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पंचायत चुनाव: खुद स्कूटी चलाकर मतदान करने पहुंचे 102 साल के रुमेल

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के विकास खंड फतेहपुर की पंचायत लाड़थ के वरोह गांव के 102 वर्षीय सेवानिवृत्त कैप्टन रुमेल सिंह पठानिया खुद स्कूटी चलाकर म...

22 जनवरी 2021

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सोलन के माल रोड में लगी भीषण आग, सिलिंडर के धमाकों से दहला उठा बाजार

सोलन के माल रोड में लगी भीषण आग। सोलन के माल रोड में लगी भीषण आग।

प्रदेश में 11 हजार फीट ऊंचाई पर शुरू हुई हींग की खेती: वीरेंद्र कंवर

हिमाचल प्रदेश के बर्फीले ठंडे रेगिस्तान लाहौल-स्पीति जिले में समुद्रतल से लगभग 11000 फीट की ऊंचाई पर हींग की खेती के लिए राज्य में पायलट परियोजना सफलतापूर्वक शुरू की गई है। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि कवारिंग गांव में 15 अक्तूबर 2020 को हींग के बीजारोपण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। कवारिंग, मडग़्राम, मोबीसेरी, कल्पा तथा पूह के ऊंचे हिमालयन क्षेत्रों में पांच हजार वर्ग मीटर में पायलट आधार पर हींग के पौधे रोपे गए हैं।

इससे राज्य में परंपरागत कृषि पद्धति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत हुई है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर तथा मंडी जिलों के ऊंचे हिमालयी बर्फीले क्षेत्रों में पांच साल में 302 हेक्टेयर क्षेत्र में हींग की खेती कर देश को हींग उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। पायलट परियोजना के तहत कवर किए क्षेत्रों से सटे नए क्षेत्रों में हींग की खेती की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। पालमपुर सीएसआईआर तथा कृषि विभाग के वैज्ञानिक पायलट परियोजना का बारीकी से आकलन कर रहे हैं।

सीएसआईआर के वैज्ञानिक किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण व अन्य मार्गदर्शन एवं सलाह  देंगे। कंवर ने कहा कि हींग की खेती के सफलतापूर्वक व्यावसायिक उत्पादन से हिमालयी क्षेत्रों में एक नई आर्थिक क्रांति का सूत्रपात होगा। प्रदेश में हींग की खेती के लिए न्यूनतम 5 से 10 डिग्री तापमान तथा ऊंचे बर्फीले हिमालयी क्षेत्र अनुकूल माने जाते हैं।

यहां वार्षिक औसतन वर्षा 100-350 मिलीमीटर होती है। हींग की खेती से जुड़े किसानों को बीज, पौधे, प्रशिक्षण तथा ढांचागत सुविधाएं राज्य के कृषि विभाग के माध्यम से मुफ्त दी जाएंगी। अभी तक हींग का आयात अफगानिस्तान तथा ईरान से किया जाता रहा है। इसके व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन के प्रयास पहली बार किए जा रहे हैं।
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जिला परिषद नतीजों से भाजपा को मिली कड़े परिश्रम की सीख

जिला परिषद के नतीजों से हिमाचल भाजपा को कड़े परिश्रम की सीख मिली है। इससे तय है कि मिशन रिपीट के लिए जयराम सरकार को दो साल कड़ी मशक्कत करनी होगी। बेशक ज्यादातर जिलों में भाजपा आगे हैं, पर अगर ढील रही तो आगे राह आसान नहीं होगी। दो साल पहले लोकसभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर से सभी विधानसभा हलकों में भाजपा ने कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया था। पर जिला परिषद चुनाव में भाजपा का वही ग्राफ बना नहीं रह पाया है।

भाजपा सबसे बुरी तरह से कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह के गृह जिला शिमला में हारी है। सोलन, सिरमौर आदि जिलों में भी कांग्रेस ने इसे कांटे की टक्कर दी है। इस हिसाब से शिमला संसदीय क्षेत्र ने भाजपा को चिंता दे दी है। खास बात यह है कि इसी संसदीय क्षेत्र के सिरमौर जिला से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप हैं जो अपने हलके पच्छाद में जिला परिषद की दोनों सीटें नहीं बचा पाए हैं। यह भी पार्टी के लिए अच्छा संदेश नहीं है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी में भाजपा सांसद रामस्वरूप शर्मा के क्षेत्र में भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप हालांकि जिला परिषद के 239 में से 156 वार्डों में भाजपा की जीत की दावा कर रहे हैं, जिनमें संभवतया वह अपने बागियों और निर्दलीयों की भी गिनती कर रहे हैं। पर शनिवार देर शाम तक भाजपा समर्थित 104 उम्मीदवारों पर ही स्थिति साफ हो पाई थी । भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ खड़े हुए भाजपा के दस बागी भी चुनाव जीते तो सत्तारूढ़ दल की विचारधारा के विजेताओं का स्पष्ट आंकड़ा 114 बन रहा था।

