों की रोजी-रोटी छीन रही है, वहीं किसानों की नई पीढ़ी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में स्वयं को ढाल नहीं पा रही है। उनके बच्चे अपने माता-पिता का दु:ख समझ रहे हैं।
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