गहलोत ने राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने को भेजा नया प्रस्ताव, बहुमत परीक्षण का जिक्र नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Updated Sun, 26 Jul 2020 03:03 PM IST
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

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राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र को एक नया प्रस्ताव भेजा है। जानकारी के अनुसार इसमें 31 जुलाई को सत्र बुलाने की मांग की गई है। हालांकि इसमें कहीं भी बहुमत परीक्षण का जिक्र नहीं है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कोरोना और दूसरे विधेयकों पर चर्चा के लिए सत्र बुलाने की जरूरत है। दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा कोरोना के बजाय कांग्रेस सरकारों से लड़ाई कर रही है। 
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मैं उम्मीद करता हूं महामहिम राज्यपाल शीघ्र ही हमें आदेश देंगे- सीएम गहलोत
सीएम गहलोत ने आगे कहा, 'राजस्थान के अंदर जिस प्रकार से राज्यपाल महोदय से सरकार विधानसभा में जाने के लिए परमीशन मांग रही है...सत्ताधारी पार्टी हमेशा रिलक्टेंट रहती है, विपक्ष मांग करता है, यहां हम मांग कर रहे हैं अभी तक उसका जवाब नहीं आ रहा है। मैं उम्मीद करता हूं महामहिम राज्यपाल बहुत ही पुराने राजनीतिज्ञ भी हैं, मिलनसार हैं, व्यवहार कुशल हैं और उनके पद की बहुत बड़ी गरिमा है, संवैधानिक पद है... वो जल्द ही, शीघ्र ही हमें आदेश देंगे, हम असेंबली बुलाएंगे।'


आज पूरा मुल्क चिंतित है क्योंकि डेमोक्रेसी खतरे में है- सीएम गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि 'आज पूरा मुल्क चिंतित है क्योंकि डेमोक्रेसी खतरे में है। #SpeakUpForDemocracy प्रोग्राम जो चलाया गया इसके मायने हैं, इसका अपना सन्देश है, उसको एक तरफ आम जनता को भी समझना पड़ेगा और दूसरी तरफ जो हुकूमत में हैं उनको भी समझना पड़ेगा'



कल कांग्रेसी देश की सभी राज्यों में राजभवन के सामने प्रदर्शन करेंगे- डोटासरा
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा, 'कल Save Democracy-Save Constitution अभियान के तहत कांग्रेसी देश की सभी राज्यों में राजभवन के सामने प्रदर्शन करेंगे, लेकिन हम राजस्थान में ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे। हमने महामहिम को कैबिनेट का रिवाइज्ड नोट भेज दिया है और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द सत्र आहूत करने की स्वीकृति देंगे।'
 

कल Save Democracy-Save Constitution अभियान के तहत कांग्रेसी देश की सभी राज्यों में राजभवन के सामने प्रदर्शन करेंगे, लेकिन हम #राजस्थान में ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे।हमने महामहिम को कैबिनेट का रिवाइज्ड नोट भेज दिया है और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द सत्र आहूत करने की स्वीकृति देंगे।

— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) July 26, 2020


मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने आज राजभवन में राज्यपाल से की मुलाकात 
राजस्थान: राज्य के मुख्य सचिव राजीव स्वरूप और पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र यादव ने आज राजभवन में राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की।

31 जुलाई को सत्र बुलाने के लिए गहलोत ने राज्यपाल को भेजा प्रस्ताव
राजस्थान में मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने विधानसभा सत्र 31 जुलाई से आहूत करने के लिए राज्यपाल को एक संशोधित प्रस्ताव भेजा है। राजभवन के सूत्रों ने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की है। राजभवन सूत्रों के अनुसार शनिवार देर रात राज्यपाल के पास पहुंचे प्रस्ताव में राज्य मंत्रिमंडल ने विधानसभा का सत्र 31 जुलाई से आहूत करने का आग्रह किया है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राजभवन में कांग्रेस विधायकों के शुक्रवार को पांच घंटे के धरने के बाद राज्य सरकार से छह बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था।


राजस्थान में हो रही है प्रजातंत्र और लोकतंत्र की हत्या: माकन
अजय माकन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'स्पीकर के नोटिस को आज तक के लोकतांत्रिक इतिहास में कभी रोका नहीं गया। स्पीकर के निर्णय लेने की प्रक्रिया को कभी रोका नहीं गया। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकर विधानसभा सत्र बुलाना चाहती है लेकिन उसमें रुकावटें आ रही है। राज्यपाल सरकार और कैबिनेट के कहने के बावजूद सत्र नहीं बुला रहे हैं। यह प्रजातंत्र और लोकतंत्र की हत्या है। सरकार कोरोना, आर्थिक संकट और चीन से लड़ने की बजाए कांग्रेस से लड़ रही है। भाजपा चुनी हुई सरकार को गिराने का षड्यंत्र रच रही है। राजस्थान के अंदर लोकतंत्र को बचाया जाना चाहिए।'

कांग्रेस ने पूछे पांच सवाल
1. क्या देश को प्रजातंत्र और भारतीय संविधान पर भाजपाई हमला स्वीकार है? 
2. क्या बहुमत का फैसला जनता के बहुमत से होगा या दिल्ली के हुक्मरानो के सत्ताबल और धनबल से होगा?
3. क्या प्रधानमंत्री और भारत सरकार संविधान व स्थापित संवैधानिक प्रावधानों को नाजायज सत्ताप्राप्ति की हवस के पांव तले रौंद सकती है?
4. क्या बहुमत से चुनी राजस्थान सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र को बुलाने की अनुमति देने से इनकार कर राज्यपाल संविधान की घोर अवहेलना कर सकते हैं?
5. क्या राज्यपाल अब विधायिका के अधिकार क्षेत्र में असंवैधानिक तौर से दखलअंदाजी कर सकते हैं? क्या इससे विधायिका और न्यायपालिका के बीच में टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी?

राजस्थान के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, 'राज्यपाल कलराज मिश्र भाजपा कार्यकर्ता नहीं हैं वे राजस्थान सरकार के मुखिया हैं। यह हमारा नैतिक और कानूनी अधिकार है कि हम अपनी समस्याओं को बताने के लिए मुखिया के घर जाएं, उनसे कानून की रक्षा करने और हमारे अधिकारों की मांग करने का अनुरोध करें।'

मुख्यमंत्री के बयान पर सफाई देते हुए मंत्री ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने कहा था कि लोग राजभवन आएंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि लोग अंदर जाएंगे। यदि राज्यपाल पर एक भी पत्थर फेंका जाएगा तो सबसे पहले खुद गहलोत इसका सामने करेंगे, राजस्थान कैबिनेट इसका सामना करेगी, राजस्थान की पुलिस इसका सामना करेगी।' 
 


इसके अलावा राजस्थान सरकार ने राज्यपाल कलराज मिश्र को एक नया प्रस्ताव भेजा है जिसमें 31 जुलाई से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि सत्र में विधेयकों और कोरोना वायरस पर चर्चा होगी। यह जानकारी सूत्रों ने दी है।
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