कांग्रेस 67 और निर्दलीय 48 सीटों पर विजयी हुए, जबकि माकपा भी आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर चुनाव जीत चुकी थी जो तीसरे मोर्चा बनने का फिर प्रयास कर रही है। इससे साफ होता है कि प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक दो साल पहले हुए इन चुनावों ने भाजपा को आत्मचिंतन के लिए विवश कर दिया है। विपक्ष के मजबूत गढ़ों पर ही नहीं, बल्कि अपने दिग्गजों के हलकों में भी भाजपा के लिए अब नई चुनौती खड़ी है।
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प्रधान पद पर हैट्रिक के बाद अब जिला परिषद में जीत, पत्नी भी बनीं प्रधान

भाजपा
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत मोरसू सुल्तानी के दंपती ने पंचायतीराज चुनावों में जिला परिषद और प्रधान पद पर जीत दर्ज कर मिसाल पेश की है। इसमें पति जिला परिषद सदस्य बने हैं तो पत्नी ने प्रधान पद पर सत्तर फीसदी मत लेकर जीत दर्ज की है। जिला परिषद के वार्ड करेर से जीते भाजपा समर्थित राजेश कुमार की पत्नी रचना देवी भी मोरसू सुल्तानी पंचायत से प्रधान पद का चुनाव जीती हैं।

राजेश कुमार इसी पंचायत में लगातार तीन बार प्रधान रहे हैं। इस बार पंचायत में उनके द्वारा करवाए गए विकास कार्यों को देखते हुए भाजपा ने उन्हें करेर वार्ड से समर्थन दिया था। राजेश कुमार की पत्नी ने मोरसू सुल्तानी पंचायत में 70 फीसदी मत लेकर प्रधान पद पर जीत दर्ज की। तीन बार राजेश कुमार खुद और चौथी बार उनकी पत्नी रचना देवी प्रधान बनी हैं।

राजेश कुमार ने कहा कि उनकी कोशिश थी कि उनकी पंचायत के हर गांव को सड़क से जोड़ा जाए और यह कार्य किया भी। वह अपनी जीत का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व जिला भाजपा अध्यक्ष बलदेव शर्मा सहित इलाके की समस्त जनता को देते हैं।
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हिमाचल: प्रदेश अध्यक्ष के गृह क्षेत्र पच्छाद में भाजपा ने हारे जिप के दोनों वार्ड

हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप के गृह क्षेत्र पच्छाद में 15 वार्ड सदस्यों वाली पंचायत समिति में भाजपा ने सबसे अधिक सीटें जीतने का दावा किया है। लेकिन, जिला परिषद के दो वार्डों में भाजपा बुरी तरह से पिछड़ गई। एक वार्ड में कांग्रेस ने परचम लहराया, जबकि दूसरे में निर्दलीय ने बाजी मारी। सुरेश कश्यप के अपने वार्ड बागपशोग में भाजपा समर्थित उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रही। पच्छाद क्षेत्र की 34 पंचायतों की बागपशोग व नारग जिला परिषद सीटों पर भाजपा समर्थितों का सूपड़ा साफ हो गया है। बागपशोग जिला परिषद से तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। ललिता शर्मा भाजपा, पूनम ठाकुर कांग्रेस व नीलम शर्मा निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं थीं। नीलम शर्मा को 6,058, पूनम ठाकुर को 5,986 व ललिता शर्मा को 4,991 वोट मिले। इसमें नजदीकी मुकाबले में नीलम शर्मा ने पूनम ठाकुर को 72 वोटों से हराया। 

नारग जिला परिषद वार्ड में 14,438 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया था। आनंद परमार कांग्रेस, नरवीर सिंह निर्दलीय, सुभाष शर्मा भाजपा से व रंगी राम भट्टी निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। आनंद परमार को 7,395 मत व दूसरे स्थान पर रहे सुभाष शर्मा को 4,190 वोट मिले। नरवीर सिंह को 1,832 व रंगी राम भट्टी को 667 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इस तरह से जिला परिषद के नारग वार्ड से आनंद परमार 3,205 वोटों के अंतर से विजयी हुए। गौरतलब है कि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को जीताने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, स्थानीय विधायक रीना कश्यप और विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बलदेव भंडारी स्वयं मैदान में उतरे थे लेकिन तीन नेताओं की रणनीति भी काम नहीं आ सकी। भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ने वाली नीलम शर्मा को पार्टी से भी निष्कासित किया गया है।
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धवाला और पवन राणा की रार में पार्टी को चार में से एक भी जिप सीट नहीं

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के विकास खंड देहरा के ज्वालामुखी उपमंडल में चार जिला परिषद सीटों में से भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। कयास लगाए जा रहे हैं कि संगठन मंत्री पवन राणा व विधायक रमेश धवाला की आपसी लड़ाई में भाजपा ने सभी सीटें गंवा दी हैं। इससे पहले ज्वालामुखी नगर परिषद में भाजपा को सिर्फ एक सीट और कांग्रेस को छह सीटें मिली थीं। अब जिला परिषद की चार सीटों के चुनावों के नतीजों में दो सीटें कांग्रेस और दो पर निर्दलीय उम्मीदवारों का कब्जा रहा। यहां भाजपा के चारों दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है।

