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रेगिस्तान में 25 किमी तक पैदल चलेंगे ITBP के डीजी, 24 घंटे में चलेंगे 100 किमी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Feb 2020 05:39 PM IST
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ITBP DG
ITBP DG - फोटो : AmarUjala
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सार

  • 40 किलोमीटर की दूरी हार्ड मेटल रोड पर तय होगी
  • लोगों को देंगे पर्यावरण सरंक्षण, फिट इंडिया और डेजर्ट टूरिज्म का संदेश
  • 2019 में योग दिवस पहुंचे थे 14000 फीट की ऊंचाई पर पैंगोंग झील

विस्तार

आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल 58 साल की आयु में एक बार फिर खास मिशन पर निकले हैं। मिशन के लिए जगह भी ऐसी चुनी है, जहां पर केवल रेत है और कहीं-कहीं कंटीली झाड़ियां देखने को मिल जाती हैं। उन्होंने अपने मिशन के तहत शुक्रवार को राजस्थान के रेगिस्तान में पैदल चलना शुरू कर दिया है।
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वे बीकानेर जिले के मेहरासर से लेकर जोधपुर के एक खुले इलाके तक 100 किलोमीटर लंबा रूट तय करेंगे। इस रूट का 25 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह रेगिस्तानी और रेतीला है। करीब 40 किलोमीटर की दूरी हार्ड मेटल रोड पर तय की गई जाएगी। डीजी देसवाल इस दूरी को 24 घंटे में पूरा करेंगे।
इस स्पीड मार्च शुरू करने के पीछे उनके तीन मकसद हैं। पहला, लोग पर्यावरण को समझें और उसके संरक्षण के लिए आगे आएं। दूसरा, फिट इंडिया मूवमेंट को तेजी से आगे बढ़ाना और तीसरा, डेजर्ट टूरिज्म की खूबसूरती को दुनिया के सामने रखना।
 
आईटीबीपी के मुताबिक, इससे पहले भी देसवाल कई बार इस तरह के मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। वहां भी उनके ये तीनों मकसद साथ रहे हैं। उन्होंने 12 महीनों में बतौर आईटीबीपी महानिदेशक, एक दर्जन से भी ज्यादा लंबे रूट वाले मार्च और स्पीड मार्च में भाग लिया है।

इस तरह के मिशन में उनके साथ आईटीबीपी के कई अफसर और जवान भी साथ रहते हैं। हिमाचल प्रदेश में स्थित भृगु लेक, अमरनाथ यात्रा रूट, लिपुलेख दर्रा, हिमाचल प्रदेश की सांगला वैली, मसूरी, औली तपोवन, पुरी कोणार्क सी-बीच, गंगोत्री-गौमुख तपोवन, धनुषकोडी, अलवर और बीकानेर-जोधपुर के बीच देसवाल ने कई स्थानों पर मार्च किया है।

वे हिमालय में हाई एल्टीट्यूड वाले ऐसे इलाके, जहां पर 18000 फीट से अधिक ऊंचाई रहती है, वहां भी उन्होंने सफलता के साथ सभी मिशन पूरे किए हैं। अपने इस मिशन के तहत वे बहुत से लोगों के साथ बातचीत करते हैं। कौन से इलाके में ऐसे क्या काम हो सकते हैं, जिनकी मदद से पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके, इस बाबत वे लोगों से सुझाव लेते हैं और उन्हें अपनी बात भी बताते हैं।

जैसे कहीं पर भू-जल का स्तर नीचे जा रहा है तो उसके लिए क्या किया जाए। हरियाली बढ़ानी है, प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल, पानी बचाने के लिए प्राकृतिक साधनों को सुरक्षित रखना और संबंधित इलाके को टूरिज्म के लिहाज से विकसित करना, आदि मुद्दों पर बातचीत होती है।

इतना ही नहीं, वे लोगों को फिटनेस का संदेश देना नहीं भूलते। किस तरह से लोगों का जीवन स्वस्थ बना रह सकता है, इसके लिए भी लोगों को कई अहम सुझाव दिए जाते हैं।
 
गत वर्ष देसवाल ने लिपुलेख दर्रा पहुंचकर स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाया था। वहां पर कूड़े का निस्तारण कैसे हो, इस बाबत कई तरह के उपायों पर चर्चा की गई। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2019 के अवसर पर उन्होंने 14000 फीट की ऊंचाई पर पैंगोंग झील पर पहुंच कर आईटीबीपी जवानों के साथ योगाभ्यास किया था।

आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक कुमार पांडे का कहना है कि महानिदेशक एसएस देसवाल इस तरह के अभियान में चार से पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। बीच राह में वे प्लास्टिक का निस्तारण करना नहीं भूलते। उनकी इस मुहिम से न सिर्फ जवानों का हौंसला बढ़ता है, बल्कि उन्हें फिट रहने का संदेश भी मिलता है।

बीकानेर जिले के मेहरासर से जोधपुर के एक खुले इलाके तक 100 किलोमीटर का रूट, जिस पर देसवाल ने चलना शुरू किया है, यह मार्च इसलिए विशेष है क्योंकि इसमें 25 किलोमीटर का रूट रेगिस्तानी और रेतीला है। इस दूरी को एक दिन में पूरा किया जाएगा।
 
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