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Mahashivratri 2021: 11 मार्च को शिवमय होने का दिन महाशिवरात्रि, जानिए शिवरात्रि की कथा

पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 01 Mar 2021 02:54 PM IST
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mahashivratri 2021: शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है किन्तु फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
mahashivratri 2021: शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है किन्तु फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। - फोटो : अमर उजाला

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परमेश्वर श्रीशिव से कृपा प्रसाद पाने का दिन श्रीमहाशिवरात्रि 11 मार्च, गुरुवार को मंगल के नक्षत्र धनिष्ठा एवं राहू के नक्षत्र शतभिषा में मनाया जाएगा। इसी दिन महान शिव और सिद्ध योग भी है अतः जन्मकुंडली में मंगल और राहू के दोषों से मुक्ति पाने की दृष्टि से इस वर्ष की शिवरात्रि श्रेष्ठ अवसर है। इस रात्रि का स्मरण आते ही भगवान शिव के अनेकों रूपों शिव, शंकर, रूद्र, महाकाल, महादेव, भोलेनाथ आदि-आदि रूपों के अनंत गुणों की कहानियाँ स्मरण होने लगती हैं। 
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शिव ही ब्रह्म हैं और यही ब्रह्म जब आमोद-प्रमोद के लिए नयापन सोचते हैं तो सृष्टि का सृजन करते हैं। महादेव बनकर देव उत्पन्न करते हैं तो, ब्रह्मा बनकर मैथुनी क्रिया से सृष्टि का सृजन करते हैं। अपने ही द्वारा सृजन की गई सृष्टि के जीवों का भरण-पोषण करने के लिए ये महादेव ही श्रीविष्णु बन जाते हैं और इन जीवात्माओं का चिर स्वास्थ्य बना रहे इसके लिए भगवान मृत्युंजय बनकर रोग हरण भी करते हैं। जब यही जीवात्मायें अपने शिवमार्ग से भटकती हैं और अनाचार-अत्याचार में लग जाती हैं तो महाकाल, यम और रूद्र के रूप में इनका संहार भी करते हैं अतः इस चराचर जगत के आदि और अंत शिव ही हैं। 


पृथ्वी लोक पर इनके श्रीरुद्ररूप की पूजा सर्वाधिक होती है। पौराणिक मान्यता है कि महादेव सृष्टि का सृजन और प्रलय शायंकाल-प्रदोष वेला में ही करते हैं इसलिए इनकी पूजा आराधना का फल प्रदोषकाल में ही श्रेष्ठ माना गया है। त्रयोदशी तिथि का अंत और चतुर्दशी तिथि के आरम्भ का संधिकाल ही इनकी परम अवधि है। किसी भी तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण आदि तथा सुबह-शाम के संधिकाल को प्रदोषकाल कहा जाता है। वैसे तो शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है किन्तु फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
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शिवरात्रि की कथा

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