मझीण वार्ड से कांग्रेस समर्थित कुलदीप चंद धीमान, सिहोरपाई वार्ड से कांग्रेस समर्थित सीमा देवी, धवाला वार्ड से निर्दलीय मोनिका और टिहरी जिला से निर्दलीय सुदेश कुमारी ने जीत हासिल की है। धवाला की अपने ही गृह क्षेत्र में पकड़ कमजोर होती नजर आ रही है। जनता ने भाजपा को नकार कर कांग्रेस व निर्दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। विधायक रमेश धवाला व भाजपा संगठन महामंत्री पवन राणा के बीच पिछले कुछ दिनों से चले विवाद से जिला परिषद में भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है।
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जिला परिषद चुनाव: मनु बाला ने सर्वाधिक 11,492 मत लेकर बनाया रिकॉर्ड

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भोरंज जिला परिषद वार्ड से मनु बाला ने जिले में सर्वाधिक मतों से जीत दर्ज की है। वहीं, लहड़ा वार्ड से संजीव कुमार सेठी जिला परिषद चुनाव जीतने वाले सबसे कम उम्र के प्रत्याशी बने हैं। भोरंज से भाजपा प्रत्याशी 38 वर्षीय मनु बाला जिला परिषद के चुनाव में पहली बार उतरीं और जिले में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीतने का कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। मनु बाला को 18,065 मतों में से 11,492 वोट मिले हैं।

उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी स्वतंत्रता भारद्वाज को 4,919 मतों के अंतर से हराया। वहीं जिला में सबसे अधिक मतों से जीतने वाले धिरड़ वार्ड से पवन कुमार हैं। उन्होंने भाजपा के जिला महामंत्री अभयवीर सिंह लवली को 3,375 मतों के अंतर से शिकस्त दी। जिला में तीसरे नंबर पर बेला वार्ड से इंदुबाला हैं। उन्होंने 3,026 मतों के अंतर से चुनाव जीता। 2,877 मतों के अंतर से जीतने वाले जिला में चौथे नंबर पर दांदडू वार्ड से युवा मोर्चा के अध्यक्ष संजीव कुमार संजू और पांचवें नंबर पर अणु वार्ड से कांग्रेस की आशा ठाकुर रही हैं। आशा ने भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य व निवर्तमान जिप सदस्य बीना कपिल को 2,740 मतों के अंतर से पराजित किया। 

कामरेड की जीत, भाजपा के निवर्तमान पार्षद बिहारी लाल हारे
वार्ड नंबर 15 लहड़ा से भाजपा के निवर्तमान पार्षद बिहारी लाल चुनाव हार गए हैं। इस वार्ड से कामरेड संजीव कुमार सेठी ने भाजपा और कांग्रेस को पटखनी दी। संजीव को 4,316 मत, बिहारी लाल को 4,057 और कांग्रेस के रविंद्र लखनपाल को 3,362 मत पड़े। 28 वर्षीय संजीव कुमार सेठी जिला परिषद चुनाव जीतने वाले जिला में सबसे कम उम्र के प्रत्याशी हैं।
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बिजली बोर्ड और शिक्षा विभाग में जल्द भरे जाएंगे 3000 नए पद

हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड और शिक्षा विभाग में जल्द ही तीन हजार नए पद भरे जाएंगे। बिजली बोर्ड इसी महीने 1892 पदों पर जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्पर का भर्ती परिणाम घोषित करेगा। चुनाव आचार संहिता के चलते परिणाम जारी नहीं हो रहे थे। उधर, शिक्षा विभाग में जेबीटी की बैच वाइज काउंसलिंग भी अब रफ्तार पकड़ेगी। 1225 पदों पर सरकारी स्कूलों में जेबीटी नियुक्त किए जाने हैं।

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जेबीटी के पद भरने को सरकार ने बैचवाइज काउंसलिंग को बीते माह ही हरी झंडी दी थी। बीएड और डीएलएड के विवाद के बीच जिलों को काउंसलिंग करने के निर्देश भी जारी हो गए हैं। डीएलएड करने वालों को ही बैचवाइज भर्ती में प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है।

जेबीटी के 1225 पद भरने के लिए सरकार ने बीते दिनों कानूनी राय ली थी। एनसीटीई ने बीएड को भी जेबीटी भर्ती के लिए पात्र माना है। प्रदेश के आरएंडपी नियमों के तहत जेबीटी करने वालों को भर्ती में शामिल किया जाता है। ऐसे में इस भर्ती को लेकर दुविधा में फंसी सरकार ने कानूनी राय लेने के बाद डीएलएड को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है।

इसके तहत जेबीटी के वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार 467 पदों को भरने के लिए हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को पत्र भेजा गया। शेष 758 पदों को भरने के लिए सभी जिला उपनिदेशकों को वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार बैच वाइज आधार पर काउंसलिंग करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

सभी जिलों को इस बाबत शेड्यूल तैयार करने को कह दिया गया है। उधर, बिजली बोर्ड प्रबंधन ने बीते दिनों जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्पर के 1892 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है। दस्तावेजों का मूल्यांकन भी हो चुका है। अब भर्ती परिणाम घोषित करने की अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
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